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पहाड़ी फ्रेश सहित कई पहाड़ी उद्योगों पर पड़ी लॉकडाउन की मार, स्टाल व कार्यक्रमों के द्वारा बेचते थे समान, सरकार व समाज से लगाई मद्दत की गुहार

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दिल्ली : कोरोना महामारी ने चलते देशभर में किये गए लॉकडाउन की सबसे ज्यादा मार गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ी है। बीते 70 दिन से ज्यादा समय से चल रहे लॉक डाउन के चलते लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं, तथा कई लोगों के काम धन्धे चौपट हो गए हैं। ज्यादातर मजदूरों व प्रवासी लोगों का दिल्ली/एनसीआर से पलायन हो चुका है क्योंकि बिना कामकाज के यहाँ परिवार चलाना उनके लिए संभव नहीं था। लेकिन जिनके उधोग धंधे यहीं पर है और उनका कारोबार दिल्ली/एनसीआर में ही फैला हुआ है, उनके लिए यह समय बेहद संकट भरा है। वे लोग अपने बिज़नस को बंद कर गाँव भी नहीं जा सकते हैं। इन्हीं में से कुछ पहाड़ी उत्पादों का स्टाल लगाकर बेचने वाले उत्तराखंड मूल के प्रवासी हैं जो यहाँ होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों, आयोजनों व मेलों में पर निर्भर रहते थे। यहीं से उनका गुजरा चलता था। परन्तु कोरोना का जो संकट इस समय देश में फैला हुआ है उसे देखकर लगता नहीं है कि अगले 6 महीनों में भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों, मेलों का आयोजन संभव हो पायेगा।

हालाँकि अभी सोशलडिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कुछ हद तक ऑफिस/बाजारों को खोला जा रहा है। परन्तु अभी भी लोग डरे सहमे हुए हैं और कम ही लोग बाहर निकल रहे। कोरोना वायरस की दहशत इस कदर लोगों के दिमाग में घर कर गई है कि अगले 6 महीने बाद भी बाजारों में पहले जैसी रौनक नहीं होगी।

सुनिए अपनी पीड़ा को किस तरह से रखा है पहाड़ी फ्रेश संस्थान के एम एस रावत ने

पिछले 10 वर्षों से दिल्ली/एनसीआर में उत्तराखंड के उत्पादों के लिए मशहूर पहाड़ी फ्रेश संस्थान के मनवर सिंह रावत ने हमे अपनी पीड़ा बताई कि कैसे उनका पहाड़ से इकठ्ठा कर लाया हुआ लाखों का माल गोदामों में पड़ा हुआ है, और बिक्री न होने के कारण सड़ कर बर्बाद हो रहा है। उनका कहना है कि हमारी कहीं कोई सुनवाई नही हो रही। उनके साथ जुड़े दर्जनों कर्मचारी भी सड़क पर आ गए हैं। हम लोग कर्मचारियों को सैलरी भी नही दे पा रहे हैं। ज्यादातर लोग गांव चले गए लेकिन हम लोग कैसे लाखों का समान सड़ने के लिए छोड़कर कैसे गाँव चले जाएँ। इस लॉकडाउन में हमारी कमाई का कोई और साधन नही है, परिवार का पालन पोषण करना बड़ा मुश्किल हो रहा है। हम लोग पहाड़ों से उत्पाद एकत्रित कर यहाँ लाते थे और यहाँ रह रहे प्रवासियों को अपने उत्तराखण्ड के स्वाद से रूबरू कराते थे। लेकिन लॉकडाउन में सरकारों की ओर से हम लोगों के बारे में नही सोचा गया। जो बड़े दुर्भाग्य की बात है। आखिर हम भी उत्तराखण्ड की संस्कृति, परम्पराओं को बचाने में अपनी भागीदारियों को बखूबी निभाते हैं।

एमएस रावत ने आगे कहा कि जिस प्रकार ठेली वाले, पटरी वाले, खोमचे वाले,  सरकार की लिस्ट मे आते हैं, और सरकार उनके बारे में सोचती है। सरकार ने 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी। मै आपके माध्यम से सरकार से दर्ख्वास्त  करता हूँ कि हमारी पहाड़ों की स्पेशियलिटी समान की दुकानें जो कि पिछले 22 मार्च से बंद हैं, उनकी ओर भी ध्यान दिया जाये।

