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युवा कांग्रेस ने केंद्र सरकार की वर्चुअल रैली का काली पट्टी बांध कर किया विरोध।

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Youth Congress opposes the virtual rally of the Central Government by black band

सतपुली : पौड़ी में आज केंद्र सरकार की वर्चुअल रैली के खिलाफ भारतीय राष्ट्रीय युवा कांग्रेस ने लॉकडाउन के चलते अपने अपने घरों पर काली पट्टी बांध कर अपना विरोध दर्ज कराया। जिला उपाध्यक्ष आशीष नेगी ने कहा कि जहां एक तरफ कोरोना महामारी के चलते पूरे देश भर में लोग त्रस्त हैं और लॉकडाउन की वजह से हर एक परिवार आज बेरोजगारी की मार झेल रहा है ऐसे में देश के प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को देश की जनता की फिक्र ना होकर बिहार की चुनावी रैली के लिए अभी से जुट गए हैं और जिनके पास किसानों, मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए 600 रुपये नहीं थे वे आज 144 करोड़ खर्च करके वर्चुअल रैली कर रहे हैं। इसी क्रम में बीजेपी उत्तराखंड में भी रैली करने जा रहे है इससे साफ जाहिर है कि इस सरकार को गरीबों से कोई लेना-देना नहीं है इस सरकार को बस सिर्फ सत्ता पाना है चाहे वह किसी भी कीमत पर क्यों ना हो इसी के चलते युवा कांग्रेस पौड़ी द्वारा काली पट्टी बांध कर विरोध प्रदर्शन किया गया।

विरोध करने वालों में विधानसभा सचिव पवन गौड़, संजना गुजराल, शिवानी भंडारी, निशा, मोहित आदि शामिल थे।

पीएम मोदी ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से केदारनाथ में चल रहे कार्यों की जानकारी ली, राज्य सरकार को केन्द्र से हर सम्भव मदद का दिलाया भरोसा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से श्री केदारनाथ में चल रहे कार्यों की जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने ड्रोन के माध्यम से श्री केदारनाथ में चल रहे विभिन्न कार्यों का अवलोकन भी किया। उन्होंने केदारनाथ मन्दिर परिसर, आदिगुरू शंकराचार्य की समाधि, सरस्वती घाट एवं आस्था पथ, भैरव मन्दिर के रास्ते पर बने पुल, केदारनाथ में बन रही गुफाओं, मन्दाकिनी नदी पर बन रहे पुल, मंदाकिनी एवं सरस्वती के संगम पर बन रहे घाटों का अवलोकन किया।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि रामबाड़ा से केदारनाथ तक छोटे-छोटे पेच को श्री केदारनाथ की ऐतिहासिकता से जोड़ा जाय, ताकि श्रद्धालुओं को केदारनाथ के ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व के बारे में भी रोचक जानकारियां मिल सके। इस क्षेत्र में आध्यात्म से संबंधित भी अनेक कार्य किये जा सकते हैं। इस ओर ध्यान दिया जाय। इससे श्रद्धालुओं को श्री केदारनाथ के दर्शन के साथ ही यहां से जुड़ी धार्मिक एवं पारंपरिक महत्व के बारे में भी जानकारी मिलेगी। केदारनाथ के आस-पास जो गुफाएं बनाई जा रही हैं, उनका सुनियोजित तरीके से विकसित किया जाए ताकि इनका स्वरूप आकर्षक हो। प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी केदारनाथ में निर्माण कार्य तेजी से किये जा सकते हैं। शीर्ष प्राथमिकता के कार्य चिन्हित कर पहले उन्हे पूर्ण कर लिया जाय। उन्होंने कहा कि भगवान केदारनाथ एवं बदरीनाथ में विभिन्न कार्यों के लिए राज्य सरकार को केन्द्र से हर सम्भव मदद दी जायेगी। भगवान बदरीनाथ धाम के लिए भी डेवलपमेंट प्लान बनाया जाय। अगले 100 साल तक की परिकल्पना के हिसाब से डेवलपमेंट प्लान बनाया जाय। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने श्री केदारनाथ में यात्रा की स्थिति के बारे में जानकारी ली।

