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उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए फिर बदली व्यवस्था, देखें नई गाइड लाइन्स में किसे मिली राहत

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देहरादून : उत्तराखंड में कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण को रोकने के लिए एक बार फिर से नई गाइडलाइन जारी कर दी है। नई व्यवस्था के तहत शाम 7 से सुबह 7 बजे तक के लिए नए प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की ओर से सोमवार शाम एसओपी जारी कर दी गई है। नई एसओपी में कोविड-19 लोड वाले शहरों से आने वालों के लिए सख्ती की गई। वहीँ वीवीआईपी को रियायत दी गई है। तथा सेना को अपनी व्यवस्था करने को कहा गया है। इसके अलावा बाहर से आने वालों को सिर्फ वेब पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने को कहा गया है। नई SOP (Standard operating procedure) के अनुसार निम्न बिन्दुओं में बदलाव किया गया है।

कनटेनमेंट और बफर जोन की व्यवस्था

  1. कोविड -19 संक्रमण के आधार पर सम्बंधित जिलाधिकारी कंटेनमेंट जोन तय करेंगे। इन जोन के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के पूर्व के आदेश का पालन किया जाएगा और जिलाधिकारी चाहेंगे तो नए प्रतिबंध भी लगा सकेंगे। इसी के साथ रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन की व्यवस्था समाप्त कर दी गई।
  2. सम्बंधित जिलाधिकारी के द्वारा यथाआवश्यकता बफर जोन भी तय किया जायेगा।

राज्य के बाहर और राज्य के अंदर लोगों का आवागमन

  1. प्रदेश के बाहर से किसी भी तरह से आवागमन करने वाले लोगों को वेब पोर्टल (https://dsclservices.in/uttarakhand-migrant-registration.php) पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
  2. प्रदेश के बाहर से किसी भी तरह से आवागमन करने वाले लोगों को आरोग्य एप डाउनलोड करना होगा।
  3. हाई लोड Covid-19 शहरों से आने वाले लोगों को 7 दिन संस्थागत क्वारंटीन और 14 दिन होम क्वारंटीन होना होगा। लोग चाहें तो सरकारी क्वांरटीन निशुल्क व्यवस्था या भुगतान कर क्वारंटीन सेंटर में रह सकते हैं। अन्य शहरों से आने वालों को 14 दिन के लिए होम क्वांरटीन होना होगा।
  4. राज्य के अंदर मूवमेंट के लिए किसी परमिट और पास की जरूरत नहीं होगी लेकिन उन्हें रजिस्ट्रेशन करना होगा वैबसाइट पर। किसी को क्वारंटीन नहीं होना होगा।

इन्हें मिलेगी रियायत

गर्भवती महिलाएं, गंभीर रोगी, 65 वर्ष से अधिक के वरिष्ठ नागरिक, दस साल से कम उम्र के बच्चों के साथ यात्रा करने वाले माता-पिता। इन्हें 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन होना होगा। राज्य और जिला नोडल अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग से परामर्श कर बिना लक्षण वाले लोगों को 14 दिन के होम क्वारंटीन की अनुमति दे सकेंगे।

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दुखद खबर: गढ़वाल राइफल का जवान आशीष नेगी आतंकी मुठभेड़ में शहीद

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Ashish Negi of Garhwal Rifle martyred in terrorist encounter

उत्तराखंड के लिए बेहद दुखद खबर है। जम्मू-कश्मीर सीमा पर आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ के दौरान भारतीय सेना का जवान शहीद हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आतंकी मुठभेड़ में शहीद आशीष नेगी 8th गढ़वाल राइफल के जवान थे। शहीद आशीष नेगी मूलरूप से रुद्रप्रयाग जिले की केदारनाथ विधानसभा के मक्कू गाँव के ग्वाड़-ज्यूलना रहने वाला था। आशीष के शहीद होने की खबर सुनते ही पूरे गाँव में कोहराम मचा गया है। यह सूचना खुद केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने दी है। उन्होंने अपने फेसबुक वाल पे पोस्ट शेयर की है। देवभूमि संवाद की ओर से शहीद आशीष को विनम्र श्रधांजलि।

