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स्कूल फीस में छूट को लेकर आंदोलन जारी, जिलाधिकारी से मिले पेरेंट्स एसोसिएशन के पदाधिकारी

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मुख्य सचिव व अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर फीस में रियायत के लिए निवेदन कर चुके हैं जिलाधिकारी

जिलाधिकारी के सकारात्मक रूख से संतुष्ट हुए एसोसिएशन के लोग   

ग्रेटर नोएडा : कोरोना महामारी एवं लॉकडाउन के चलते पैदा हुए हालात के बीच आज ज्यादातर अभिभावक निजी स्कूलों की मोटी फीस भरने की स्थिति में नहीं हैं। स्कूल फीस में छूट को लेकर अभिभावकों द्वारा आंदोलन चलाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर चल रहे आंदोलन में अब तक लाखों लोग ट्वीट के माध्यम से सरकार व प्रशासन तक अपनी बात पहुंचा चुके हैं, हालांकि इस मुद्दे पर अभी तक कोई खास प्रतिक्रिया नहीं मिली है। शनिवार को जीएनजी पेरेंट्स एसोसिएशन के अनिल पुंडीर, योगेश भगौर, प्रकाश कोटिया, रजनीश पांडेय, चनजीत सिंह व गाजियाबाद पेरेंट्स एसोसिएशन से विवेक त्यागी आदि पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी सुहास एल.वाई. से मिला। पेरेंट्स एसोसिएशन के हेमचंद तिवारी ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि कोरोना महामारी व लॉकडाउन के चलते निजी कंपनियों द्वारा बड़ी संख्या में लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया है एवं वेतन में भी कटौती की गई है, जिसके कारण मध्यम वर्गीय परिवारों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे वक्त में यदि स्कूल फीस में बढ़ोतरी एवं स्कूल फीस के नाम पर अन्य तरह के शुल्क स्कूलों द्वारा लिए गए तो काफी कठिनाइयों का सामना अभिभावकों को करना पड़ सकता है। पेरेंट्स एसोसिएशन की बात सुन जिलाधिकारी ने उन्हें आासन दिया है कि ऐसे कठिन समय में अभिभावकों द्वारा स्कूल फीस में की जा रही रियायत की मांग को लेकर वे निरंतर प्रयास करते रहेंगे। जिलाधिकारी ने बताया कि फीस के मुद्दे पर उनके द्वारा मुख्य सचिव व अपर मुख्य सचिव को पहले ही पत्र भेजकर फीस में रियायत के लिए निवेदन किया गया है। इस दौरान पेरेंट्स एसोसिएशन ने स्कूल फीस अधिनियम 2018 के दिशा निर्देशों के विपरीत स्कूलों द्वारा स्कूल में किताब, यूनिफार्म बेचने व ट्यूशन फीस के अलावा तरह-तरह की फीस लेने व कम्पोजिट फीस के नाम पर ज्यादा फीस वसूलने के बारे में भी बात की। बताया जाता है कि इस पर संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने जिला विद्यालय निरीक्षक को तुरंत फोन कर आदेश दिया कि अगर स्कूल पूर्व में दिए शासनादेशों का पालन नहीं करते हैं,तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। जिलाधिकारी के सकारात्मक रुख से अभिभावक संतुष्ट दिखे। जीएनजी पेरेंट्स एसोसिएशन के अनिल पुंडीर का कहना है कि कई सालों से स्कूलों की मनमानी चलती रही है। स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आंदोलन चलता रहेगा।