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मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि केदारनाथ में विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए राज्य को लगभग 200 करोड़ रूपये की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों के लिए सीमित संख्या में भगवान केदारनाथ एवं बदरीनाथ जी के दर्शन के लिए अनुमति दी गई है। मास्क का उपयोग, सामाजिक दूरी के पालन करते हुए एक दिन में अधिकतम 800 लोग दर्शन कर सकते हैं।

इस अवसर पर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने श्री केदारनाथ में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आदिगुरू शंकराचार्य की समाधि के पुनर्निर्माण का कार्य 31 दिसम्बर 2020 तक पूरा हो जायेगा। सरस्वती घाट का कार्य पूर्णता की ओर है, यह कार्य 30 जून जक पूर्ण हो जायेगा। भैरव मन्दिर के रास्ते पर पुल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, यह कार्य निर्धारित समयावधि से पहले ही पूरा किया गया है। तीर्थ पुरोहितों को रहने के लिए 05 ब्लॉको में घर बनाऐ जा रहे हैं, जिसमें से 02 ब्लाको में बनाये जा चुके हैं, शेष ब्लाको में सितम्बर तक कार्य पूरा हो जायेगा। केदारनाथ में आध्यात्म की दृष्टि से तीन गुफाएं बनाई जा रही हैं, जिनका निर्माण कार्य सितम्बर 2020 तक पूर्ण हो जायेगा। मन्दाकिनी नदी पर बन रहे पुल का कार्य 31 मार्च 2021 तक पूर्ण किया जायेगा। उन्होंने कहा कि श्री केदारनाथ में ओपन म्यूजियम बनाने की योजना भी बनाई जा रही है।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश, सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर भी उपस्थित थे।

कारगिल शहीद धर्म सिंह रावत के गांव में पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं ग्रामीण

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कल्जीखाल : यूँ तो पहाड़ के ज्यादातर गांवों में गर्मियों का सीजन शुरू होते ही पीने के पानी के लिए मारामारी शुरू हो जाती हैं। इसका मुख्य कारण यह हैं कि गांवों में जो पीने का पानी आता है वह प्राकृतिक श्रोतों से आता है। और गर्मियां आते आते यहाँ के प्राकृतिक श्रोत सूखने लगते हैं। साथ ही गर्मियों की छुट्टियों में बाहरी राज्यों से बड़ी संख्या में प्रवासी भी गाँव पहुँच जाते हैं, जिस कारण पानी की खपत भी बढ़ जाती है। हालाँकि अब ज्यादातर गांवों में सरकार द्वारा पेयजल योजना के तहत पाइपलाइन द्वारा नदी, नयारों से पीने का पानी पहुँचाया जा चुका है। परन्तु कई किलोमीटर दूर से आ रही इन पाइपलाइनों के सही तरह से रख रखाव न होने के कारण अक्सर पाइपलाइन जगह-जगह टूटी पड़ी रहती हैं। जिससे कि ग्रामीणों को कई कई दिन तक पीने का पानी नसीब नहीं हो पाता है।