दुखद खबर
रुद्रप्रयाग जिले की केदारनाथ विधानसभा के मक्कू गाँव के ग्वाड़-ज्यूलना के आशीष सिंह नेगी सुपुत्र श्री विक्रम सिंह जम्मू में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए।
आशीष 8th गढ़वाल राइफल्स के जवान थे, उन्होंने उत्तराखंड की उच्च सैन्य परंपरा का निर्वहन किया। सारा देश उनके अदम्य साहस और बलिदान को सलाम करता है।
भगवान तुंगनाथ जी उनके परिवार को इस असीम दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कृपा करेंगे।
मनोज रावत,
विधायक, केदारनाथ।

जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में सोमवार सुबह शुरू हुए एक और एनकाउंटर में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षाबलों ने चार और आतंकवादियों को मार गिराया है। इस तरह पिछले 24 घंटे में शोपियां जिले में ही कुल 9 आतंकियों को ढेर किया गया है।

बिजनी गांव में रखी गई स्वदेशी कंपनी “बेड़ू” की नींव, सेनिटाइजर हुआ लांच, स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार

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यमकेश्वर : यमकेश्वर में पहाड़ी क्षेत्र में लघु उद्योग स्थापित करने के मध्यनजर यमकेश्वर के वासियों और प्रवासियों के समूह से बना बेडू (Bright Era Of Developing Uttarakhand) की महत्वाकांक्षी योजना की पहली कड़ी में आज एनिमल फार्मिंग का शुभारंभ यमकेश्वर के बिजनी गांव में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भूमि पूजन कर डेयरी फार्म का कार्य का श्री गणेश कर दिया है।

बेडू कम्पनी के प्रबंध संचालक हरि कपरवाण ने बताया कि उत्तराखंड की अपनी अलग पहचान के साथ सब का साथ सब का विकास एवं क्षेत्र को आत्म निर्भरता की ओर शसक्त करने, क्षेत्र के बेरोजगार एवं अनुभवी युवाओं को अपने साथ में लेकर अपने काम को अंजाम दे रही है बेडू कम्पनी। 81 सदस्यों का यह विशाल समूह बनकर हर क्षेत्र में काम कर रहा है।

उन्होंने बताया कि अभी बहुत जल्दी बेडू कम्पनी अपने विभिन्न उत्पाद मार्किट में लाने जा रही है। जिनमें नेचुरल मिनरल वाटर और FMCG के तहत 15 कॉस्मेटिक्स व सेनिटाइजर के साथ बाजार में आ रहे हैं, यह सभी उत्पाद उत्तराखंड में अपनी अलग पहचान कायम करेगे। खासतौर पर युवा वर्ग का कम्पनी के प्रति उत्साह है। कम्पनी अपने उत्पादों को देश भर में लाने के लिये प्रतिबद्ध है।

कम्पनी के प्रबंध संचालक हरि कपरवाण ने कहा कि मैं अपने सभी शेयर होल्डरों का दिल से आभारी हूँ, जो पूरे जोश और उत्शाह के साथ में धीमी गति से मगर मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। हमारी इस टीम में ऊर्जावान युवाओ के साथ-साथ बुजर्गो का अनुभव भी शामिल है।

उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि हमारी 81 लोगो की टीम पूरी तरह से अलग-अलग हुनर एवं अनुभवों से परिपूर्णता लिए हुये है, जिसमे IT सेक्टर से लेकर, मोटिवेशनल इवेंट, बिज़नेस डेवलपमेंट स्किल, सेल्स एंड मार्केटिंग, एनिमल फार्मिंग के साथ साथ एग्रो फार्मिंग के एक्सपर्ट भी है।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि BEDU अभी अपनी शुरूवाती दौर में है और अपने FMCG प्रोडक्ट जल्दी ही मार्किट में उतारने वाली है। BEDU के सारे प्रोडक्ट हर्बल प्रोडक्ट हैं और लोगो के स्वास्थ्य और पर्यावरण को कोई साइड इफ़ेक्ट ना हो इस पर विशेष ध्यान देकर बनाया गया है। BEDU से जुड़े सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी लोगो का हम एक बार फिर दिल से आभार व्यक्त करते हैं।

उत्तराखंड में आज फिर मिले कोरोना के 56 नए मामले, 28 अकेले टिहरी से, 1411 पहुंचा कुल आंकड़ा