उत्तराखंड मे आज फिर मिले 89 नए कोरोना पॉजिटिव, 1303 पहुंचा संक्रमितों का आंकड़ा

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corona virus

Coronavirus Update uttarakhand :  उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण का मामला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. प्रदेश में लगातार नए कोरोना के केस सामने आ रहे हैं. आज शनिवार को प्रदेश में कोरोना वायरस के कुल 89 नए मामले सामने आये हैं. स्वास्थ्य विभाग द्वारा दोपहर 02 बजे जारी हेल्थ बुलेटिन में 31 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई थी. जबकि अभी रात 8 बजे जारी दूसरी रिपोर्ट में 58 नए लोग कोरोना पॉजिटिव मिले हैं. जिसके बाद अब प्रदेश में कुल कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 1303 पहुँच गई है. आज मिले कुल 89 कोरोना संक्रमितों में से सबसे ज्यादा 21 लोग हरिद्वार जिले से हैं, इसके अलावा 16 पिथोरागढ़ से, 12 देहरादून से, 09 टिहरी से, 07 नैनीताल से  06 चमोली से, 06 चंपावत से, 04 अल्मोड़ा से,  04 बागेश्वर से,  03 उधमसिंह नगर से तथा 01 उत्तरकाशी से है. जिसके बाद अब प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों को आंकड़ा बढ़कर 1303 पहुँच गया है. इसके अलावा 423  लोग ठीक होकर घर भी लौटे हैं. जबकि 11लोगों की मौत हो चुकी है. आज मिले कोरोना संक्रमितों में से ज्यादातर लोग मुम्बई तथा दिल्ली से यहाँ पहुंचे हैं.

उत्तराखंड में अब तक कोरोना covid-19 के जिलेवार मामले

जनपद कोरोना के मरीज
देहरादून358
नैनीताल321
टिहरी118
उधमसिंह नगर88
हरिद्वार108
पौड़ी43
अल्मोड़ा73
पिथौरागढ़43
चमोली33
उत्तरकाशी23
बागेश्वर27
चंपावत45
रुद्रप्रयाग22
कुल1303

 

उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन की दृष्टिगत युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाये: मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन की दृष्टिगत युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाय। ग्राम सभा में भी समय-समय पर लोगों को प्रशिक्षित किया जाए। स्कूलों में आपदा प्रबंधन से संबंधित सप्ताह में एक क्लास की व्यवस्था हो। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के दृष्टिगत लोगों को आपदा प्रबंधन के लिए जागरूक करना जरूरी है। आगजनी घटनाओं एवं वर्षाकाल के लिए लोगों को प्रशिक्षित करना जरूरी है। आपदा की चुनौतियों का सामना करने के लिए समय-समय पर मॉक ड्रिल भी कराई जाए।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि आपदा प्रबंधन के लिए जो भी प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं उनको और प्रभावी बनाने के लिए विशेषज्ञों की राय ली जाए जिन शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है उनके माध्यम से सभी स्कूलों के अध्यापकों को भी ट्रेनिंग दी जाए आपदा प्रबंधन के दृष्टिगत संचार तंत्र को और अधिक मजबूत किया जाए।

मानसून के दृष्टिगत सभी तैयारियां पूरी कर ली जाय। आपदा कि दृष्टि से संवेदनशील स्थानों का चिन्हीकरण किया जाय। आपदा रिस्पांस टाइम को कम से कम करने का प्रयास किया जाय। लोगों को कोविड 19 से बचाव के लिए विभिन्न माध्यमों से जागरूक किया जाय।

बैठक में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा बताया गया कि मौसम से संबंधित सटीक जानकारियों के लिए मुक्तेश्वर एवं सुरकंडा में डॉप्लर रडार लगाने का कार्य चल रहा है। इस वर्ष 12321 युवक मंगल दल एवं 10908 युवक-युवतियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया। संचार तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए तहसील स्तर पर 184 सेटेलाइट फोन उपलब्ध कराए गए हैं। 2012 से अब तक 27 आपदा से संवेदनशील ग्रामों के 699 परिवारों का पुनर्वास किया गया है। गढ़वाल मंडल में 84 एवं कुमाऊं मंडल में 100 भूकंप पूर्व चेतावनी तंत्र उपकरण स्थापित किए गए हैं। गंगा नदी पर कोटेश्वर से लेकर ऋषिकेश तक 8 संवेदनशील स्थानों पर बाढ़ चेतावनी तंत्र स्थापित किए गए हैं। राज्य एवं जिला स्तर पर कार्मिकों को इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम का प्रशिक्षण दिया गया है।  राज्य आपदा मोचन निधि के तहत प्रदेश के सभी जनपदों को कुल 98 करोड़ रुपए, चिकित्सा शिक्षा निदेशालय को 20 करोड़ रुपए, लोक निर्माण विभाग को 30 करोड़ रुपए, पेयजल संस्थान को 20 करोड़ रुपए एवं चिकित्सा स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग को 16 करोड़ रुपए की धनराशि दी गई है।

बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, डीजीपी अनिल रतूड़ी, सचिव शैलेष बगोली, एस. ए. मुरुगेशन, आईजी एसडीआरएफ संजय गुंज्याल, एसीओ यूकेएसडीएमए श्रीमती रिधिम अग्रवाल, निदेशक आपदा प्रबंधन पीयूष रोतेला आदि उपस्थित थे।

केरल के बाद अब हिमाचल से भी हैवानियत भरी खबर, गर्भवती गाय को खिलाया विस्फोटक

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आज का इंसान न जाने किस हद तक गिरता जा रहा है। इंसानियत की सारी हदें पार कर जानवरों से बदतर हो गया है। अभी कुछ दिन पहले ही केरल के मलप्पुरम में एक गर्भवती हथिनी को कुछ शरारती तत्वों ने अनानास में पटाखे भरकर खिला दिया था, जिससे उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई और उसका मुंह बुरी तरह से जख्मी हो जाने की वजह से तीन दिन बाद उसकी भी मौत हो गई थी। इस घटना से पूरा देश शर्मसार हो गया था। वहीँ एक ऐसी ही हैवानियत भरी खबर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर से आ रही है। सूचना के मुताबिक बिलासपुर जिले के झंडुत्ता इलाके में एक गर्भवती गाय को किसी शरारती तत्व ने विस्फोटक का गोला बनाकर खिला दिया, जिससे गाय बुरी तरह से जख्मी हो गई है। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। मामले की जांच की जा रही है।

गाय के मालिक ने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर डाला है, जो तेजी से वायरल हो रहा है। पुलिस ने इस मामले के संबंध में केस दर्ज कर लिया है। पूरे मामले की गहनता से छानबीन की जा रही है। इस घटना के बाद से लोगों में जबरदस्त आक्रोश है।

कोरोना काल में रिवर्स पलायन के पश्चात पुनः पलायन रोकने हेतु कैसे हो स्थानीय संसाधनों का विकास, जानिए बुद्धिजीवियों की राय

