अखिलेश चन्द्र चमोला, मण्डलीय नशा उन्मूलन नोडल अधिकारी, गढ़वाल मण्डल
विश्व तंबाकू निषेध दिवस (31 मई) केवल एक जागरूकता दिवस नहीं, बल्कि आत्ममंथन और सामाजिक चेतना को जगाने का अवसर है। तंबाकू का सेवन आज समाज के सामने एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है, जो न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि परिवार की खुशियों, आर्थिक स्थिति और सामाजिक ताने-बाने को भी कमजोर करता है।
मण्डलीय नशा उन्मूलन नोडल अधिकारी गढ़वाल मंडल अखिलेश चन्द्र चमोला ने कहा कि तंबाकू एक धीमा जहर है, जो कैंसर, हृदय रोग और श्वसन संबंधी गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण बनता है। बीड़ी, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन व्यक्ति के साथ-साथ उसके परिवार के भविष्य को भी प्रभावित करता है।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड, विशेषकर गढ़वाल मंडल की युवा शक्ति राज्य और देश की अमूल्य धरोहर है। यदि युवा वर्ग नशे की गिरफ्त में आता है, तो इसका सीधा असर समाज और राष्ट्र के भविष्य पर पड़ता है। इसी उद्देश्य से गढ़वाल मंडल में विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर नशा उन्मूलन एवं तंबाकू विरोधी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
चमोला ने तंबाकू मुक्त समाज के निर्माण में परिवार, शिक्षण संस्थानों और समाज की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बच्चों को प्रारंभ से ही नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही युवाओं को मित्रों के दबाव में आकर तंबाकू सेवन जैसी आदतों से बचना होगा।
उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध कानूनों के कड़ाई से पालन और तंबाकू उत्पादों की सुलभता पर नियंत्रण की आवश्यकता पर भी बल दिया।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर उन्होंने सभी नागरिकों से तंबाकू और अन्य नशे के खिलाफ जनजागरण अभियान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ, जागरूक और नशामुक्त समाज ही समृद्ध राष्ट्र की आधारशिला है।
“सुलगती सिगरेट से नहीं, संकल्प की अग्नि से समाज को रोशन करें। तंबाकू को कहें ‘ना’ और जिंदगी को कहें ‘हाँ’।”