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coronavirus covid-19

देहरादून : उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण का मामला बेकाबू होता जा रहा है। हर रोज नए संक्रमित मरीज मिलने से प्रदेश की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं। सोमवार को भी राज्य में कोरोना संक्रमण के 56 नए मामले सामने आए हैं। जिनमे से आधे यानी 28 मामले अकेले टिहरी जिले से हैं। इसके बाद राज्य में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़कर 1411 हो गई है। हालांकि अब तक विभिन्न अस्पतालों से कुल 714 लोग स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं। वहीँ राज्य में अब तक कोरोना संक्रमित 13 मरीजों की मौत भी हो चुकी है। अन्य राज्यों को भी सात मरीज चले गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार आज लैब से जिन 697 सैंपल की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है उनमें 56 मामलों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। टिहरी में सर्वाधिक 28  संक्रमित मरीज मिले हैं। इसके अलावा हरिद्वार में 08, देहरादून में 06 और पौड़ी में 04 नए मामले सामने आए हैं। बागेश्वर, चंपावत व रुद्रप्रयाग से दो-दो तथा चमोली व उधमसिंहनगर में एक-एक नया संक्रमित संक्रमित मरीज मिला है। इधर गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के अलग-अलग अस्पतालों से आज 186 मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज हुए हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग में कुछ राहत की सांस ली है। क्योंकि प्रदेश में कुल कोरोना संक्रमित मरीजों में से 50% से अधिक मरीज ठीक हो चुके हैं।

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उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के डबलिंग और रिकवरी रेट में लगातार सुधार: मुख्य सचिव

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1 lakh 81 thousand migrants have reached Uttarakhand

देहरादून : उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के डबलिंग और रिकवरी रेट में लगातार सुधार हो रहा है. जानकारी राज्य के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने सोमवार को मीडिया सेंटर, सचिवालय में आयेाजित प्रेस वार्ता के दौरान दी। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा है कि आज सोमवार को दोपहर तक 25 पाॅजिटिव केस आए हैं जबकि 135 कोरोना संक्रमित ठीक हुए हैं। कुल 1380 पाॅजिटिव केस में से 697 एक्टीव केस हैं। राज्य में डबलिंग रेट में निरंतर सुधार हो रहा है। अब यह 16 दिन से अधिक हो गई है। हमारा रिकवरी प्रतिशत, राष्ट्रीय औसत के बराबर लगभग 48 प्रतिशत हो गया है। सेम्पलों के पाॅजिटिव होने की दर उत्तराखण्ड में 4.31 प्रतिशत है जबकि देश का औसत 5.37 प्रतिशत है। प्रति मिलियन सेम्पल लेने की दर 3169 है। कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की मृत्यु दर देश में 2.78 प्रतिशत है जबकि राज्य में यह दर लगभग 1 प्रतिशत है।

कोरोना मरीजों के लिए बेड की संख्या 20 हजार, आईसीयू बेड 243 और वेंटिलेटर 126

मुख्य सचिव ने कहा कि पिछले दिनों में कोरोना के मामलों में वृद्धि देखने को मिली है, परंतु इसमें डरने की आवश्यकता नहीं है। हमने अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं में काफी इजाफा किया है। कोरोना मरीजों के लिए बेड की संख्या 20 हजार हो गई है। आईसीयू बेड 243 और वेंटिलेटर 126 उपलब्ध हैं।

कान्टेक्ट ट्रेसिंग पर विशेष ध्यान

मुख्य सचिव ने कहा कि कान्टेक्ट ट्रेसिंग पर विशेष ध्यान दिया गया है। 1380 कोरोना पाॅजिटिव के 6294 कान्टेक्ट ट्रेस किए गए हैं। इन कान्टेक्ट के स्वास्थ्य की निगरानी की जाती है। और उनके रिस्क प्रोफाईल का निर्धारण कर आवश्यक कार्यवाही की जाती है। वर्तमान में करीब 1 लाख 30 हजार लोग क्वारेंटाईन में हैं। इनमें से अधिकांश होम क्वारेंटाईन में हैं। राज्य में 55 कंटेनमेंट जोन स्थापित हैं जहां पूरी सख्ती बरती जा रही है।

पहले की तुलना में विभिन्न सूचकों में सुधार

मुख्य सचिव ने दो सप्ताहों के तुलनात्मक आंकड़े देते हुए बताया कि दिनांक 25 मई से 31 मई के दौरान डबलिंग रेट 4.58 दिन, सेम्पल पाॅजिटिव रेट 8.83 प्रतिशत थी। जबकि 1 जून से 7 जून के दौरान डबलिंग रेट 13 दिन और सेम्पल पाॅजिटिव रेट 6.16 प्रतिशत थी। इसी प्रकार 25 मई से 31 मई के दौरान 970 सेम्पल टेस्ट किए गए और बेड की संख्या 8375 थी। जबकि 1 जून से 7 जून के दौरान 1053 सेम्पल टेस्ट किए गए और बेड की संख्या बढ़कर 18234 हो गई।

नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई

मुख्य सचिव ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। अभी तक लगभग 29737 लोग गिरफ्तार किए गए, 7977 वाहन सीज किए गए और 3 करोड़ 35 लाख रूपए का जुर्माना वसूला गया है। होटल, शोपिंग माॅल, धार्मिक स्थलों के लिए गाईडलाईन जारी की गई है। इन स्थानों पर फिजीकल डिस्टेंसिंग, सफाई, सेनेटाईजेशन, मास्क का अनिवर्यता से पालन किया जाना है। मुख्य सचिव ने कहा कि अगर अनुशासन का परिचय देते हुए आवश्यक नियमों का पालन किया जाता है तो आगे सुविधाओं में बढ़़ोतरी की जा सकती है।

मनरेगा से 3 लाख से अधिक श्रमिकों को मिल रहा काम

मनरेगा के काम में निरंतर वृद्धि हो रही है। प्रदेश में मनरेगा में 2,1816 काम चल रहे है। जिनमें 3,07,451 श्रमिक लगे हैं। 15 हजार नए जोब कार्ड बनाए गए हैं, इनमें से 11 हजार को काम भी उपलब्ध करवाया गया है।

पुरानी पेंशन बहाली को लेकर प्राथमिक शिक्षक संगठन (खिर्सू) के शिक्षकों ने दीप जलाकर किया संघर्ष का ऐलान

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Primary teachers organization

पौड़ी गढ़वाल : पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर सोमवार को उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संगठन विकासखंड खिर्सू, पौड़ी गढ़वाल के शिक्षकों द्वारा दीप जलाकर संघर्ष को तेज किया गया. शिक्षक संगठन (खिर्सू) के संरक्षक धीरेंद्र घिल्डियाल द्वारा सीधे-सीधे केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों को आग्रह किया गया कि यदि शीघ्र ही नई पेंशन योजना समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना लागू नहीं की जाती है तो इसके लिए एक कुर्बानी नहीं बल्कि हजारों कुर्बानी दी जाएंगी.  वहीँ संगठन की अध्यक्षा श्रीमती रेखा नेगी, संयुक्त मंत्री संजय कठैत एवं कोषाध्यक्ष आनंद पंवार ने संयुक्त रूप से कहा कि शिक्षकों के हितों की अनदेखी करना सरकारों के लिए नुकसानदायक होगा, क्योंकि जब 2005 के बाद के सभी शिक्षक देशभर में सेवानिवृत्त होंगे तो उनकी पेंशन इतनी कम होगी कि वे निराश ही होंगे. उन्होंने सरकारों को चेतवानी देते हुए कहा कि देश के कर्मचारी व शिक्षक किसी भी सरकार को उठा सकते हैं और अपने कर्तव्यों का हनन होने पर शीघ्र ही धराशाई भी कर सकते हैं. इसलिए सरकारों में बैठे लोगों को यह अवश्य सोचना पड़ेगा कि सरकारें आती-जाती हैं लेकिन अगर कर्मचारियों का हनन इसी प्रकार होता रहेगा तो सरकारों को राज्य ही नहीं अपितु देश की स्थिति संभालना भी मुश्किल हो जाएगा. संगठन के संरक्षक धीरेंद्र घिल्डियाल ने कड़े शब्दों मैं अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि कई उदाहरण हैं जो एनपीएस पेंशन योजना के तहत सेवानिवृत्त हुए हैं उन लोगों की पेंशन मात्र 2 हजार रुपये बनी है. उन्होंने पूरे संगठन को विश्वास में लेकर सरकार से मांग की है कि सरकारी व्यवस्था के सभी कार्य शिक्षक एवं कर्मचारी करते आए हैं. यदि उन्हीं लोगों के साथ ऐसी अपमानित नीति जारी रही तो शीघ्र ही समूचे देश में आंदोलन की राह तैयार होने लगेगी. इसलिए अतिशीघ्र सरकार को पुरानी पेंशन योजना लागू करनी चाहिए. जिससे एक कर्मचारी सेवानिवृत्त के बाद अपने व अपने परिवार का जीवन यापन सम्मानजनक स्थिति में कर सके.