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गोपेश्वर : कोरोना महामारी के कारण विभिन्न राज्यों से बडी संख्या में प्रवासी उत्तराखण्डवासी वापस अपने गाँव आ रहे है। राज्य सरकार द्वारा प्रवासी लोगो के लिए योजनाएं तैयार की जा रही है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ड्रीम्स संस्था द्वारा एक अभिनव प्रयोग किया गया। प्रवासी लोग अपने गाँव में रहकर ही रोजगार को अपनाए और इस रिवर्स पलायन के बाद पुनः पलायन को कैसे रोका जाय, इसके लिये ड्रीम्स संस्था द्वारा समाज के विभिन्न बुद्विजीवियों एवं विषय विशेषज्ञों के ऑन लाइन वीडियो आमंत्रित कर वीडियो व्याख्यान माला आयोजित की गई। जिसका विषय ‘‘कोरोना काल में रिवर्स पलायन के पश्चात् पुनः पलायन रोकने हेतु कैसे हो स्थानीय संसाधनों का विकास’’
संस्था के महासचिव दीपक नौटियाल ने बताया कि संस्था का यह प्रयास सफल रहा, पिछ्ले एक सप्ताह में हर रोज एक वीडियो जारी किया गया। जिसमें समाज के विभिन्न बुद्विजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विषय विशेषज्ञों के ऑन लाइन वीडियो आमंत्रित कर फेसबुक के माध्यम से जन सामान्य के समक्ष रखे गये। इसमें 24 व्यक्तियों के वीडियो शामिल किये गये। सभी लोगो द्वारा अपने विचार व्यक्त किये गये, जिसमें सबसे पहले अपने उद्बोधन में अनूप नौटियाल, संस्थापक ैक्ब् ने उत्तराखंड में पलायन के असर के बारे में बताते हुए विभिन्न प्रकार के पलायन के आंकड़े दिये उन्होंने कहा कि पलायनों को रोकने में सरकारें नाकाम रही हैँ। वर्तमान सरकार ने पलायन आयोग का गठन किया। नौटियाल ने कहा कि पलायन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 10 जिलों में वापस आये प्रवासियों के लिए राज्य सरकार द्वारा जल्द जल्द कोई ठोस बनाकर लागू करनी चाहिए।
शिक्षक संघ के कोषाध्यक्ष सतीश घिल्डियाल जी ने भी सरकार से मांग की कि योजनाएं शार्ट टर्म हों और जल्दी से लागु हों। उन्होंने इंडस्ट्रियल हैम्प (भाँग) की खेती करवाने पर जोर दिया जो कि बहुत अधिक महंगी बिकती है और जानवर भी इसे नुकसान नहीं पहुंचाते। विजय प्रसाद मैठाणी ने भी पलायन के आंकड़ों को रखते हुए पर्यावरण की बहुत सी सभावनाओं की ओर ध्यान आकर्षित किया और होम स्टेजों को विकसित करने के लिए अच्छी योजनाओं की जरुरत बताया। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संजय शर्मा ने अपने अपने गावों में लौटे लोगों के लिए सरकार से ईमानदारी से काम करने पर जोर देते हुए नये छोटे बड़े कारखाने लगाने की बात की ताकि लोगों को रोजगार मिल सके।
हरियाली फाउंडेशन के उपाध्यक्ष राम चन्द्र भट्ट ने सेवानिवृत कर्मचारियों के अनुभवों को सम्मिलित कर लघु एवं कुटीर उद्योगों को विकसित करने की बात की। उन्होंने सरकार को लोगों के लिए बहुत कम व्याज दर पर आसान किस्तों में पूर्ण किए जाने वाले लोन उपलब्ध कराने की सलाह दी। चमोली जिले के नेहरू युवा केंद्र के समन्वयक योगेश धस्माना के अनुसार उत्तराखंड के पलायन और अन्य प्रदेशों के पलायन में बहुत अंतर है। हमारे यहां स्किल्ड लोगों की अधिकता है तो उनके लिए बहुत जल्दी उसी तरह की योजना बनाने की आवश्यकता है। एक ढांचागत नीति के तहत लोकल क्षेत्र की आर्थिकी को मजबूत करने के लिए काम करने वालों के लिए सब्सिडी के बजाय वाह्य सपोर्ट की आवश्यकता है। एच.पी. ममगाईं ने पशुपालन एवं हर्बल विकास की प्रबल सभावनाएं बताई। शिक्षक अमित कपरुवाण ने लोकल श्रोतों को तकनीकीय स्वरुप देकर विकसित करने एवं पुनः हिमालयी संसाधनों के विकसित करने के साथ साथ प्रचुरता में उत्पादन पर जोर दिया। फिल्म निर्माता एवं निर्देशक प्रदीप भंडारी ने इसे एक प्रकार से पुनर्स्थापन नाम दिया और इसे दो श्रेणियों में बाँटा पहली वो जब आज लौटे व्यक्ति के पास कुछ भी नहीं, जिसे स्थापित करने हेतु सरकारी मदद या अन्य क्षेत्रीय समर्थन की आवश्यकता है और एक दीर्घकालीन जब वह स्वयं में निर्भर होने की स्थिति में होगा। दोनों परिस्थियों के लिए सरकार को गंभीर योजनाएं बनाने की आवस्यकता है।
