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उत्तराखंड : शनिवार को टूटा कोरोना का कहर, 92 लोग निकले पॉजिटिव, 244 पहुंचा संक्रमितों का आंकड़ा

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Coronavirus (Covid-19) : शनिवार को तो मानो उत्तराखंड में कोरोना वायरस का कहर टूट पड़ा। शनिवार को प्रदेश में रिकॉर्ड 92 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। एक दिन में 92 लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग में हडकंप मच गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा शनिवार 11.30 जारी कोरोना सैंपल जाँच रिपोर्ट के मुताबिक आज 11 बजे तक प्रदेश में 20 लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई थी। जबकि रात 8 बजे जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में 72 नए लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है। जिसके बाद अब राज्य में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़कर 244 पहुँच गई है।

शनिवार को प्रदेश में कोरोना पॉजिटिव आये 92 मरीजों में से 57 लोग अकेले नैनीताल जिले से हैं। इनमे से 55 लोग महाराष्ट्र से चली ट्रेन से 21 मई को हरिद्वार पहुंचे थे। यहां से उन्हें बसों के जरिये हल्द्वानी भेजा गया था। इसके अलावा 10 लोग देहरादून जिले से, 07 लोग चम्पावत जिले, 03 उधमसिंह नगर से, 03 उत्तरकाशी से, 03 अल्मोड़ा से, 03 रुद्रप्रयाग से,  02 पिथोरागढ़ से, 02 पौड़ी गढ़वाल से तथा 02 कोरोना पॉजिटिव हरिद्वार जिले से हैं। जिसके बाद अब राज्य में कोरोना के मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 244 हो गया है। अब राज्य कोई भी जिला कोरोना संक्रमण से अछूता नहीं रह गया है।

प्रदेश में कोरोना के मरीजों की संख्या
जिले                   मरीजों की संख्या
नैनीताल               57
देहरादून               10
चंपावत                07
यूसनगर              03
रुद्रप्रयाग              03
अल्मोड़ा               03
उत्तरकाशी           03
पौड़ी                    02
पिथौागढ़              02
हरिद्वार              02
कुल                   92

गौतमबुद्ध नगर में आज फिर मिले 17 नए कोरोना पॉजिटिव, 323 पहुंचा जिले में मरीजों का आंकड़ा

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नोएडा : गौतमबुद्धनगर जनपद में आज कोरोना COVID19 के 17 नए मामले सामने आये हैं। शनिवार को जिला सर्विलांस अधिकारी द्वारा जारी सैंपल जांच रिपोर्ट में 17 लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। जिसके बाद अब जिले में कुल मामलों की संख्या बढ़कर 323 हो गई है। इसके अलावा आज 7 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया है, अब तक जिले में कुल 221 ठीक हो चुके हैं।

शनिवार को जो 17 मरीज कोरोना पॉजिटिव मिले हैं उनमे से 5 मरीज नोएडा सेक्टर-73 के सरफाबाद गांव के, 3 मरीज नंगला चरनदास, सेक्टर-81 नोएडा, एक 42 वर्षीय व्यक्ति बरोला सेक्टर-49 नॉएडा, एक 33 वर्षीय युवक गिजौड़, सेक्टर-53 नोएडा का, एक 35 वर्षीय युवक हरौला सेक्टर-5 नोएडा का रहने वाला है। जबकि ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बिसरख गांव में 2 मामले सामने आए हैं। इनमें 29 वर्ष की एक महिला और 49 वर्ष का एक पुरुष शामिल हैं। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा के कासना गांव में एक 25 वर्ष का युवक कोरोनावायरस से संक्रमित हो गया है। एक 23 वर्षीय युवक गौर सिटी-2, ग्रेटर नोएडा, 2 लोग इको विलेज सुपरटेक ग्रेटर नोएडा के रहने वाले हैं।

श्रीनगर गढ़वाल: कोरोना संकट में वार्ड न. 12 के सभासद हरि सिंह मियां लोगों को कर रहे जागरूक

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श्रीनगर गढ़वाल: नगर पालिका परिषद श्रीनगर के अंतर्गत डांग क्षेत्र के सभासद हरि सिंह मियां ऐसे सभासद है जो अपने वार्ड में खुद के खर्चे पर विभिन्न घरों को सैनिटाइज करने के साथ-साथ लोगों को जागरूक करने का काम भी कर रहे हैं। सभासद द्वारा हर दिन विभिन्न घरों में सैनिटाइजेशन किया जा रहा है। वे अपने खर्चे पर सैनिटाइजर मंगवाकर अब तक करीब 1200 घरों को सैनिटाइज कर चुके हैं।

