श्रीनगर गढ़वाल: हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद्, श्रीनगर गढ़वाल द्वारा वसंत पंचमी के पावन अवसर पर एक भव्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम प्रोफेसर उमा मैठाणी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की वंदना से हुई, जिसमें सरस्वती देवी के विभिन्न गीतों का सस्वर गायन प्रस्तुत किया गया। हारमोनियम पर डॉ. प्रकाश चमोली तथा ढोलक पर वीरेन्द्र रतूड़ी ‘बिट्टू भाई’ ने संगत देकर आयोजन को संगीतमय वातावरण प्रदान किया।
वरिष्ठ रंगकर्मी विमल बहुगुणा ने गढ़वाली लोकभाषा के गीतों के माध्यम से वसंत ऋतु का स्वागत किया। कवयित्री श्रीमती शाइनी कृष्ण उनियाल ने वसंत की महिमा का वर्णन करती हुई प्रभावशाली कविता का वाचन किया। लोक रंगमंचीय कलाकार अंकित रावत ने लोक गायन से समां बांधा, वहीं प्रसिद्ध कवि जय कृष्ण पैन्यूली ने अपनी कविताओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
कार्यक्रम में श्रीमती माधुरी नैथानी, श्रीमती अनीता नौडियाल, श्रीमती कौशल्या नैथानी एवं श्रीमती मीनाक्षी चमोली ने भी वसंत स्वागतार्थ उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ किया। प्रोफेसर आर. एन. गैरोला ने हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद् की अठारह वर्षों की साहित्यिक यात्रा एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर कृष्णानंद मैठाणी ने स्वरचित कविताओं का सस्वर पाठ किया। बाल कवि प्रद्युम्न उनियाल ने श्रीमती शाइनी उनियाल की कविता का पाठ कर सराहना प्राप्त की। नीरज नैथानी ने भी वसंतमयी काव्य पाठ कर कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।
कार्यक्रम में अनिल स्वामी थपलियाल, श्रीकृष्ण उनियाल, राजेन्द्र प्रसाद कपरुवाण, जसपाल सिंह गुंसाई, डॉ. प्रदीप अणथ्वाल, परिक्षित उनियाल, प्रमोद उनियाल सहित अनेक साहित्यप्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
समापन अवसर पर नेता सुभाष चंद्र बोस के गीत के साथ राष्ट्रगान का समवेत स्वर में गायन किया गया। आयोजन के पश्चात पीले भात, बेसन के लड्डू, गुलाब जामुन एवं रसगुल्लों के साथ वसंत पंचमी की शुभकामनाएं प्रेषित की गईं।