हम पहाड़ों के ऑर्गेनिक उत्पादों (खाद्य पदार्थ) को पहाड़ के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर छोटे-छोटे किसानो से एकत्रित कर यहाँ रह रहे लोगों तक पहुचाते थे। इस लम्बी चेन में लोगों को रोजगार मिले के साथ-साथ स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिल रहा था। परन्तु फिल्हाल तो सब चौपट होता दिखाई दे रहा है। हमने किराये पर गोदाम लेकर उसमे पहाड़ों से एकत्रित किया हुआ 3 महीने का समान रखा है। जो अब सड़ने लगा है। जिन समूहों से समान आया था, उनकी देनदारी बाकी है, ऊपर से गोदाम का किराया भी नहीं दे पा रहे हैं। पहाड़ी फ्रेश ने दर्जनों लोगों की आजीविका को फिर से खड़ा करने के लिए सरकार एवं समाज के लोगों से मदद की गुहार लगाई है।

पुरानी पेंशन बहाली को लेकर फिर से उठने लगी है मांग

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श्रीनगर गढ़वाल : राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा की अपील पर रविवार को शिक्षक कर्मचारियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर केन्द्र सरकार से वर्षों से लम्बित पड़ी पुरानी पेशन की मांग की। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में अक्टूबर 2005 के बाद से नियुक्ति पर लगे कर्मचारी पेंशन से वंचित हैं। जिससे लाखो सरकारी कर्मचारी प्रभावित हो गये हैं। इस विषय पर अपील जारी करते हुए सौरभ नौटियाल, संयुक्त सचिव गढ़वाल मण्डल, पुरानी पेंशन बहाली मंच ने सभी शिक्षक कर्मचारियों से एक जुटतता के साथ लड़ने की बात कही है। उन्होंने कहा कि जहाँ एक ओर विधायक और सांसद आज भी एक बार पद लेते ही पेशन के हकदार बनते हैं वहीं सरकारी सेवा में 35 से 40 साल देने वाले शिक्षक कर्मचारियों को इसका लाभ नही है। इस अवसर पर शिक्षक कर्मचारियों में श्रीकृष्ण उनियाल, श्रीमती पूजा नेगी, महेश गिरि, मनोज भण्डारी, सुदेश जुगराण, नरेन्द्र बिष्ट, भानु प्रताप सिंह कुंवर, जयपाल सिंह गुसाई, सुशील तिवारी, श्रीमती रेखा नेगी, जगपाल सिंह चौहान, शिव प्रसाद नौटियाल, कैलाश पुण्डीर, जय प्रकाश डिमरी, शंकर कैंथुला, मनोज काला आदि मौजूद रहे।

अनलॉक-1: उत्तराखंड में कल से होटल, रेस्टोरेंट, मॉल और धार्मिक स्थल खोलने हेतु नई गाइड लाइन जारी

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देहरादून : उत्तराखंड में कल यानी सोमवार 8 जून से कड़ी शर्तों के साथ होटल, होम स्टे, रेस्टोरेंट, मॉल तथा धार्मिक स्थल खुल सकेंगे। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन जारी के बाद रविवार को प्रदेश में अनलॉक-1 के तहत होटल, हॉस्पिटैलिटी सर्विसेज, रेस्टोरेंट, शौपिंग मॉल तथा धार्मिक स्थलों को खोलने के लिए नए दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।

नए दिशा निर्देश में प्रदेश में सभी होटल, होम स्टे, रेस्टोरेंट, मॉल तथा धार्मिक स्थलों को खोलने का जिक्र किया गया है। हालाँकि देहरादून नगर निगम क्षेत्र और राज्य के अन्य कंटेनमेंट जोन में अगले आदेशों तक ये खुल नहीं सकेंगे। इसके अलावा विश्व प्रसिद्ध चार धाम यात्रा को लेकर कोई फैसला देवस्थानम बोर्ड से सलाह मशविरे के बाद ही होगा। रविवार को इस बाबत विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है।