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वार्ड न. 12 में सभासद द्वारा घरों को सैनिटाइज किए जाने पर स्थानीय लोगों ने सभासद हरिसिंह मियां का आभार प्रकट किया है। सभासद द्वारा अपने वार्ड 12 के साथ तहसील परिसर में भी खुद सेनीटाइजेशन का कार्य करने पर एसडीएम दीपेंद्र नेगी, तहसीलदार सुनील राज ने सभासद के कार्यों की प्रशंसा की।

लॉकडाउन में “थर्ड आई फाउंडेशन संस्था” बनी कोरोना वारियर

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गाजियाबाद : सामजिक संस्था थर्ड आई फाउंडेशन द्वारा लॉकडाउन काल में रविवार को ब्लड बैंक में दूसरा इंडोर स्वेच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। कोरोना महामारी से जंग लड़ रहे भारत देश के लिए यह स्वेच्छिक रक्तदान शिविर वरदान से कम नही है. क्योंकि लॉकडाउन और कंटेनमेंट जोन की वजह से जिले के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती मरीजों से मिलने उनके परिजन नही पहुंच पा रहे हैं। जिसकी वजह से जरूरतमंद मरीजों के लिए ब्लड उपलब्ध होने में काफी दिक्कत हो रही है।

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संस्था के प्रबंध निदेशक सोहन सिंह ने बताया कि थैलेसीमिया, हीमोफीलिया, सिकलसेलेमियाए, ल्यूकेमिया, पीपीएच आदि के मरीजों को भी काफी परेशानी हो रही है। ऐसे में “थर्ड आई संस्था” के सदस्यों द्वारा आयोजित यह स्वेच्छिक रक्तदान शिविर बेहद महत्वपूर्ण है। रक्तदान शिविर में फिजिकल डिस्टेन्स और हाइजीन का पूरा ध्यान रखा गया। सभी उपस्थित रक्तदानी का टेस्ट कर के उनसे रक्तदान कराया गया। शिविर में उपस्थित संस्था के संस्थापक सुमित नेगी ने कहा कि संस्था 2012 से सामाजिक कार्यो में सक्रिय है एवं समय समय पर जरूरतमंदों को खून उपलब्ध कराती आ रही है। साथ ही रक्तदान के प्रति जागरूकता लाने के लिए स्कूल कॉलेज में भी अनेको तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं।

स्वेच्छिक रक्तदान शिविर में संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम सिंह चौहान ने बताया कि सुरेन्द्र सिंह, अनुराधा सिंह, कीर्ति मालिक, दीपेन्द्र सिंह व अन्य रक्तदाताओं सहित कुल 69 यूनिट रक्त घटक से जरूरतमंद लोगों की मदद की गई। शिविर को सफल बनाने के लिए उतराखंड के सुप्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता राजेश मालगुडी व उतराखंड के प्रति समर्पित, समाजसेवी अनिल पंत दिल्ली से चलकर गाजियाबाद उत्तरप्रदेश स्वेच्छिक रक्तदान शिविर में उपस्थित रहे।

कोरोना वारियर कांस्टेबल स्व. संजय गुर्जर की पत्नी को सीएम ने सौंपा 10 लाख रुपये का चेक

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देहरादून : मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में कांस्टेबल स्वर्गीय संजय गुर्जर की पत्नी को सीएम राहत कोष से 10 लाख रूपये का चेक सौंपा। कोरोना वारियर  संजय गुर्जर की अपने कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान सड़क दुर्घटना में 5 मई 2020 को मृत्यु हो गई थी। वे प्रेमनगर थाने में कार्यरत थे।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर कोरोना वारियर्स की जीवन क्षति पर सम्मान राशि के मानक को शिथिल किया गया था। यह प्रावधान किया गया कि कोरोना से संबंधित ड्यूटी करते हुए कोरोना वारियर्स की मृत्यु होने पर भी परिवारजनों को सीएम राहत कोष से 10 लाख रूपये की सम्मान राशि दी जाएगी।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने स्व0 संजय गुर्जर की पत्नी श्रीमती प्रियंका को राज्य सरकार की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया। उन्होंने डीआईजी देहरादून अरुण मोहन जोशी को निर्देश दिए कि कांस्टेबल संजय गुर्जर की पत्नी श्रीमती प्रियंका की पुलिस विभाग में नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द पूर्ण की जाए।  संजय गुर्जर की पुत्री अनुष्का तीसरी कक्षा में पढ़ती है।  इस अवसर पर डीआईजी अरूण मोहन जोशी, आईपीएस सुभादाने विशाखा अशोक, एसपी सिटी श्रीमती श्वेता चौबे, सीओ मसूरी नरेंद्र पंत, एसओ प्रेमनगर धर्मेंद्र रौतेला आदि उपस्थित थे।