नैनीताल हाईकोर्ट के अधिवक्ता भागवत सिंह नेगी ने कहा कि हमारे क्षेत्रीय संसाधनों का विकास इस तरह से हो कि अपनी रोजी का साधन व्यक्ति पहाड़ों पर भी ढूंढे। कृषि, पशुपालन, पर्यटन, पर्यावरण पर अभी तक कोई भी सरकार गंभीरता से काम नहीं कर पाई है, जो अब तकनीकीय स्वरुप देकर और भी आसान हो सकता है बस जरुरत सोच और नीयत की। यूथ आइकन के संस्थापक समाजसेवी शशिभूषण मैठाणी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा क्षेत्रीय संसाधनों को विकसित करने के लिए बनायी जा रही योजनाओं की सम्पूर्ण एवं सही जानकारी सभी लोगों तक पहुंचायी जाय। इसके साथ ही प्रवासी लोग अपनी गांव अपनी माटी से जुड़े रहे। रा.उ.मा पालाकुराली जखोली रूद्रप्रयाग के विज्ञान के अध्यापक अश्विनी गौड़ ने लोकल उत्पाद की अधिकता एवं उनको ब्रांड बनाकर तकनीकी ढंग देकर उसका वृहद व्यापार करने का सुझाव दिया। खटीमा से वरिष्ठ पत्रकार कमलेश भट्ट ने सुझाव दिया कि आज पलायन के बाद पहाड़ पहले जैसे नहीं रहे अब बिना किसी सटीक सरकारी योजना के यहां कुछ भी संभव नहीं है। सरकार जंगली जानवरों से निजात पाने के साथ-साथ कृषि पर एक मजबूत योजना बनाये। दैनिक अमर उजाला वाराणसी के वरिष्ठ उप संपादक रमेश कुड़ियाल के अनुसार सरकार को एक ऐसी व्यावहारिक योजना बनानी होगी जिससे एक आम आदमी की आमदनी सम्मान जनक एवं उसकी जीविका चलाने योग्य हो।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅ. नूतन गैरोला ने अपने पहाड़ के अनुभवों का हवाला देकर सरकार को महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं बनाने पर जोर दिया, क्योंकि महिलाएं ही पहाड़ पर ज्यादा जूझती हैं। वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र अंथवाल ने सरकार से सबसे पहले कम समय में आउटपुट देने वाली फसलों हेतु योजना बनाने के लिए सुझाव दिया। डा0 शिखा ममगाईं असिस्टेंट प्रोफेसर डिग्री कॉलेज मंगलोर हरिद्वार ने लोकल प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने एवं लोकल त्योहारों की आवश्यकता के प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ाने पर जोर दिया और सरकार से एक विशेष योजना बनाने हेतु सुझाव दिया। हिमाद संस्था के निदेशक डा0 डी.एस. पुंडीर ने क्षेत्रीय सा्रोतो का सही उपयोग कर फल एवं सब्जी उत्पादन, डेरी उत्पादन हेतु प्रयास करने का एवं इसके लिए योजनाएं बनाने का सुझाव दिया। लरनेट स्किल्स लिमिटेड के जोनल हेड उत्तरप्रदेश/उत्तराखंड रमेश पेटवाल ने कहा कि सरकार के पास यह एक अच्छा मौका है, जो व्यक्ति वापस आये हैं वे कुछ न कुछ स्किल ले के वापस आये हैं। अब जरूरी है कि उनका स्किल को समझकर उनके लिए शॉर्ट टर्म योजनाएं बनाई जांय। चरेखा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्टर डा0 माधुरी डबराल ने सरकार को चकबन्दी पर अति शीघ्र काम करने पर जोर दिया और तब तक लोगों को सूक्ष्म समय के उत्पादों जैसे फल एवं सब्जियों एवं पशुपालन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
डा0 महेंद्र पाल सिंह परमार, असिस्टेंट प्रोफेसर डिग्री कॉलेज उत्तरकाशी ने लोकल उत्पादों में मतस्य पालन को भी एक महत्वपूर्ण उत्पाद माना और इससे भी बहुत फायदा होने की आशा जताई। इसके साथ ही आपने जड़ी बूटी पर अच्छी योजना बनाकर काम करने की आवशयकता। उत्तरकाशी से प्रताप पोखरियाल जो पर्यावरण मित्र के नाम से जाने जाते जाते हैं, उन्होंने अपने बलबूते 6 वनों को तैयार किया है। पोखरियाल ने उदाहरण देते हुए लोगों को प्रेरित किया, कि स्थानीय संसाधनों से ही रोजगार के अवसर निकलेंगे। पीपलकोटी से आगाज फेडेरशन के अध्यक्ष जगदम्बा मैठाणी ने कृषि, उद्यानी, पशुपालन एवं जड़ीबूटी के क्षेत्र में बहुत सी संभावनायें व्यक्त करते हुए सरकार से ठोस योजना बनाने की मांग की।  संस्था के उपाध्यक्ष राकेश मैठाणी एवं अध्यक्ष गंभीर सिंह जयाड़ा ने सभी के उद्बोदन पर धन्यवाद ज्ञापित किया एवं सभी लोगों को उत्तराखंड को हराभरा बनाने हेतु एक जन अभियान का रूप देने की अपील की ।
इस वीडियो श्रृंखला के अंतिम धन्यवाद उद्बोधन में संस्था के सचिव दीपक नौटियाल ने सभी वक्ताओं, मीडिया, सोशल मीडिया, पोर्टल एवं ग्रुप एडमिन्स का धन्यवाद अर्पित किया और आगे भी कृषि व अन्य सामाजिक गतिविधियों पर फेसबुक पेज के माध्यम से मोटिवेशनल कार्यक्रम करते रहने को कहा। नौटियाल ने बताया कि संस्था का यह प्रयास सफल रहा है। संस्था को मिले 25 वीडियों का संकलन तैयार कर एक सूक्ष्म डॉक्यूमेंट्री का निर्माण कर सुझाव स्वरूप सरकार को भेंट की जाएगी।
इस श्रृंखला का संयोजन संस्था के उपाध्यक्ष राकेश मैठाणी एवं श्रेया नौटियाल ने बारी बारी से किया।