पौड़ी जिले में आज मिले 4 कोरोना पॉजिटिव, 47 पहुंचा कुल मरीज आंकड़ा

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corona virus

पौड़ी गढ़वाल : पौड़ी जिले में सोमवार को 04 नए कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। जिसके बाद अब तक जिले में कुल 47 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। जिनमे से 28 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। आज मिले 4 कोरोना संक्रमितों में से 02 लोग गाजियाबाद से तथा 02 लोग मुम्बई से यहाँ लौटे थे। जानकारी के मुताबिक पोखड़ा ब्लॉक में बीते 01 जून को 02 लोग (पति-पत्नी) गाजियाबाद से लौटे थे। जिन्हें जिला चिकित्सालय पौड़ी में आईसोलेट किया गया था। आज उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जबकि दो अन्य मरीजों में से पाबौ ब्लॉक का एक युवक बीते 30 मई को मुंबई से लौटा था। युवक को रेड जोन से आने के चलते उसे जिला चिकित्सालय में आईसोलेट किया गया। युवक का भी कोरोना सैंपल पॉजिटिव आया है। इसके अलावा चौथा कोरोना संक्रमित युवक सतपुली क्षेत्र का है वह भी बीते 01 जून को मुंबई से लौटा था। उसे हरिद्वार चीला में संस्थागत क्वारंटीन किया गया था। आज उसकी कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। युवक को परमार्थ निकेतन कोविड केयर सेंटर ऋषिकेश में भर्ती किया गया है। जिले में कोरोना के अब कुल 18 एक्टिव केस हैं।

कृषि एवं उद्यान विभाग द्वारा संचालित विभन्न योजनाओं को लेकर किनगोड़ी गाँव में संयुक्त संगोष्ठी का किया आयोजन

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कल्जीखाल : कल्जीखाल विकासखण्ड के खुगशा ग्राम पंचायत के अंतर्गत ग्राम किनगोड़ी में सोमवार को कोरोना संकट के बीच सोशल डिस्कटेंसिंग का पालन करते हुए कृषि एवं उधान विभाग की एक संयुक्त संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सगोष्ठी में जिला कृषि अधिकारी राणा जी एवं जिला उद्यान अधिकारी श्रीमान नरेंद्र कुमार के द्वारा सरकार के माध्यम से कृषि एवं उद्यान विभाग में संचालित (सामुहिक खेती, मौन पालन, मशरूम उत्पादन, वर्षाजल संग्रहण पौली हाऊस, कुकुट पालन आदि) योजनाओं एवं उसका लाभ कैसे ग्रामीण तक पहुंचे इस पर विस्तृत जानकारी दी गई। इसी क्रम में इच्छुक ग्रामीणों से पॉली हाउस और कृषि यंत्रों हेतु आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए। बैठक में युवा जिला पंचायत सदस्य गौरव रावत एवं वरिष्ठ पत्रकार गणेश खुगशाल गणी, क्षेत्र के उभरते कृषक विकास भट्ट, जिला ग्राम्य विकास प्रमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पौड़ी के दिनेश खरक्वाल आदि बड़ी संख्या में उपस्थित ग्रामीणों ने भाग लिया।

गैरसैंण बनी उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी : आदेश जारी

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देहरादून : गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बना दिया गया है। राज्यपाल ने भराड़ीसैंण (गैरसैंण) जिला-चमोली को उत्तराखंड राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया गया है।

भराड़ीसैण (गैरसैण) को प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किए जाने की अधिसूचना जारी कर दी गई है। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भराड़ीसैण को आदर्श पर्वतीय राजधानी का रूप दिया जाएगा। आने वाले समय में भराड़ीसैण सबसे सुन्दर राजधानी के रूप में अपनी पहचान बनाएगी। भराड़ीसैण (गैरसैण) को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने के लिए 4 मार्च 2020 को की गई घोषणा सवा करोड़ उत्तराखंडवासियों की भावनाओं का सम्मान है। अब अधिसूचना लागू करने से भराड़ीसैण, गैरसैण आधिकारिक रूप से ग्रीष्मकालीन राजधानी हो गई है।
म्ुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के विजन डाक्यूमेंट में गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की बात कही गई थी। क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसमें प्लानर और विशेषज्ञों की राय भी ली जा रही है। भराड़ीसैण (गैरसैण) में राजधानी के अनुरूप वहां आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जा रहा है। बड़े स्तर पर फाइलें न ले जानी पड़ी, इसके लिए ई-विधानसभा पर कार्य किया जा रहा है। इससे पेपरलैस कार्यसंस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। पेयजल की सुचारू आपूर्ति के लिए रामगंगा पर चैरड़ा झील का निर्माण किया जा रहा है। इसके बनने के बाद भराड़ीसैण, गैरसैण और आसपास के क्षेत्र में ग्रेविटी पर जल उपलब्ध हो सकेगा।
गैरसैण की कनेक्टीवीटी पर भी काम किया जा रहा है। भराड़ीसैण, गैरसैण को जोड़ने वाली सड़कों को आवश्यकतानुसार चैड़ा किया जाएगा। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। इसके पूरा होने पर रेल गैरसैण के काफी निकट तक पहुंच जाएगी।