  1. उड़ान योजना के तहत हेलीकॉप्टर व अन्य वायु यानों से यात्रा की इजाजत रहेगी। उतरने वाले यात्रियों को केंद्र की गाइडलाइनों का सख्ती से पालन करना होगा।
  2. चार धाम यात्रा शुरू करने पर फैसला तीर्थ पुरोहितों व स्थानीय व्यापारियों से राय मशविरे और परिस्थितियों के अनुरूप लिया जाएगा।
  3. वहीं बड़ा फैसला लिया गया है कि उत्तराखंड के बाहरी राज्यों के तीर्थ यात्रियों को अगले आदेश तक दर्शन करने की अनुमति नहीं होगी।
  4. हॉस्पिटेलिटी क्षेत्र के संस्थान देश के अन्य राज्यों के कोविड-19 हाईलोड वाले शहरों से पर्यटकों की बुकिंग नहीं करा सकेंगे। जबकि कम लोड वाले शहरों से केवल 7 दिन के लिए ही बुकिंग करा सकेंगे। निर्देश की अवहेलना पर उनके विरुद्ध आईपीसी या महारारी एक्ट में कार्रवाई होगी।
  5. होटल प्रबंधन को उपभोक्ता से यह लिखित आश्वासन लेना होगा कि वह होटल में रहने के दौरान किसी सार्वजनिक धार्मिक या पर्यटक स्थल में नहीं जाएगा। अगर वह ऐसा करेगा तो उस पर कार्रवाई होगी।
  6. रेस्टोरेंट मालिकों प्रबंधन को अपने सभी उपभोक्ताओं व वेटरों का रिकार्ड दिन व समय समेत रखना होगा।
  7. होटल प्रबंधन को सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजेशन, स्वच्छता आदि को लेकर पर्यटन विभाग द्वारा जारी प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी होगा
  8. देहरादून नगर निगम क्षेत्र व कंटेनमेंट जोन को छोड़कर सभी मॉल व रेस्टोरेंट सुबह 7 से शाम 7 बजे तक खुल सकेंगे।
  9. मॉल्स प्रबंधन को सुनिश्चित करना होगा कि अगले आदेश तक एक दिन में 50% दुकानें ही खुलें। जिला प्रशासन मॉल प्रबंधन से बात कर वहां आने वाले लोगों की अधिकतम संख्या भी तय करेगा।
  10. मॉल्स प्रबंधन को जिला प्रशासन को लिखकर देना होगा कि वे एयर कंडीशनर को लेकर सीपीडब्लूडी की गाइडलाइन, स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन व गृह मंत्रालय की गाइडलाइन का पालन करेंगे।
  11. सभी रेस्टोरेंट सुबह 7 बजे से शाम के 7 बजे तक खुलेंगे।
  12. सभी शॉपिंग मॉल सुबह 7 बजे से शाम के 7 बजे तक खुलेंगे।
  13. मंदिरों के खुलने और बंद होने का समय सुबह 7 बजे से शाम को 7 बजे तक होगा।
  14. अभी दूसरे राज्यों से लोग धार्मिक स्थानों में नहीं आ सकते हैं।

नहीं रहे उत्तराखंड के घुमन्तु पत्रकार दिनेश कंडवाल

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“देहरादून डिस्कवर” मासिक पत्रिका के सम्पादक एवं उत्तराखंड के जानेमाने पत्रकार दिनेश कंडवाल ने आज ओएनजीसी हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली है। दो दिन पहले ही आंतों में इंफेक्शन होने से दो दिन पूर्व ही उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। दिनेश कंडवाल ने अपनी जिंदगी की शुरुआती दौर की पत्रकारिता ऋषिकेश में भैरव दत्त धूलिया के अखबार  “तरुण हिन्द” से बतौर पत्रकार शुरू की। तदोपरान्त उन्होने पार्टनरशिप में एक प्रिटिंग प्रेस भी चलाई व एक अखबार का सम्पादन भी किया। ओएनजीसी में नौकरी लगने के बाद भी उन्होंने अपना लेखन कार्य जारी रखा उन्होंने स्वागत पत्रिका, धर्मयुग, कादम्बनी, हिन्दुस्तान, नवीन पराग, सन्डे मेल सहित दर्जनों पत्र-पत्रिकाओं में उनके लेख छपते रहते थे।

नार्थ ईस्ट में त्रिपुरा सरकार द्वारा उनकी पुस्तक त्रिपुरा की आदिवासी लोककथाएँ प्रकाशित की गयी जो आज भी वहां की स्टाल पर सजी मिलती है। इसके अलावा उन्होंने  ओएनजीसी की त्रिपुरा मैगजीन “त्रिपुरेश्वरी” पत्रिका का बर्षों सम्पादन किया। ट्रेकिंग के शौकीन दिनेश कंडवाल ने नार्थ ईस्ट से लेकर उत्तराखंड के उच्च हिमालय क्षेत्र के विभिन्न स्थलों की यात्राएं शामिल रही,जिन पर उन्होंने बड़े-बड़े लेख भी लिखे । उनकी यात्राओं में 1985 संदक-फ़ो (दार्जलिंग)-संगरीला (12000 फिट सिक्किम), “थोरांग-ला पास”(18500 फिट) दर्रे, डिजोकु-वैली ट्रैक, मेघालय में “लिविंग रूट ब्रिज” ट्रैक गढवाल-कुमाऊं में कई यात्राओं में वैली ऑफ़ फ्लावर, मदमहेश्वर, दूणी-भितरी, मोंडा-बलावट-चाईशिल बेस कैंप, देवजानी-केदारकांठा बेस, तालुका-हर-की-दून बेस इत्यादि दर्जनों यात्राओं के अलावा लद्दाख में अपनी धर्मपत्नी श्रीमती सुलोचना कंडवाल के साथ “सिन्दू-जसकार नदी संगम का चादर ट्रैक” प्रमुख हैं!