उत्तराखंड बोर्ड की बची हुई परीक्षाएं 20 से 23 जून तक होंगी

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देहरादून : उत्तराखंड बोर्ड की शेष बची परीक्षाएं 20 जून से 23 जून तक होंगी। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने आज दूरभाष पर ही इस कार्यक्रम का अनुमोदन कर दिया है। शिक्षा मंत्री पांडे ने कहा कि कोरोना वायरस से बचाव हेतु जिन विद्यालयों को क्वॉरेंटाइन केंद्र बनाया गया था उनको आगामी 15 जून से 19 जून 2020 तक पूर्ण रूप से सैनिटाइज करने तथा 20 जून से 23 जून 2020 के मध्य, माध्यमिक शिक्षा परिषद बोर्ड की शेष परीक्षाओं को कराने का अनुमोदन दूरभाष द्वारा कर दिया गया है। उन्होंने सचिव शिक्षा को निर्देश दिये हैं कि परीक्षा से पहले परीक्षा केंद्रों को सेनिटाइज कराने की व्यवस्था ठीक से करा ली जाए। साथ ही परीक्षा केंद्र पर छात्रों के मध्य सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखने के लिए भी उन्होंने कहा है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए विद्यालयों को कोरेंटाइन केंद्र बनाया गया था। ऐसे सभी विद्यालयों को सेनिटाइज करने को कहा गया है और सेनिटाइजेशन की कार्रवाई 15 जून से शुरू करके हर हाल में 19 जून तक पूर्ण करने के निर्देश दिये गये हैं। बोर्ड परीक्षा समापन के एक सप्ताह बाद मूल्यांकन कार्य शुरू करने के लिए भी व्यवस्था करने को कहा है।

कोरोना संक्रमण के चलते किये गए लाकडाउन के बाद उत्तराखंड बोर्ड की आखिरी तीन दिन की परीक्षाओं को स्थगित करना पड़ा था। इसमें हाईस्कूल की गणित व संस्कृत के साथ ही इंटरमीडिएट के भी तीन पेपर गणित, संस्कृत व भूगोल शेष रह गये हैं। लाकडाउन व कोरोना के खौफ के चलते परीक्षाएं स्थगित करने के साथ ही मूल्यांकन कार्यक्रम भी स्थगित करना पड़ा था।

कोरोना को लेकर चमोली से अच्छी खबर

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चमोली जिले के जिला कोविड सेंटर गोपेश्वर में भर्ती 31 कोरोना पाॅजिटिव में से 15 स्वस्थ्य होने के बाद आज शुक्रवार को उन्हें अपने घरों को भेज दिया गया है। इन सभी को 14 दिन घर पर ही एकांतवास पर रहना होगा।