पौड़ी गढ़वाल के कल्जीखाल ब्लॉक के अंतर्गत ऐसे ही एक गाँव कारगिल शहीद धर्म सिंह रावत का गाँव टंगरोली है। जहाँ इन दिनों पीने के पानी की जबरदस्त किल्लत हो गई है। कोरोना महामारी के चलते गाँव पुहुँचे कई प्रवासी पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। हमारे संवाददाता जगमोहन डांगी ने जब टंगरोली गाँव का दौरा किया तो ग्रामीणों ने बताया कि गाँव में प्राकृतिक श्रोत से जो पानी आ रहा था, वह लगभग सूख गया है। हालाँकि अभी भी पूरा गाँव इसी पानी पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि दो घंटे लाइन में लगने के बाद नंबर आता है और उसमे भी एक परिवार को केवल 2 बर्तन पानी ही मिल पाता है। क्योंकि उसके बाद पानी की टंकी को बंद कर दिया जाता है ताकि दूसरे दिन के लिए पानी जमा हो सके। जब ग्रामीणों से पूछा गया कि क्या कारगिल शहीद धर्म सिंह रावत के गाँव में पाइपलाइन से पानी नहीं आता है, तो उनका कहना था कि ज्वाल्पा पम्पिंग योजना के तहत यहाँ भी पाइपलाइन बिछी हुई है। टैंक बना हुआ है, पानी के स्टैंड लगे हुए हैं। परन्तु नल सूखे पड़े रहते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि यह पाइपलाइन ज्वाल्पा से होकर कई गांवों को पानी की सप्लाई देते हुए यहाँ तक पहुंची है। और यहाँ पहुँचने से पहले ही पानी समाप्त हो जाता है। पानी की किल्लत को लेकर ग्रामीणों खासकर दिल्ली/एनसीआर से लौटे प्रवासियों में खासा रोष है। उनका कहना है कि जब गाँव में पीने का पानी ही उपलब्ध नहीं है तो फिर हम लोग यहाँ खेती बाड़ी या स्वरोजगार से जुड़े व्यवसाय के बारे में कैसे सोच सकते हैं। इन्ही मूलभूत सुविधाओं की कमी के चलते पहले भी लोग पलायन को मजबूर हुए थे, और जब वापस लौटे हैं तो भी यही हाल हैं। उन्होंने अपने क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य संजय डबराल से इस समस्या को शासन/प्रशासन तक पहुँचाने की बात कही। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्दी ही गाँव में पीने के पानी की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो इसके लिए वे आन्दोलन करने पर मजबूर हो जायेंगे। इस मौके पर टंगरोली की ग्रामप्रधान संतोषी देवी, उप प्रधान जय रावत, विमल कुमार (छात्र संघ उपाध्यक्ष), दीपक कुमार (प्रवासी) सहित कई ग्रामीण मौजूद थे।

देवभूमि संवाद के लिए टंगरोली (कल्जीखाल) से जगमोहन डांगी एवं विक्रम पटवाल की रिपोर्ट।

डोभ-श्रीकोट स्थित पौड़ी नर्सिंग कॉलेज में बना 250 बेड का नया कोविड सेंटर

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पौड़ी : कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव व रोकथाम के लिए पौड़ी जिला प्रशासन द्वारा जनपद में बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों के लिए नया कोविड केयर सेंटर तैयार किया गया है। जिला प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने डोभ श्रीकोट स्थित नर्सिंग कालेज पौड़ी के नव निर्मित भवन को नए कोविड केयर सेंटर के रुप में विकसित किया है। नए कोविड केयर सेंटर का संचालन आगामी तीन दिनों में शुरु हो जाएगा। मंगलवार को जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल ने डोभ श्रीकोट स्थित 250 बेड के नए केयर सेंटर का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं।

मंगलवार को डीएम गर्ब्याल ने केयर सेंटर में तैयारियों का जायजा लिया। इस मौके पर उन्होंने बताया कि नए कोविड केयर सेंटर में बिना लक्षण के कोरोना पॉजिटिव आने वाले मरीजो का उपचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सेंटर में 250 बेड की सुविधा के साथ ही खाने की व्यवस्था भी की गई है। डीएम ने बताया कि सभी तैयारियों को अंतिम रुप देकर आने वाले तीन दिनों के अंदर कोविड सेंटर का संचालन शुरु करने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दिए गए हैं। एसीएमओ डा. रमेश कुंवर ने बताया कि नए कोविड केयर सेंटर में 6 डाक्टरों, 2 फार्मासिस्ट सहित पूरे स्टाफ की नियुक्ति कर ली गई है। इस अवसर पर एसडीएम सदर अंशुल सिंह, नायब तहसीलदार रामपाल सिंह रावत, डा. रश्मि बिष्ट, डा. मोहित, नर्मता आदि मौजूद रहे। डीएम डीएस गर्ब्याल ने बताया कि श्रीनगर व कोटद्वार में भी कोविड केयर सेंटर बनाए जाएंगे।