2012 में ओएनजीसी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति से पहले ही उन्होंने 2010 में अपनी पत्रकारिता को व्यवसायिकता देते हुए “देहरादून डिस्कवर” नामक पत्रिका का नाम आरएनआई को अप्रूव के लिए भेजा व 10 अक्टूबर 2011 में उनकी मैगजीन का विधिवत प्रकाशन शुरू हुआ। लगभग 66 साल की उम्र में उनकी अंतिम यात्रा “हिमालयन दिग्दर्शन ढाकर शोध यात्रा 2020” शामिल रही जिसमें उन्होंने 4 दिन की इस ऐतिहासिक शोध यात्रा में लगभग 42 किमी. पैदल सहित 174 किमी. की यात्रा की। उनकी मृत्यु पर जिलाधिकारी पौड़ी ने उनकी पौड़ी गढ़वाल की अंतिम यात्रा का स्मरण करते उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पद्मश्री प्रीतम भरतवाण, दूरदर्शन देहरादून के प्रमुख डॉ सुभाष थलेड़ी ने इसे पत्रकारिता जगत के लिए बड़ा आघात बताया। कई पत्रकार संगठनों, उत्तराखंड वेब मीडिया एसोसिएशन के सैकड़ों पत्रकारों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पत्रकार दिनेश कंडवाल के निधन पर शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति व शोक संतप्त परिवार जनों को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

उत्तराखंड मे आज फिर मिले 52 नए कोरोना पॉजिटिव, 1355 पहुंचा संक्रमितों का आंकड़ा

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Coronavirus Update uttarakhand :  उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण का मामला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. प्रदेश में लगातार नए कोरोना के केस सामने आ रहे हैं. आज रविवार को प्रदेश में कोरोना वायरस के कुल 52 नए मामले सामने आये हैं. स्वास्थ्य विभाग द्वारा दोपहर 02 बजे जारी हेल्थ बुलेटिन में 38 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई थी. जबकि अभी रात 8 बजे जारी दूसरी रिपोर्ट में 14 नए लोग कोरोना पॉजिटिव मिले हैं. जिसके बाद अब प्रदेश में कुल कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 1355 पहुँच गई है. आज मिले कुल 52 कोरोना संक्रमितों में से सबसे ज्यादा 27 लोग हरिद्वार जिले से हैं, इसके अलावा 11 देहरादून से, 06 बागेश्वर से 03 टिहरी से, 02 नैनीताल से, 02 उधमसिंह नगर से तथा 01 मरीज चंपावत से हैं.

जिसके बाद अब प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों को आंकड़ा बढ़कर 1355 पहुँच गया है. इसके अलावा 528  लोग ठीक होकर घर भी लौटे हैं. जबकि 13लोगों की मौत हो चुकी है. आज मिले कोरोना संक्रमितों में से ज्यादातर लोग मुम्बई तथा दिल्ली/एनसीआर से यहाँ पहुंचे हैं.

उत्तराखंड में अब तक कोरोना covid-19 के जिलेवार मामले

जनपद कोरोना के मरीज
देहरादून369
नैनीताल323
टिहरी121
उधमसिंह नगर90
हरिद्वार135
पौड़ी43
अल्मोड़ा73
पिथौरागढ़43
चमोली33
उत्तरकाशी23
बागेश्वर33
चंपावत46
रुद्रप्रयाग22
कुल1355

 

 

