ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा के बीटा-2 सेक्टर में एक बार फिर दूषित एवं बदबूदार पेयजल की समस्या गंभीर हो गई है। सेक्टरवासियों का आरोप है कि नलों से सीवर जैसी दुर्गंध वाला पानी आ रहा है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से समस्या की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराकर स्थायी समाधान की मांग की है।

गौरतलब है कि लगभग डेढ़ माह पूर्व 21 एवं 22 मई 2026 को स्थानीय समाचार पत्रों में इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद प्राधिकरण हरकत में आया था। अधिकारियों के निर्देश पर सेक्टर के कुछ स्थानों पर क्षतिग्रस्त पेयजल पाइपलाइन बदली गई थी। इसके बाद कुछ समय तक जलापूर्ति सामान्य रही, लेकिन अब फिर से घरों में बदबूदार और दूषित पानी की सप्लाई शुरू हो गई है। इससे पहले भी 16-17 जून को भी सेक्टर के कई घरों में गंदे और बदबूदार पानी की की शिकायत मिली थी, तब भी इस संबंध में हमने प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक (जल एवं सीवर विभाग) विनोद शर्मा से फोन पर बात करने की कोशिश की परतुं उन्होंने फोन नहीं उठाया, उनके व्हाट्सएप पर गंदे पानी से भरी बाल्टी की फोटो भी भेजी थी परन्तु उनकी तरहसे कोई भी जवाब नहीं मिला।

शुरुआत में मटमैला, फिर आने लगती है दुर्गंध

निवासियों के अनुसार जलापूर्ति शुरू होने पर पहले कुछ देर तक नलों से मटमैला पानी आता है, जिसके बाद पानी में सीवर जैसी तेज दुर्गंध महसूस होती है। लोगों का कहना है कि केवल एक-दो फुट पाइपलाइन बदल देने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। यदि मरम्मत के बाद भी स्थिति दोबारा उत्पन्न हो रही है, तो स्पष्ट है कि समस्या की जड़ तक पहुंचकर समाधान नहीं किया गया।

बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर खतरा

सेक्टरवासियों का कहना है कि दूषित पेयजल बच्चों, बुजुर्गों एवं बीमार लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। कई परिवार पीने के लिए बोतलबंद पानी खरीदने या वैकल्पिक व्यवस्था करने को मजबूर हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।

आई-ब्लॉक के निवासियों ने जताई नाराजगी

बुधवार दोपहर और शाम को आई-ब्लॉक में नलों से बदबूदार पानी आने पर I-205, I-202, I-197, I-168 सहित कई मकानों के निवासियों ने ब्लॉक के व्हाट्सएप ग्रुप में शिकायत दर्ज कराई। लोगों ने प्राधिकरण के अधिकारियों के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की बात भी कही।

25-30 वर्ष पुरानी पाइपलाइन बनी परेशानी की वजह

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्राधिकरण हर बार पाइपलाइन लीकेज, तकनीकी खराबी या मोटर में समस्या बताकर अस्थायी समाधान करता है, जबकि मूल समस्या का निस्तारण नहीं किया जाता। उनका कहना है कि सेक्टर की 25 से 30 वर्ष पुरानी जलापूर्ति पाइपलाइनें जर्जर हो चुकी हैं, जिनमें जगह-जगह लीकेज है। आशंका है कि इन्हीं लीकेज वाले स्थानों से सीवर का दूषित पानी पेयजल पाइपलाइन में मिल रहा है।

पूरे नेटवर्क का सर्वे कराने की मांग

सेक्टरवासियों ने मांग की है कि पूरे जलापूर्ति नेटवर्क का तकनीकी सर्वे कराया जाए, पानी के नमूनों की प्रयोगशाला जांच कराई जाए तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर पुरानी पाइपलाइन को चरणबद्ध तरीके से बदलने की योजना बनाई जाए, ताकि लोगों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।

आंदोलन की चेतावनी

निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो वे ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे और जिला प्रशासन से भी शिकायत करेंगे।