जिला चिकित्सालय गोपेश्वर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. जीवन सिंह चुफाल ने बताया कि जिला कोविड सेंटर में भर्ती 31 कोरोना पाॅजिटिव में से 15 लोग स्वस्थ्य हो गये है। जिन्हें आज  घर भेज दिया गया है। जाे अब 14 दिन घर पर ही एकांतवास में रहगे l  ठीक होकर घर भेजे गये मरीजों में 10 गैरसैण, चार घाट तथा एक थराली का व्यक्ति शामिल है। 15 मरीजों के ठीक होने के बाद घर भेजे जाने पर उन्हें व्यापार संघ के अध्यक्ष अनूप पुरोहित ने फूल भेंट कर उनके स्वस्थ और दीर्घायु कामना की। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने ताली बजाकर उन्हें विदा किया। इस मौके पर सीएमएस डाॅ. जीवन सिंह चुफाल, डाॅ. मानस सक्सेना, डाॅ. हिमांशु मिश्रा, फार्मेसिस्ट बीएस भंडारी आदि मौजूद रहे।

वहीं भराड़ीसैंण में क्वारीटीन एक व्यक्ति में हुई कोरोना संक्रमण की पुष्टि, व्यक्ति गैरसैंण ब्लाक का बताया जा रहा है।

कोरोना संकट काल में भी “मुखिड़ी देखिकि टुकड़ी” वाली बातें आ रही हैं सामने

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कल्जीखाल : वैश्विक महामारी कोविड-19 की रोकथाम के लिए देशभर में चल रहे लॉकडाउन के कारण दूसरे राज्यों से गढ़वाल लौट रहे लोगों को भी प्रशासन द्वारा तय दिशा निर्देशों के मुताबिक 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन रहना पड़ रहा है। हालाँकि प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइन्स का लोग अपनी-अपनी सहूलियत के हिसाब से पालन कर रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में देखने में आया है कि बाहरी राज्यों से आने वाले कुछ रसूखदार लोग जो कि अपने निजी वाहनों से गाँव लौट रहे हैं। वे सीधे गाँव ने प्रवेश कर आराम से होम क्वारंटाइन में रह रहे हैं। और वहीँ कुछ लोग जो सार्वजनिक वाहनों से गाँव लौट रहे हैं। उनको गाँव के बाहर स्कूलों में संस्थागत क्वारंटाइन रखा जा रहा है। सही मायने में लॉकडाउन की गॉइडलाइन्स का पालन यही लोग कर रहे हैं।

खैर इसमें उन लोगों को भी दोष नहीं दे सकते हैं जो सीधे होम क्वारंटाइन में चले जा रहे हैं, क्योंकि जब सूबे के कई मंत्री ही अपने हिसाब से लॉकडाउन के दिशानिर्देशों को अमल में ला रहे हैं। तो फिर जनता को क्या कहना है। बहराल सारे नियम, कायदे कानून गरीब जनता के लिए ही हैं। गढ़वाल मंडल में किसी जमाने में एक कहावत कही जाती थी कि अक्सर चालाक लोग “मुखिड़ी देखिकि टुकड़ी” बाँटते थे। आज कोरोना के संकट काल में यह कहावत हकीकत में तब्दील होती नज़र आ रही है। कोरोना का वायरस जब आम और खास में भेदभाव नहीं करता है तो फिर यहां ये भेदभाव कैसा!

पौड़ी जनपद के कल्जीखाल ब्लॉक के अंतर्गत घण्डियाल क्षेत्र में भी लॉकडाउन के दौरान लौटे ज्यादतर लोग अपने वाहनों से आये और होम क्वारंटाइन में रह रहे हैं। यहाँ इस समय मात्र एक परिवार है जो कि सार्वजनिक वाहनों से यहाँ पहुंचा और कन्या हाई स्कूल घण्डियाल में संस्थागत क्वारंटाइन है। यह परिवार बीते 21 मार्च को एक शादी समारोह में शामिल होने दिल्ली गया था और लॉकडाउन में वहीँ फंस गया। और अभी कुछ दिन पहले ही सार्वजनिक वाहनों द्वारा यहाँ पहुंचकर संस्थागत क्वारंटाइन रहते हुए शासन/प्रशासन द्वारा तय लॉकडाउन की गॉइडलाइन्स का पालन कर रहा है। आज विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर इस परिवार द्वारा विद्यालय प्रांगण लगे छायादार वृक्षों के रख रखाव के साथ नजदीक सीएचसी घण्डियाल के आस पास भी झाड़ियां काटी गई।