अनियंत्रित होकर नाले में गिरी तेज रफ्तार कार, चार युवकों की मौत, एक गम्भीर

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ग्रेटर नोएडा : बिसरख कोतवाली क्षेत्र के ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रविवार को एक बड़ा हादसा हुआ। तेज रफ्तार वैगनआर कार अनियंत्रित होकर गहरे नाले में जा गिरी। कार में कुल पांच युवक सवार थे। हादसे में तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई,ज बकि एक ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। अस्पताल में भर्ती पांचवें युवक की हालत भी गंभीर बताई जा रही है। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। मृतकों की पहचान होने पर पुलिस ने उनके परिजनों को सूचना दे दी है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। कार के अंदर से बीयर की कैन व अन्य सामग्री बरामद हुई है। डीसीपी ग्रेटर नोएडा सेंट्रल हरीश चंदर ने बताया कि रविवार अपराह्न करीब पांच बजे एक सफेद रंग की वैगनआर कार डीएल 8सी डब्ल्यू9897 में ग्रेटर नोएडा वेस्ट के पटवारी गांव से टेकजोन-4 गैलेक्सी वेगा सोसायटी की तरफ जा रही थी। इसी दौरान रास्ते में तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क के किनारे स्थित नाले में गिर गई। कार के अनियंत्रित होते समय दो युवक बाहर कूद गए और गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि तेज रफ्तार कार के नाले में गिर जाने से तीन युवकों की मौत हो गई। हादसे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों घायल युवकों को यथार्थ अस्पताल में भर्ती कराया जहां उपचार के दौरान एक युवक की मौत हो गई। कार समेत नाले में गिर जाने से तीन मृतकों की मौत मौके पर ही हो गई थी। काफी प्रयास के बाद शवों को बाहर निकाला गया। मृतकों की पहचान एस बाला कृष्णन पुत्र एसके सुब्रमण्यम निवासी 2 फ्लोर प्लॉट नंबर-02, एमआईजी काम्पलेक्स मयूर विहार दिल्ली, एन. राम सुब्रमण्यम पुत्र एस नटराजन निवासी साकेत ए-3 सिटी केयर अस्पताल दिल्ली हाल पता टी-2/203 निराला स्टेट, जगदीश निवासी इंदिरापुरम गाजियाबाद, रोनाल्ड मीका निवासी टी-2, 1402 निराला स्टेट के रूप में हुई है। वहीं घायल युवक की पहचान वी. हरिहरण पुत्र एसवी वेन हरिहरण निवासी मकान नंबर-154बी ब्लॉक सेक्टर-2 नोएडा के रूप में हुई है। युवक ग्रेटर नोएडा वेस्ट किस काम से आए थे,इस बारे में पता नहीं चल सका है। पुलिस ने चार युवकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

ग्रेटर नोएडा के गामा, डेल्टा सेक्टर सहित नोएडा में आज मिले 41 नए कोरोना पॉजिटिव, 632 पहुंचा जिले में संक्रमितों का आंकड़ा

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ग्रेटर नोएडा : गौतमबुद्ध नगर जिले के नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में आज कोरोना संक्रमण के बड़े मामले सामने आये हैं। रविवार शाम स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान नोएडा, ग्रेटर नोएडा सहित जनपद में कुल 41 नए कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आये हैं। जिसके बाद गौतमबुद्ध नगर जनपद में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़कर 632 पहुंच चुकी है। हालाँकि अब तक 413 लोग इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। जबकि 8 लोगों की मौत हो चुकी है।

डॉ. सुनील दोहरे ने बताया कि नोएडा के सेक्टर-62 में 54 वर्षीय महिला, सेक्टर-31 में 67 वर्षीय बुजुर्ग, सेक्टर-73 में 38 वर्षीय पुरुष, चेरी काउंटी नोएडा में 51 वर्षीय पुरुष, नोएडा सेक्टर-12 में 53 वर्षीय पुरुष, सेक्टर-22 में 31 वर्षीय युवक, 46 वर्षीय महिला, सेक्टर-74 में 56 वर्षीय महिला,  सेक्टर-22 में 71 वर्षीय बुजुर्ग, सेक्टर-11 में 49 वर्षीय पुरुष, सेक्टर-62 में 58 वर्षीय पुरुष, सेक्टर-44 में 32 वर्षीय युवक, सेक्टर-21 में 72 वर्षीय पुरुष व 68 वर्षीय महिला, नोएडा के ममूरा गांव में 55 वर्षीय पुरुष, ग्रेटर नोएडा के बीटा-1 में  34 वर्षीय युवक, सेक्टर-27 नोएडा में 37 वर्षीय महिला, सेक्टर-47 में 57 वर्षीय पुरुष, सेक्टर-110 में 48 वर्षीय पुरुष, सेक्टर-40 में 14 साल का किशोर,12 साल की बच्ची, 20 व 22 साल की दो युवती व 45 वर्षीय पुरुष कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। सर्विलांस अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा सेक्टर-49 में भी 14 वर्षीय किशोर पॉजिटिव मिला है। सेक्टर-49 में 39 वर्षीय महिला, ग्रेटर नोएडा के सेक्टर गामा में 42 वर्षीय पुरुष, न्यू कालोनी लखनावली ग्रेटर नोएडा में 40 वर्षीय पुरुष, सेक्टर-26 नोएडा में 54 वर्षीय पुरुष, 48 वर्षीय महिला, पंचशील ग्रीन सोसायटी ग्रेटर नोएडा में 29 वर्षीय युवक, ग्रेटर नोएडा के घोड़ी बछेड़ा गांव में 45 वर्षीय पुरुष कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। डॉ.सुनील दोहरे ने बताया कि नोएडा सेक्टर-82 में 22 वर्षीय युवक, सेक्टर-63 में 47 वर्षीय महिला, 51 वर्षीय पुरुष, सेक्टर-21 में 28 वर्षीय युवक, सेक्टर-137 में 48 वर्षीय पुरुष, नोएडा के गांव हरौला    सेक्टर-5 में 20 वर्षीय युवक, ग्रेटर नोएडा के डेल्टा-2 में 26 वर्षीय युवक, सेक्टर-39 नोएडा में 47 वर्षीय पुरुष व ग्रेटर नोएडा के कस्बा सूरजपुर में 28 वर्षीय युवक भी  कोरोना के चपेट में आ गए हैं।

