देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेनि.) भुवन चंद्र खंडूड़ी का मंगलवार को निधन हो गया। वे 91 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे। उनके सम्मान में राज्य में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। उनका अंतिम संस्कार 20 मई बुधवार को हरिद्वार में पुलिस सम्मान के साथ होगा। बुधवार को सभी सरकारी कार्यालय रहेंगे। राज्य सरकार द्वारा बुधवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शासन ने इस बारे में आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी के आकस्मिक निधन के कारण, प्रदेश में 19 मई से 21 मई तक तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है, इस दौरान समस्त सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे। तीन दिन के राजकीय शोक के दौरान कोई भी शासकीय मनोरंजन (Official Entertainment) के कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे।

कल बंद रहेंगे स्कूल:

राज्य में विद्यालय शिक्षा के अंतर्गत सभी शासकीय अशासकीय एवं निजी शैक्षणिक संस्थान 20 तारीख को बंद रहेंगे। उत्तराखंड के माध्यमिक शिक्षा और प्रारंभिक शिक्षा निदेशक की तरफ से सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को दिए गए आदेशों में कहा गया है कि भूतपूर्व मुख्यमंत्री के सम्मान में 20 तारीख को उनकी अंत्येष्टि के दिन राज्य सरकार के समस्त कार्यालय बंद रहेंगे। ऐसे में राज्य में विद्यालय शिक्षा के अंतर्गत समस्त शासकीय अशासकीय और निजी शैक्षणिक संस्थानों और कार्यालयों में शासन की ओर से जारी निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। 20 मई उत्तराखंड के सभी शिक्षण संस्थान और कार्यालय बंद रहेंगे।

बीसी खंडूड़ी का जीवन परिचय

एक अक्टूबर 1934 को देहरादून में जन्मे भुवन चंद्र खंडूड़ी मूलरूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी थे। खंडूड़ी की पढ़ाई-लिखाई इलाहाबाद विश्वविद्यालय, सैन्य अभियांत्रिकी महाविद्यालय (सीएमई) पुणे, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स, नई दिल्ली और रक्षा प्रबंध संस्थान सिकंदराबाद में हुई। राजनीति में आने से पहले उन्होंने 1954 से लेकर 1990 तक भारतीय सेना के इंजीनियरिंग कोर में 36 साल की लंबी सेवा दी। अपनी कार्यकुशलता और सेवाभाव के लिए उन्हें 1982 में ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ से सम्मानित किया गया। 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध में वे रेजीमेंट कमांडर रहे थे। मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। वह 1991 में पहली बार गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद चुने गए और इसके बाद कई बार संसद पहुंचे। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्हें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई, जहां उनके कार्यकाल को देश में सड़क विकास और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को गति देने के लिए याद किया जाता है। दूरस्थ गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने में उनकी प्रशासनिक सख्ती और दूरदृष्टि को आज भी महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।

बीसी खंडूड़ी दो बार उत्तराखंड राज्य के मुख्यमंत्री रहे। पहली बार 2007 से 2009 तक और दूसरी बार 2011 से 2012 तक सीएम रहे। वह पहली बार 8 मार्च 2007 से 27 जून 2009 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। फिर 11 सितंबर 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के इस्तीफे के बाद वे वापस उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने।

राज्यपाल ने जताया शोक

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेनि) के निधन पर शोक व्यक्त किया है। राज्यपाल ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड के विकास, सुशासन और सैनिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने में मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेनि) का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जताया शोक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ राजनेता मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेवानिवृत्त)  के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खंडूड़ी  जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन एवं समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सार्वजनिक जीवन में भी उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने प्रदेशहित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लेकर विकास को नई दिशा प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि खंडूड़ी जी की सादगी, स्पष्टवादिता एवं कार्यकुशलता सदैव प्रेरणास्रोत रहेगी। उनका निधन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान तथा शोक संतप्त परिजनों एवं समर्थकों को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।