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नई दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में भारतीय योग संस्थान का 60वां योग दिवस समारोह भव्य रूप से संपन्न, 10 हजार से अधिक साधकों ने किया सामूहिक योगाभ्यास

नई दिल्ली: भारतीय योग संस्थान का 60वां योग दिवस समारोह शुक्रवार 2 अक्टूबर 2026 को छत्रसाल स्टेडियम, मॉडल टाउन, नई दिल्ली में भव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। प्रातः 6:00 बजे से 8:00 बजे तक आयोजित इस कार्यक्रम में श्वेत वस्त्रधारी 10 हजार से अधिक साधक-साधिकाओं ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन और योग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का संदेश दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण, दीप प्रज्ज्वलन, शंखनाद एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। खुले आकाश में उड़ते रंग-बिरंगे गुब्बारों तथा शांति के प्रतीक सफेद कबूतरों ने समारोह की भव्यता और आकर्षण को और बढ़ा दिया। दिल्ली-एनसीआर के अलावा गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, नोएडा, गन्नौर सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में साधक-साधिकाओं ने समारोह में भाग लिया।

संस्थान के अनुभवी अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुए सामूहिक योगाभ्यास का दृश्य अत्यंत मनमोहक रहा। इस अवसर पर भारतीय योग संस्थान के प्रधान देस राज जी ने लगभग 10 हजार साधकों को संबोधित करते हुए ‘स्वस्थ जीवन और योग’ विषय पर सारगर्भित विचार रखे। उन्होंने कहा कि योग से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य की प्राप्ति के साथ-साथ नैतिक विकास और स्वस्थ समाज के निर्माण में भी सहायता मिलती है।

उन्होंने कहा कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है और शरीर में होने वाले परिवर्तनों को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है। हालांकि योग, स्वस्थ दिनचर्या, सुपाच्य भोजन, सक्रिय जीवनशैली तथा सेवा एवं स्वाध्याय को अपनाकर स्वस्थ वृद्धावस्था प्राप्त की जा सकती है।

कार्यक्रम में भारतीय योग संस्थान के अखिल भारतीय महामंत्री ललित गुप्ता ने संस्थान के संस्थापक श्रद्धेय स्व. प्रकाश लाल जी को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए प्राणायाम साधना एवं ध्यान करवाया।

इस अवसर पर सांस्कृतिक समिति द्वारा मधुर एवं प्रेरक सामूहिक गीत ‘तन मन जीवन चलो संवारें’ प्रस्तुत किया गया, जिसने समारोह में उपस्थित साधकों में नई ऊर्जा का संचार किया।

योग भारतीय संस्कृति और मानव कल्याण का आधार : भारत भूषण

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री परम श्रद्धेय योगाचार्य भारत भूषण जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने अपने संबोधन में योग की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि योग भारतीय संस्कृति और मानव-मात्र के कल्याण का मूल आधार है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन-शैली और आत्मसाधना का समग्र रूप है।

उन्होंने सभी को नियमित रूप से योग साधना करने के लिए प्रेरित किया तथा भारतीय योग संस्थान द्वारा आयोजित भव्य समारोह के लिए संस्थान को बधाई देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

 ‘विभूतिपाद’ पुस्तक का हुआ लोकार्पण

कार्यक्रम के दौरान संस्थान के प्रधान देस राज द्वारा लिखित तथा डॉ. मीनू गुप्ता द्वारा संपादित पुस्तक ‘विभूतिपाद’ का लोकार्पण किया गया। डॉ. मीनू गुप्ता ने इस अवसर पर पुस्तक का संक्षिप्त परिचय भी प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के अंत में संस्थान के अखिल भारतीय कोषाध्यक्ष सुरेश विज जी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन डॉ. मीनू गुप्ता द्वारा किया गया। समारोह का समापन डॉ. मीनू गुप्ता एवं उनके साथियों द्वारा प्रार्थना तथा शांतिपाठ के गायन के साथ हुआ।