469 वर्षों में मेले के दिन पहली बार खाली दिखा खैरालिंग मुंडनेश्वर मेले का थौल, नहीं सजी जलेबी की दुकानें

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कल्जीखाल : पौड़ी गढ़वाल में विकासखंड कल्जीखाल के असवालस्यूं पट्टी के अन्तर्गत मुंडनेश्वर में पिछले 469 वर्षों से लगातार प्रत्येक वर्ष जून माह में लगने वाला दो दिवसीय ऐतिहासिक खैरालिंग (मुंडनेश्वर) मेला इस साल कोरोना महामारी की भेंट चढ़ गया है। जानकारों के अनुसार मुंडनेश्वर महादेव में लगने वाले पौराणिक एवं ऐतिहासिक खैरालिंग मेला की शुरुआत वर्ष 1551 से हुयी थी। तब से प्रतिवर्ष यहाँ दो दिवसीय मेले का आयोजन होता आया है। एक समय खैरालिंग मेला पशुबलि के लिए प्रसिद्ध था परन्तु समय के साथ समाज में भी बदलाव आया और वर्ष 2010 के बाद उत्तराखंड के अन्य मेलों की तरह इस मेले में भी बलि प्रथा बंद कर दी गई। जब तक बलि प्रथा चली तब तक मंदिर के पुजारियों द्वारा जून माह के प्रथम सप्ताह और कभी कभी दूसरे सप्ताह के बीच शुभ लग्न देखकर दो दिवसीय मेले की तिथि निकाली जाती थी। परन्तु पिछले कुछ वर्षो से मेला समिति और मंदिर के पुजारियों की सहमति के बाद इस दो दिवसीय मेले की तिथि हमेशा के लिए 6-7 जून फिक्स कर दी गई। इस वर्ष देशभर में फैली कोरोना महामारी के चलते आयोजन समिति को आज ही के दिन यानी 6-7 जून को होने वाले खैरालिंग मेले को इस बार स्थगित करना पड़ा।

आज मेला स्थल सूना दिखाई दिया जहाँ हजारों की संख्या श्रद्धालु पहुँचते थे और दुकाने सजी होती थी वहाँ आज मन्दिर प्रांगण सूना दिखाई दिया। मन्दिर में आज पुजारी द्वारा विधिवत वार्षिक पूजन किया गया। कतिपय श्रद्धालु मेला स्थल पर पहुँचे लेकिन प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं को मन्दिर के बहार से ही सोशल डिस्टेंस के माध्यम से दर्शन करवाया गया।

जैसा कि मेला नाम का अर्थ ही मिलन होता है। पुराने समय में जब कि मोबाइल फोन, एक दूसरे के यहाँ आने जाने के ज्यादा साधन नहीं हुआ करते थे, तब मेलों का आयोजन इसी उद्देश्य से किया जाता था कि इस बहाने अपने दूर दराज के नाते-रिश्तेदारों में मेल मुलाकात हो सके। खैरालिंग मेले के लिए मूल रूप से तीन पट्टियों (असवालस्यूं, पटवालस्यूं एवं मनियारस्यूं) के लोग चाहे वे देश विदेश में कहीं भी बस गए हों, इस मेले के लिए जरुर अपने गाँव आते थे। साथ ही इन तीन पट्टी के लोगों के रिस्तेदार गढ़वाल के कोने-कोने से कुछ दिन पूर्व ही यहाँ के गाँव में आ जाते थे। जिस कारण यहाँ मई-जून के महीने गाँव भरे रहते थे और गांवों में खूब रौनक रहती थी। इस बार कोरोना ने सब कुछ बदल दिया। हालाँकि कोरोना के चलते कुछ थोड़े बहुत लोग गांवों में पहुंचे हैं। पर इस बार वो रौनक नहीं है बल्कि लोग डरे सहमे हैं।

इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य सजंय डबराल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य त्रिभुवन उनियाल, ज्येष्ठ उपप्रमुख अनिल नेगी, खैरालिंग मुंडनेश्वर विकास समिति प्रचार मंत्री मनीष खुगशाल स्वतन्त्र, पत्रकार जगमोहन डांगी एवं विक्रम पटवाल के अलावा क्षेत्र के राजस्व उपनिरिक्षक हरीश चंद्र पांडे के नेतृत्त्व में राजस्व पुलिस टीम मौजूद रही। देवभूमि संवाद के लिए मनीष खुगशाल, जगमोहन डांगी एवं विक्रम पटवाल की रिपोर्ट।