कोरोना संकट काल में उचित आवास और भोजन के बिना श्रमिकों को गांव जाने के लिए होना पड़ा मजबूर : अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार में विशेषज्ञों ने रखे अपने विचार

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ग्रेटर नोएडा : कोरोना महामारी के चलते पैदा हुए वर्तमान हालात ने प्रकृति संतुलन, निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों का ध्यान सहित कई अहम मुद्दों पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। प्रकृति अपना संतुलन किस तरह बनाए रख सकती है। इन मुद्दों पर परिचर्चा करने और भविष्य की रणनीति बनाने के लिए गौतमबुद्ध विविद्यालय द्वारा वास्तुविद एवं नगर नियोजकों का एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। ऑनलाइन माध्यम से हुए सम्मेलन में देश विदेश के जाने माने वास्तुविद, प्राध्यापक और नीति संयोजक शामिल हुए। जीबीयू के कुलपति प्रो. भगवती प्रसाद शर्मा ने उपभोग के साधन और उन पर निर्भरता को सीमित करने का आह्वान किया, जिससे प्रकृति अपना परिस्थितिक संतुलन बनाए रख सके। प्रो. शर्मा के अनुसार मानव उपभोग को कम से कम करना पृथ्वी ग्रह पर मानव अस्तित्व के लिए एक मात्र तरीका है। वहीं चंडीगढ़ वस्तुविद् सुरिंदर बहुगा ने श्रमिकों के पलायन की समस्या का कारण आंकड़ों की जानकारी का अभाव बताया, जिससे समस्या की गंभीरता का अनुमान नहीं था। उन्होंने आगामी दिनों में वास्तुकला और निर्माण उद्योग के लिए चुनौतियों और उनके समाधान पर प्रकाश डाला। चंडीगढ़ जैसे शहर नियोजन उदाहरणों से पता चलता है कि कैसे शहर के योजनाकारों और नीति निर्माताओं ने निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले गरीब श्रमिकों को आवास देने के बारे में सोचा नहीं था। कोविड-19 महामारी में उचित आवास और भोजन के बिना श्रमिकों को अपने गांवों में जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने इस तथ्य पर भी प्रकाश डाला कि वर्तमान हाउसिंग टाइपोलॉजी में घर से काम करने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। लंदन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर इलान केल्मन ने डिजास्टर के सभी खतरों को मानव निर्मित बताया। उनका कहना है कि हम जितने कमजोर हैं, उसका एक समुदाय पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। एक भूकंपीय क्षेत्र में भवन निर्माण के संदर्भ में आर्किटेक्ट और विशेषज्ञों को अपनी आवाज उठानी चाहिए, ताकि दिशा निर्देशों को जमीन पर लागू किया जा सके। वहीं सीपीडब्ल्यूडी के पूर्व एडीजी वास्तुविद् प्रभाकर के. वर्मा ने मानव बस्तियों के साथ जल निकायों के संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भूजल और वृहद जलवायु पर तालाबों का प्रभाव और इसका प्रभाव शहरों के साथ ग्रामीण बस्तियों के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। एक बेहतर टिकाऊ भविष्य के लिए प्राकृतिक पारिस्थितिक विशेषता को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है और वास्तुकारों, योजनाकारों और नीति निर्माताओं की इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका है। दुबई के वास्तुविद् और शहरी डिजाइनर बिनॉय पैनिकर ने ‘बैक टू एनवायरमेंटल प्लॉनिंग’ के विषय में बात की। अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में अभिषेक सिंह, अनंत कुमार, माधुरी अग्रवाल आदि शामिल हुए।

सीएल मौर्य की रिपोर्ट