श्रीनगर-बदरीनाथ हाईवे पर दर्दनाक सड़क हादसा, ट्रक से टकराई तेज रफ्तार बाइक, युवक की मौत

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श्रीनगर गढ़वाल: उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल से एक दर्दनाक सड़क हादसे की खबर आ रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक श्रीनगर से करीब 15 किलोमीटर दूर बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कलियासौड़ के समीप एक बाइक और ट्रक की टक्कर हो गई। इस दर्दनाक हादसे में बाइक सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई है।

प्राप्त सूचना के मुताबिक मृतक मुहम्मद अशरफ चमोली जिले के विकास खंड नारायणबगड़ में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत था। माता का स्वास्थ्य खराब होने के कारण वह अपने घर रुड़की जा रहा था। पुलिस के अनुसार बाइक सवार तेज गति में था और बाइक फिसल कर ट्रक से टकरा गई।

उत्तराखंड में फूटा कोरोना बम, शनिवार को 20 लोग निकले कोरोना पॉजिटिव, 173 पहुंचा संक्रमितों का आंकड़ा

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Coronavirus (Covid-19) : उत्तराखंड में अब कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। शनिवार को तो मानो कि यहाँ जैसे कोरोना बम फूट गया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा शनिवार 11.30 जारी कोरोना सैंपल जाँच रिपोर्ट के मुताबिक आज 11 बजे तक प्रदेश में 20 लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। यह पहली बार है जब राज्य में कोरोना के एक साथ 20  मामले सामने आए हैं। अभी शाम तक मरीजों की संख्या बढऩे की आशंका है।

आज प्रदेश में कोरोना पॉजिटिव आये 20 मरीजों में से 07 लोग अकेले चम्पावत जिले के रहने वाले हैं। जबकि 03 उत्तरकाशी से, 03 अल्मोड़ा से, 02 नैनीताल से, 02 पिथोरागढ़ से, 02 देहरादून से तथा 01 कोरोना पॉजिटिव हरिद्वार जिले का रहने वाला है। जिसके बाद अब राज्य में कोरोना के मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 173 हो गया है।

जिलेवार कोरोना मरीजों का आंकड़ा

1. देहरादून- 56
2. उधमसिंहनगर- 31
3. नैनीताल- 30
4. हरिद्वार- 13
5. उत्तरकाशी- 10
6. अल्मोड़ा- 07
7. चंपावत- 07
8. टिहरी- 06
9. बागेश्वर- 06
10. पौड़ी- 04
11. पिथौरागढ़- 02
12. चमोली- 01
13. रुद्रप्रयाग- कोई केस नहीं

 

भारतीय संस्कृति की मूल है गौ माता, जानिए विशेषतायें

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भारतीय संस्कृति की मूल है गौ माता, जाने विशेषतायें