469 वर्षों में पहली बार खाली दिखा खैरालिंग मुंडनेश्वर मेले का थौल, नहीं सजी जलेबी की दुकानें

Posted by Devbhoomisamvad on Sunday, 7 June 2020

नोएडा : गर्भवती पत्नी को एंबुलेंस में लेकर 13 घंटे तक लगाता रहा अस्पतालों के चक्कर, नहीं किया एडमिट, ऐंबुलेंस में ही मौत

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नोएडा : कोरोना संकट काल में नोएडा के अस्पतालों की घोर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहाँ इलाज के लिए 13 घंटे तक अस्पतालों के चक्कर काट रही 8 महीने की गर्भवती महिला की इलाज न मिलने से ऐंबुलेंस में ही मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक खोड़ा कॉलोनी में रहने वाली 8 महीने की गर्भवती महिला नीलम की शुक्रवार सुबह अचानक तबियत खराब हो गई। जानकारी के मुताबिक नीलम एक वायर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी में काम करती थीं और उसके पास ईएसआई कार्ड भी था। इसलिए उसका पति विजेंद्र उसे सुबह 6 बजे ऑटो से नोएडा के सेक्टर 24 स्थित ईएसआईसी अस्पताल लेकर गया। ‘ईएसआईसी अस्पताल ने उसे कुछ समय के लिए ऑक्सिजन लगाई और फिर उसे नोएडा के सेक्टर 30 स्थित जिला अस्पताल में रेफर कर दिया। परन्तु जब बिजेंद्र नीलम को लेकर जिला अस्पताल पहुंचा तो वहां के स्टाफ से उसे भर्ती करने से साफ मना कर दिया। स्टाफ ने उसे कहा कि जब खोड़ा कॉलोनी में रहते हो तो यहां क्यों आए हो गाजियाबाद जाओ। स्टाफ ने कहा खोड़ा कंटेनमेंट जोन है इसलिए हमें वापस जाकर वहीं इलाज कराना चाहिए।

विजेंद्र के मुताबिक इसके बाद वह नीलम को लेकर सेक्टर 51 स्थित शिवालिक अस्पताल गया जहां उसका पहले भी इलाज चल रहा था। मगर उन्होंने भी उसे यह कह कर भर्ती करने से मना कर दिया कि महिला की हालत गंभीर है और उसे किसी बेहतर अस्पताल ले जाया जाये। जिसके बाद करीब 11 बजे बिजेंद्र नीलम को लेकर फोर्टिस अस्पताल लेकर गया, परन्तु वहां भी उसे भर्ती नहीं किया गया। स्टाफ ने कहा कि उनके पास बेड और वेंटिलेटर खाली नहीं है। किसी दूसरे हॉस्पिटल में ले जाओ। जिसके बाद यह शख्स अपनी पत्नी को लेकर नोएडा के सेक्टर 128 स्थित जेपी अस्पताल पहुंचा, परन्तु वहां के स्टाफ ने भी नीलम को भर्ती करने से इनकार कर दिया। इसके बाद वह उसे ग्रेटर नोएडा के शारदा अस्पताल लेकर गया मगर वहां भी उसे कह दिया गया, दूसरे अस्पताल ले जाओ। इसके बाद वह उसे ग्रेटर नोएडा के गर्वनमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइसेंस (जिम्स) अस्पताल लेकर गया। उन्होंने भी बेड न होने की बात कही। बिजेंद्र ने हिम्मत नहीं हारी और नीलम को लेकर गाजियाबाद वैशाली स्थित मैक्स अस्पताल ले गया लेकिन वहां भी भर्ती करने से मना कर दिया गया। आखिर में थक-हार कर वह दोबारा से पत्नी को जिम्स अस्पताल ग्रेटर नोएडा लेकर गया। अस्पताल पहुंचने पर जैसे ही ऑक्सीजन हटाई उसकी मौत हो गई।

पीड़ित विजेंद्र ने पूरी घटना को लेकर एक वीडियो बनाया है। जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वीडियो में विजेंद्र रोते हुए उन 13 घंटों में उनके साथ अस्पतालों ने जो बर्ताव किया उसे बताते हुए नोएडा सेक्टर-24 के ईएसआई अस्पताल, सेक्टर 30 के सरकारी अस्पताल, शिवालिक अस्पताल, सेक्टर 128 स्थित जेपी अस्पताल, शारदा अस्पताल, मैक्स, फोर्टिस और जिम्स अस्पताल पर कार्रवाई की मांग की है।