उत्तराखंड में कोरोना विस्फोट, आज मिले 126 नए केस, एक ही जिले से 72 मामले, 1537 पहुंचा मरीजों का कुल आंकड़ा

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देहरादून : उत्तराखंड में मंगलवार को कोरोना का विस्फोट हुआ है। मंगलवार को राज्य में कुल 126 नए कोरोना पॉजिटिव सामने आये हैं। कोरोना वायरस संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामलों से प्रदेश की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं। मंगलवार दोपहर में जहाँ कोरोना के 77 मामले सामने आये थे, वहीँ रात 9 बजे जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में 49 नए लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है।

आज कोरोना पॉजिटिव आये 126 लोगों में से अकेले 72 मामले टिहरी जिले से हैं। जिससके बाद राज्य में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़कर 1537 हो गई है। हालांकि अब तक विभिन्न अस्पतालों से कुल 755 लोग स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं। वहीँ राज्य में अब तक कोरोना संक्रमित 13 मरीजों की मौत भी हो चुकी है। अन्य राज्यों को भी 7 मरीज चले गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार आज कुल 126 मामलों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। जिसमे टिहरी जिले में सर्वाधिक 72  संक्रमित मरीज मिले हैं। इसके अलावा देहरादून में 21, पिथोरागढ़ तथा हरिद्वार जिले में 7-7, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, नैनीताल जिलों में 4-4 कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। इसके अलावा बागेश्वर में 05, अल्मोड़ा तथा उत्तरकाशी जिले में एक-एक  कोरोना संक्रमित मरीज की पुष्टि हुई है। आज टिहरी जनपद में मिले 72 कोरोना संक्रमितों में से 69 लोग मुंबई, महाराष्ट्र से यहाँ लौटे हैं। प्रदेश में कुल कोरोना संक्रमित मरीजों में से 50% से अधिक मरीज ठीक हो चुके हैं।

उत्तराखंड में अब तक कोरोना covid-19 के जिलेवार मामले

जनपद कोरोना के मरीज
देहरादून396
नैनीताल328
टिहरी221
उधमसिंह नगर91
हरिद्वार151
पौड़ी51
अल्मोड़ा74
पिथौरागढ़51
चमोली34
उत्तरकाशी24
बागेश्वर40
चंपावत48
रुद्रप्रयाग28
कुल1537

 

 

नोएडा में गर्भवती महिला की मौत के मामले में डीएम की बड़ी कार्रवाई, दोषी अस्पतालों पर FIR के दिए आदेश

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death of pregnant woman in Noida

नोएडा : गौतमबुद्ध नगर जिले के नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा के बड़े अस्पतालों की घोर लापरवाही के चलते बीते शुक्रवार को खोड़ा निवासी गर्भवती महिला नीलम और उनके अजन्मे बच्चे की मौत के मामले में गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की है। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी सुहास एल.वाई. ने सेक्टर-24 स्थित ईएसआईसी अस्पताल, सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल और ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के अधिकारियों और चिकित्सकों को जिम्मेदार ठहराया है। डीएम ने तीनों अस्पतालों के अधिकारियों, चिकित्सकों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है। यही नहीं डीएम ने नोएडा जिला अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) के पद पर तैनात डॉ. वंदना शर्मा को यहां से स्थानांतरित करने और स्टाफ नर्स राजबाला तथा वार्ड आया अनीता के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है। इसके अलावा जिलाधिकारी ने नोएडा के निजी अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दोष के अनुसार मुकदमा दर्ज कराने का सीएमओ को निर्देश दिया गया है। साथ ही निजी अस्पतालों के लिए गाइडलाइन भी जारी किए गए हैं।