इसके अलावा पर्यावरण दिवस पर ग्राम डांगी में कवारंटाइन में रहने के बाद पर्यावरण प्रेमी शिशुपाल सिंह चौहान, विनोद कुमार, बलबीर कुमार ने पर्यावरण दिवस पर जल सवंर्धन एवं जल संरक्षण करने के उद्देश्य से प्राकृतिक जल स्रोत के आसपास बांज के वृक्ष लगाए।

जगमोहन डांगी विशेष रिपोर्ट

 

 

श्रीनगर-पौड़ी रोड़ से कोटि गाँव जा रही सड़क पर एक बस खाई में जा गिरी, बस चालक की मौत

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श्रीनगर गढ़वाल : श्रीनगर गढ़वाल से एक दुखद खबर आ रही है। जानकारी के मुताबिक खंडाह के करीब एक किलोमीटर आगे श्रीनगर-पौड़ी रोड़ से कोटि-कमेड़ा के लिए जा रही सड़क पर एक बस अचानक अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी। इस हादसे में बस चालक की मौके पर ही मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि गड्सारी गाँव का बस चालक सुभाष भट्ट अपनी (जीएमओ) बस को लेकर कोटि गाँव गया था और वापसी में अपने गाँव गडसारी आते हुए उसकी बस मोड़ पर अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई. बताया जा रहा है कि बस में चालक सुभाष भट्ट के अतिरिक्त कोई अन्य सवारी नहीं बैठी थी। दुर्घटना में सुभाष भट्ट (50) पुत्र पुरनांनद की मौके पर ही मौत हो गई। करीब एक घंटे के रेस्क्यू औपरेशन के बाद बस ड्राइवर को बस से बाहर निकाला गया। बस चालक किसी कारण से वहां गया इसका पता नहीं लग पाया है।

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कोरोना संकट काल में भी “मुखिड़ी देखिकि टुकड़ी” वाली बातें आ रही हैं सामने

विश्व पर्यावरण दिवस पर जीआईसी उज्याड़ी में वृक्षारोपण कार्यक्रम

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GIC Ujyadi on World Environment Day

पौड़ी गढ़वाल : विश्व पर्यावरण दिवस पर आज भारत स्काउट गाइड संस्था पौड़ी द्वारा राजकीय इंटर कॉलेज उज्याड़ी में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में छात्र छात्राओं स्काउट गाइड एवं विद्यालय के अध्यापकों द्वारा विद्यालय में पौधरोपण किया गया. इस मौके पर स्काउट गाइड के सदस्यों द्वारा लोगों एवं छात्र-छात्राओं को सामाजिक दूरी बनाये रखने के साथ-साथ अनिवार्य रूप से मास्क पहनने तथा ग्राम सभाओं की साफ-सफाई आदि का प्रचार प्रसार किया गया. इस दौरान सामाजिक दूरी बनाए रखकर एक गोष्टी की आयोजित की गई. जिसमें उपस्थित लोगों को तथा विद्यालय में कोरोनावायरस को सामाजिक दूरी बनाए रखने आदि के लिए प्रेरित किया गया साथ ही छात्रों एवं लोगों को मास्क वितरित किए गए. कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य धर्म सिंह, अध्यापक जेपी कुकरेती, रघुराज चौहान, संग्राम सिंह नेगी, केशर सिंह असवाल, जगमोहन रावत आदि उपस्थित थे. स्काउट गाइड छात्र-छात्रा कुमारी कंचन, दिव्या, सिमरन, विवेक जवाड़ी, रोहित सिंह आदि उपस्थित थे स्काउट गाइड छात्र-छात्राओं ने ग्राम सभा में सामाजिक दूरी बनाए रखने हेतु रैली निकाली.