हमारे प्राचीन पौराणिक ग्रन्थों में गाय यानी गौ माता को भारतीय संस्कृति का प्रतीक माना गया है। गाय को कपिला, पदमा, गौरी, धेनु, भद्रा, सुरभी, हिन्दुमाता आदि अनेक नामों से जाना जाता है। गाय सदियों से भारतवर्ष में पूजनीय रही है। गौ पालन से ही इस देश के निवासियों का जीवन व्यतीत होता था। इसी कारण गौ वंश संरक्षण ही जीवन का लक्ष्य था। गौ वंश का संवर्धन करना प्रत्येक भारतीय अपने जीवन का कर्तव्य समझता था। भारतीय संस्कृति के मूल रूप में गौ माता रही है। इसके बिना भारतीय तथा भारतीयता का कोई अर्थ नहीं  रह जाता है। ऋग्वेद (1/54/6) में इस तरह का वर्णन देखने को मिलता है. गौ भक्त गण, अश्विनी कुमार से प्रार्थना करते हैं कि हे अश्विनी कुमार हम आपके उस गौलोक रूप निवास-स्थान में जाना चाहते हैं। जहाँ सींग वाली, सर्वत्र विचरण करने वाली गौयें निवास करती हैं। वहीं पर सर्वव्यापक विष्णु भगवान का परम पद वैकुण्ठ प्रकाशित हो रहा है। हिन्दू धर्म में गाय को गौमाता कहा गया है। पुराणों में धर्म को भी गाय कहा गया है। भगवान श्रीकृष्ण स्वयं गायों की सेवा किया करते थे। कहा जाता है कि ब्रह्मा जी ने जब भी सृष्टि की रचना की, तो सर्वप्रथम पृथ्वी पर गौमाता को ही भेजा। सभी पशुओं में गाय ही इस तरह का पशु है कि जिसके मुंह से माँ शब्द का उच्चारण होता है। इसी कारण कहा जाता है कि माँ शब्द की उत्पत्ति गौ माता के ही द्वारा ही हुई है। वाल्मीकि रामायण से लेकर महाभारत श्रीमद्भागवत गीता पुराण आदि ग्रन्थों से ज्ञात होता है कि बडे से बडे राजा महाराजा लाखों की संख्या में गौ वंश का पालन करते थे। लाखों गायों का एक साथ दान किया करते थे। समाज में बेहतर तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले को गाय दी जाती थी। भगवान राम ने दस सहस्त्र करोड़ गायें विद्वानों को विधिपूर्वक दान की थी। अयोध्या कांड के 32 सर्ग में प्रसंग आता है कि एक बार भगवान राम के पास त्रिजट नामक ब्राह्मण देवता आये। राम चन्द्र जी ने कहा आप अपनी छडी को जितनी दूर तक फेंक सकेंगे, वहां तक की सारी गाय आपको मिल जायेगी। ब्राह्मण ने पूरी ताकत के साथ छडी को फेंका। छडी हजारों गायों के गौष्ट में जाकर गिरी। भगवान श्री राम ने त्रिजट का सम्मान करते हुये वहां तक की सारी गायें उनके आश्रम में पहुंचा दी। गायों की प्राप्ति पर त्रिजट ब्राह्मण ने अपनी गौशाला में जाकर बडे ही श्रद्धा पूर्वक प्रार्थना करने लगे हे प्रभो/गायों ने हमारे यहाँ आकर  हमारा कल्याण किया है। वे हमारी गौशाला में सुख से बैठे और उसे सुंदर शब्दों से गुंजा दें। ये अनेकों रंग की गायें अनेक प्रकार के बछडे बछडियों को जने और परमात्मा के यजन के लिए ऊषा काल से पहले दूध देने वाली हों।

श्रीमद भागवत में भगवान श्री कृष्ण की गौ भक्ति, गाय सेवा, गाय दान का बडा ही रोचक प्रसंग आता है। योगेश्वर श्री कृष्ण भगवान प्रतिदिन संध्या तर्पण और गुरु पूजन करने के पश्चात पहले पहले व्याही हुई दुधारू बछडो वाली सीधी शान्त वस्त्रालंकारों से सुसज्जित तेरह हजार चौरासी गायों का दान किया करते थे। इससे सहज ही आकलन किया जा सकता है कि गाय के प्रति कितनी श्रद्धा थी। गाय को कितने संरक्षण के साथ सम्मान प्राप्त था? यह स्वस्थ परम्परा अनादिकाल से ही इस पुण्य भूमि में चली आई है।

महाभारत के विराट पर्व में प्रसंग आता है कि महाराज युधिष्ठिर कितने समर्पित एवं प्रसिद्ध गौ सेवी थे। दुर्योधन ने पाण्डवों के अज्ञात वास के विषय में ग॔गा पुत्र भीष्म से प्रश्न करते हुए कहा कि पितामह पान्डव कहाँ निवास कर रहे होगे? पितामह ने कहा कि इसका बडा सरल सा उत्तर है। जहाँ भी पान्डव रह रहें होगे। वहाँ निश्चित ही गौ वंश की संख्या में वृद्धि हुई होगी। वहाँ धी दूध की किसी तरह से कमी नहीं होगी। महाराज विराट भी गौ पालन तथा गौ संरक्षण के लिए बडे प्रसिद्ध थे। उनके यहाँ लाखों गायें थी। कौंरव इस बात को जानते थे। उन्हें पता चला कि गायें पहले से अधिक हैं। उन्होंने राजा विराट की गायों का हरण कर लिया। गायों की रक्षा के लिए महाराज विराट ने स्वयं युद्ध किया। परन्तु असफल रहे। अन्त में बृहन्नला बनकर विराट की सेवा कर रहे अर्जुन सामने आये और विराट को विजय श्री दिलाई।