बतादें कि बीते 5 जून (शुक्रवार) को नोएडा/ग्रेटर नोएडा के अस्पतालों के चक्कर काटते-काटते खोड़ा निवासी 8 महीने की गर्भवती महिला नीलम की ऐम्बुलेंस में ही मौत हो गई थी। महिला का पति उसे इलाज के लिए एम्बुलेंस में लेकर गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत 8 अस्पतालों के चक्कर काटता रहा। परन्तु करीब 13 घंटे तक भटकने के बाद भी गर्भवती महिला को गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के किसी भी अस्पताल में इलाज नहीं मिला था। आखिरकार इलाज के अभाव में गर्भवती महिला ने एम्बुलेंस में ही दम तोड़ दिया था। महिला के पति ने इस घटना का वीडियो बनाया जो सोशलमीडिया में खूब वायरल हुआ और नोएडा के अस्पतालों की अमानवीयता और गैरजिम्मेदाराना हरकत से हुई गर्भवती महिला की मौत से लोगों में जबरदस्त गुस्सा था. जिसके बाद नोएडा जिला प्रशासन ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए इस मामले की जांच के लिए गठित कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद आज बड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं.

जिलाधिकारी ने बताया कि जांच में पाया गया कि परिजन नीलम को लेकर सबसे पहले सेक्टर-24 स्थित ईएसआईसी अस्पताल पहुंचे थे। नीलम को वहां उपचार नहीं दिया गया। उसे ग्रेटर नोएडा स्थित जिम्स रेफर कर दिया गया। ईएसआईसी अस्पताल के कर्मचारियों ने घोर लापरवाही बरती। ये लोग नीलम को लेकर जिम्स की बजाय सेक्टर-30 जिला अस्पताल पहुंचे और नीलम को छोड़कर चले गए। इस मामले में सबसे पहले ईएसआईसी अस्पताल के मैनेजमेंट, कर्मचारी और चिकित्सकों ने बड़ी गलती की है। एंबुलेंस के चालक को भी जिम्मेदार माना गया है। इन सारे लोगों पर कार्रवाई के लिए उप्र सरकार के प्रमुख सचिव श्रम और केंद्र सरकार के श्रम विभाग के सचिव को पत्र लिखा गया है। जांच में पाया गया है कि मरीज को हायर सेंटर पर उचित व्यवस्था के साथ रेफर किया जाना चाहिए था। इसके लिए जिला अस्पताल के चिकित्सक और कर्मचारियों को हायर सेंटर पर बात कर ट्रांसफर करना चाहिए था। जिला अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों ने गंभीर लापरवाही बरती है। उस वक्त अस्पताल में उपस्थित कर्मचारी और चिकित्सक इस घटना के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल की सीएमएस डा. वंदना शर्मा को कई बार अस्पताल के हालात सुधारने को कहा गया था लेकिन उनके द्वारा लगातार लापरवाही बरती गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर सीएमएस का जिले से बाहर तबादला करने और उनके स्थान पर योग्य अधिकारी की तत्काल नियुक्ति करने के लिए शासन से सिफारिश की गई है। जिला अस्पताल में उस दिन कार्यरत स्टाफ नर्स रोजबाला, आया अनीता, सीएमएस डा. वंदना शर्मा और जिम्मेदार चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

जिलाधिकारी ने बताया कि इसके बाद नीलम को गाजियाबाद ले जाया गया। गाजियाबाद के अस्पतालों ने भी नीलम को दाखिल करने और इलाज देने से इनकार कर दिया था। गाजियाबाद के अस्पतालों की ओर से बरती गई लापरवाही पर कार्रवाई करने के लिए वहां के जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया है।

