कोटद्वार, 7 जुलाई: वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी की सटीक रणनीति और पुलिस टीमों की लगातार चार दिनों की मेहनत रंग लाई। कोटद्वार में बंद मकानों को निशाना बनाने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय चोरी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पौड़ी गढ़वाल पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरोह के सदस्य चोरी की मोटरसाइकिलों से कॉलोनियों की रेकी कर बंद मकानों में लाखों रुपये की नगदी और आभूषण चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे।

पुलिस के अनुसार 2 जुलाई 2026 को कोटद्वार निवासी उमेश चंद बमोला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि जून माह में परिवार सहित पैतृक गांव जाने के दौरान उनके बंद मकान से अज्ञात चोर नगदी एवं आभूषण चोरी कर ले गए। शिकायत के आधार पर कोतवाली कोटद्वार में बीएनएस की धारा 305 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी पौड़ी सर्वेश पंवार ने तत्काल अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन कर घटना के शीघ्र खुलासे के निर्देश दिए। अपर पुलिस अधीक्षक कोटद्वार मनोज कुमार ठाकुर, क्षेत्राधिकारी अस्मिता ममगाई एवं प्रभारी निरीक्षक प्रदीप नेगी के नेतृत्व में पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य, सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र की सहायता से जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से लेकर दुर्गापुरी, देवी मंदिर रोड, नजीबाबाद रोड, नजीबाबाद तथा हरिद्वार मार्ग तक लगे लगभग 120 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का सूक्ष्म विश्लेषण किया। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने 6 जुलाई को चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहित (गाजियाबाद), कासिफ उर्फ नन्हे (बरेली), आमिर (बरेली) तथा आसिफ उर्फ अमन (बरेली) के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने कोटद्वार में चोरी की घटना को अंजाम देना स्वीकार किया। उन्होंने चोरी किए गए आभूषण मात्र 15 हजार रुपये में बेचने की बात भी कबूल की। पुलिस ने उनके कब्जे से चोरी की रकम में से 13,600 रुपये नकद बरामद किए हैं।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने 26 जून 2026 को ऊधमसिंह नगर जिले के किच्छा थाना क्षेत्र से एक अपाचे मोटरसाइकिल चोरी की थी, जिसका उपयोग कोटद्वार में चोरी की वारदात को अंजाम देने के लिए किया गया। मामले में गिरोह का मुख्य साथी मोहम्मद आरिफ निवासी दिल्ली अभी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है।

ऐसे करते थे वारदात

पुलिस के अनुसार गिरोह पहले कार से शहर पहुंचता था और वहां से मोटरसाइकिल चोरी कर बंद मकानों की रेकी करता था। मौका मिलने पर मकानों के ताले तोड़कर चोरी की वारदात को अंजाम देता था। पुलिस को भ्रमित करने के लिए चोरी की मोटरसाइकिल कई बार घटनास्थल के आसपास ही छोड़ दी जाती थी। चोरी का सामान तुरंत दूसरे साथियों के माध्यम से अलग वाहन में भेज दिया जाता था, ताकि गिरफ्तारी की स्थिति में बरामदगी न हो सके।

एसएसपी सर्वेश पंवार ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली पुलिस टीम को 5 हजार रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है।