उधर जैसे ही गर्भवती महिला की मौत की खबर गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन को मिली, उसने तुरंत घटना की जांच के आदेश दे दिए। इस मामले में जिलाधिकारी सुहास एल वाई ने इस पूरे प्रकरण की जांच अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व मुनींद्र नाथ उपाध्याय तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दीपक ओहरी को सौंपी है। जिलाधिकारी ने दोनों अधिकारियों को इस प्रकरण में तत्काल जांच करते हुए कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

दिल्ली : समाजसेवी रविन्द्र रावत पर जानलेवा हमला, उत्तराखंड समाज के लोगों में रोष, हमलावरों को सजा देने की मांग

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Those who attacked social worker Ravindra Rawat should get punishment

नई दिल्ली : तुगलकाबाद विधानसभा क्षेत्र के पुल प्रह्लादपुर वार्ड के अंतर्गत विश्वकर्मा कॉलोनी में बीती रात कुछ अज्ञात लोगों ने उत्तराखंड मूल के समाजसेवी व आप नेता रविन्द्र रावत व उनके साथियों पर जानलेवा हमला कर दिया। जानकारी के मुताबिक कल रात करीब 10 :30 मास्क पहने कुछ अज्ञात लोगो ने अचानक RWA कार्यालय में आकर रविन्द्र रावत पर जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना में रविन्द्र रावत बुरी तरह जख्मी हो गए और उनके साथ के लोगो को भी गम्भीर चोटें आई हैं। उन्हें तुरन्त एम्स ट्रामा सेंटर ले जाया गया। हमलावरों ने RWA कार्यालय में तोड़फोड़ भी की।

जिस तरह से उन पर हमला हुआ है कहीं न कहीं यह सोची समझी साजिश नज़र आ रही है। सूत्रों से पता चला है कि किसी बिल्डर द्वारा उनपर हमला कराया गया। बतादें कि रविन्द्र रावत राजनीतिक के साथ-साथ उत्तराखण्ड समाज व RWA से जुड़े हुए एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। जिस कारण उनको जनता की समस्याए को भी हल करना होता है और कॉलोनी की शिकायतों पर भी संज्ञान लेना पड़ता है। इसी के चलते उनसे उस क्षेत्र के कुछ लोग खफा हैं और उनके दुश्मन बने हुए हैं। क्योंकि रविन्द्र रावत साउथ दिल्ली में उत्तराखण्ड समाज का एक बड़ा चेहरा है और राजनीति में भी बड़ा कद रखते है। बदरपुर विधसनसभा व तुगलकाबाद विधानसभा में उनकी अच्छी पकड़ है और स्थानीय जनता व समाज के लोग भी उनसे जुड़े हुए है। इसी कारण उनकी छवि समाजसेवी के रूप में बनी हुई है। कल देर रात जैसे ही उनके ऊपर हमले की खबर  फैली तुरन्त ही उत्तराखण्ड समाज के समाजसेवी, राजनीतिक लोग एम्स पहुचने शुरू हो गए। सभी ने रविन्द्र रावत को न्याय दिलाने व दोषियों को सजा दिलाने की बात कही।

अभी अभी जानकारी मिली है कि रविन्द्र रावत अस्पताल से डिस्चार्ज होकर अपने घर प्रह्लादपुर लौट गए हैं, हालाँकि उनके घाव काफी गंभीर बताये जा रहे हैं। इस केस से सम्बंदित सभी जानकारियां डीसीपी साउथ ईस्ट को उनके द्वारा दे दी गयी है। उन्होंने आश्वाशन दिया है जल्द FIR होगी और करवाई की जाएगी। इस घटना को लेकर उत्तराखंड समाज के लोग पुलिस अधिकारी से भी मिले।

वहीँ उत्तराखण्ड प्रकोष्ठ आप पार्टी ने उनकी आवाज़ को दिल्ली सरकार तक पहुँचाया दिया है। यही नहीं उत्तराखंड समाज के लोग चाहे वे किसी भी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हुए हों इस घटना की घोर निंदा करते हुए हमलावरों को जल्द से जल्द सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं। देवभूमिसंवाद को सबसे पहले यह जानकारी समाज सेवी व बीजेपी नेता उदय मंगाई राठी द्वारा दी गई। इस बात से पता चलता है कि हमारे समाज के लोग चाहे किसी भी राजनितिक पार्टी से जुड़े हुए हों परन्तु जब अपने समाज के लोगों पर मुसीबत आती है तो वे राजनीति से ऊपर उठकर अपने समाज के लोगों के साथ खड़े होते हैं।

इस वक्त मुसीबत की घड़ी में दिल्ली एनसीआर का उत्तराखंड समाज रविन्द्र रावत के साथ खड़ा हुआ है। जब तक रविन्द्र रावत पर हमला करने वाले दोषियों को सजा नही मिल जाती तब तक इसके खिलाफ आवाज़ उठाते रहना होगा।  दीप सिलोड़ी