गाजियाबाद से जब दोबारा नीलम ग्रेटर नोएडा जिम्स पहुंची तो उन्हें भर्ती किया गया था लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और उनकी मौत हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों के अलावा नीलम के परिजन उन्हें कई निजी अस्पतालों में भी लेकर गए थे। निजी अस्पतालों ने भी उन्हें इलाज नहीं दिया और कोरोना का बहाना बनाकर दूसरे अस्पतालों में ले जाने की सलाह दी। लापरवाही में लिप्त पाए गए प्राइवेट अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी करने और समिति के माध्यम से मामले की जांच कराते हुए मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई करने के लिए सीएमओ को जिलाधिकारी ने निर्देशित किया है।

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यमुना प्राधिकरण : वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 8 औद्योगिक इकाइयों को आवंटित की गई भूमि

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Land allotted to 8 industrial units through video conferencing by Yamuna Authority

ग्रेटर नोएडा : कोरोना संकट काल में भी यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण औद्योगिक विकास को गति देने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। कोरोना वायरस के चलते कामकाज प्रभावित न हो, इसलिए औद्योगिक इकाइयों को भूमि आवंटित करने में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का सहारा लिया जा रहा है। मंगलवार को प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 8 औद्योगिक इकाइयों के लिए भूमि का आवंटन किया गया। इससे प्राधिकरण क्षेत्र में कुल 286.76 करोड़ रूपये का निवेश तथा 21,413 लोगों को रोजगार का अवसर प्राप्त होगा।

प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरूणवीर सिंह ने बताया कि ओपन एंडिड औद्योगिक भूखंड योजना के 04 आवेदकों का साक्षात्कार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया। साक्षात्कार में सफल 03 आवेदकों मैसर्स आरूषी इलेक्ट्रॉनिक्स, मैसर्स सनवाइस इलेक्ट्रॉनिक्स, मैसर्स कृष्णा मुरारी ओआरजी प्राइवेट लिमिटेड को सेक्टर-33 में 45 हजार स्क्वायर मीटर भूमि आवंटित की गई। प्राधिकरण द्वारा किये गए इस आवंटन से प्राधिकरण क्षेत्र में लगभग 76.95 करोड़ रूपये का निवेश प्राप्त होगा तथा 1560 लोगों को रोजगार का अवसर प्राप्त होगा।

सीईओ ने बताया कि प्राधिकरण की अपैरल पार्क योजना के अंतर्गत सेक्टर-29 में पांच औद्योगिक इकाइयों मैसर्स साहू एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड, मैसे ओरियंट फैशन एक्सपोर्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स प्रीति वेयर्स, मैसर्स बीके फैशन व मैसर्स महाराणा ऑफ इंडिया को जमीन आवंटित की गई। सीईओ ने बताया कि अपैरल पार्क योजना के अंतर्गत 5 औद्योगिक इकाइयों को 43,000 वर्गमीटर भूमि आवंटित की गई। इससे क्षेत्र में 191.81 करोड़ रूपये का निवेश प्राप्त होगा,तथा 19853 लोगों को रोजगार मिलेगा। सीईओ ने बताया कि प्राधिकरण क्षेत्र में 8 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से कुल 286.76 करोड़ रूपये का निवेश प्राप्त होगा तथा 21413 लोगों को रोजगार का अवसर प्राप्त होगा।

उल्लेखनीय है कि प्राधिकरण के सेक्टर-29 में जारी की गई Apparel Park, MSME Park and Handicrafts ODOP park की योजना वर्तमान में चल रही है। तथा उक्त योजनाओं के भूखंडों के इच्छुक आवेदकों द्वारा 30 जून 2020 तक ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

उत्तराखंड में फिर कोरोना का कहर, दोपहर तक मिल चुके हैं 77 नए मामले, 1488 पहुंचा कुल आंकड़ा

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देहरादून : उत्तराखंड में कोरोना वायरस संक्रमण का मामला तेजी से बढ़ता जा रहा है। हर रोज नए संक्रमित मरीज मिलने से प्रदेश की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं। सोमवार को जहाँ राज्य में कोरोना संक्रमण के 56 नए मामले सामने आए थे, वहीँ मंगलवार दोपहर तक कोरोना के 77 नए मामले आये हैं। जिनमे से अकेले 43 मामले टिहरी जिले से हैं। जिससके बाद राज्य में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़कर 1488 हो गई है। हालांकि अब तक विभिन्न अस्पतालों से कुल 749 लोग स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं। वहीँ राज्य में अब तक कोरोना संक्रमित 13 मरीजों की मौत भी हो चुकी है। अन्य राज्यों को भी सात मरीज चले गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार आज दोपहर को लैब से जिन 1074 सैंपल की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है उनमें 77 मामलों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। जिसमे टिहरी जिले में सर्वाधिक 43  संक्रमित मरीज मिले हैं। इसके अलावा देहरादून और पिथोरागढ़ जिलों में 7-7 मरीज जबकि पौड़ी, रुद्रप्रयाग, नैनीताल तथा हरिद्वार जिलों में 4-4 कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। इसके अलावा बागेश्वर में 03, तथा अल्मोड़ा में 01 कोरोना संक्रमित मरीज की पुष्टि हुई है। आज टिहरी जनपद में मिले 43 कोरोना संक्रमितों में से 40 लोग मुंबई, महाराष्ट्र से यहाँ लौटे हैं। प्रदेश में कुल कोरोना संक्रमित मरीजों में से 50% से अधिक मरीज ठीक हो चुके हैं।

उत्तराखंड में अब तक कोरोना covid-19 के जिलेवार मामले

जनपद कोरोना के मरीज
देहरादून382
नैनीताल328
टिहरी192
उधमसिंह नगर91
हरिद्वार148
पौड़ी51
अल्मोड़ा74
पिथौरागढ़51
चमोली34
उत्तरकाशी23
बागेश्वर38
चंपावत48
रुद्रप्रयाग28
कुल1488

 

अब दिल्ली, मुंबई सहित केवल इन 31 शहरों से उत्तराखंड जाने वालों को रहना होना 21 दिन क्वारंटाइन, देखें सूची

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देहरादून : कोरोना वायरस (कोविड-19) से सर्वाधिक प्रभावित देश के 31 शहरों से सड़क, रेल या हवाई मार्ग से उत्तराखण्ड आने वाले व्यक्तियों को 7 दिन इंस्टीट्यूशनल तथा 14 दिन होम क्वारंटाइन में रहना होगा। जबकि अन्य शहरों से उत्तराखण्ड आने वालों को केवल 14 दिन होम क्वारंटाइन में रहना होगा। प्रदेश सरकार ने सोमवार को कोविड-19 हाई लोड 31 शहरों को चिह्नित कर सूची जारी कर दी है। इससे पूर्व सरकार ने ऐसे 75 शहरों को चिह्नित किया था और इन शहरों से आने वाले लोगों के लिए 7 दिन का संस्थागत क्वारंटीन अनिवार्य किया गया था। बाहरी राज्यों से उत्तराखंड आने वाले किसी भी व्यक्ति को उत्तराखंड सरकार के ऑनलाइन वेब पोर्टल (https://dsclservices.in/uttarakhand-migrant-registration.php) पर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है।

ये हैं वे कोरोना वायरस (कोविड-19) से सर्वाधिक प्रभावित देश के 31 शहर

मुंबई (सभी जिले), दिल्ली (सभी जिले), चेन्नई, अहमदाबाद, थाणे, पुणे, इंदौर, कोलकाता, जयपुर, हैदराबाद, सूरत, औरंगाबाद, जोधपुर, भोपाल, चेंगलपट्टू (तमिलनाडु), गुरुग्राम, नासिक, रायगढ़, पालघर, हावड़ा, आगरा, गौतमबुद्ध नगर, मेरठ, कानपुर नगर, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली व पीलीभीत।

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