शिव मन्दिर में दर्शन करते समय रास्ते में काले रंग की गाय दिखाई देने पर काल सर्प दोष से मुक्ति मिल जाती है। गलत सपना होने पर उसे गाय के कान पर कहने से सपने का कुप्रभाव समाप्त हो जाता है। गाय के खुरों की धूल को माथे पर लगाने से अकाल मृत्यु से रक्षा होती है। गाय की परिक्रमा करने से सम्पूर्ण तीर्थ के महात्म्य का फल मिल जाता है। गाय का पूजन करने से सम्पूर्ण मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। घर में ऐश्वर्य सुख समृद्धि के लिए गाय का होना बहुत ही शुभकारी माना जाता है। यदि किसी की संतान नहीं हो रही है तो गाय को चारा खिलाने से संतान की प्राप्ति हो जाती है।

भविष्य पुराण में कहा गया है कि गाय के सींगों में तीनों लोकों के सभी देवता निवास करते हैं। सृष्टि के रचनाकार ब्रह्मा और पालनकर्ता विष्णु गाय के सींगों के निचले हिस्से में विराजमान हैं तो गाय के मध्य भाग में शिव शंकर विराजते हैं। गाय के ललाट में गौरा मां तथा नासिका के भाग में भगवान कार्तिकेय निवास करते हैं। गाय जहां भी बैठती हैं, उसके आसपास के सारे पाप समाप्त हो जाते हैं। कहा जाता है कि गाय अपनी गहरी सांस के द्वारा पापों का क्षय कर देती है। गाय के गौबर (उपलो) से यज्ञ करने पर आस पास का वातावरण शुद्ध हो जाता है। गाय के गौ मुत्र में रोगाणुओं से लड़ने की क्षमता निहित रहती है। इससे अनेक प्रकार की दवाईया बनाई जाती हैं।

इस तरह से शास्त्र सिद्ध करते हैं कि प्राचीन भारत गायों से भरा हुआ था। तब गायों की गिनती कर पाना संभव नहीं था। जन सामान्य तो दूर स्वयं राजा, राजकुमार, दरबारी, गुरु, आचार्य सभी गायों का संरक्षण करनें में अपना सौभाग्य समझते थे। इन तथ्यों से स्पष्ट होता है कि  भारत में गाय से बढकर किसी अन्य की प्रतिष्ठा नहीं थी।

लेखक: अखिलेश चन्द्र चमोला, स्वर्ण पदक विजेता, राज्यपाल पुरस्कार तथा अनेकों राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित।

उत्तराखंड में आज फिर सामने आये 07 कोरोना पॉजिटिव, 153 पहुंची संक्रमितों की संख्या

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Coronavirus : उत्तराखंड में शुक्रवार को फिर कोरोना संक्रमण के 07 नए मामले सामने आये हैं। जिसके बाद अब राज्य में कुल कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 153 पहुँच गई है। हालाँकि इनमे से अब तक 56 मरीज ठीक हो चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आज (शुक्रवार) दोपहर में जारी हेल्थ बुलेटिन में 05 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। जिनमें से 03 मरीज देहरादून के तथा 02 मरीज उधम सिंह नगर जिले के है। जबकि रात को जारी हेल्थ बुलेटिन में 02 और लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। दोनों ही युवक हरिद्वार जिले के रहने वाले हैं। जिसके बाद अब राज्य में कुल कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 153 पहुँच गई है। वहीँ अब तक 56 मरीज ठीक हो चुके हैं।

 

10 साल तक के बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई पर लगाई जाए रोक

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10 साल तक के बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई पर लगाई जाए रोक

ग्रेटर नोएडा : कोरोना संकट काल में लॉकडाउन के दौरान बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए निजी स्कूलों द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है। गर्मियों की छुट्टी का भारी भरकम होम वर्क भी ऑनलाइन भेज दिया है। इस बीच ऑनलाइन पढ़ाई का मासूम बच्चों पर बुरा असर पड़ने की शिकायतें मिलने पर महिला उन्नति संस्था ने ऑनलाइन पढ़ाई पर रोक लगाने की मांग की है। संस्था की ओर से इससे संबंधित पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखा है। संस्था के संस्थापक डॉ. राहुल वर्मा ने बताया कि ऑनलाइन क्लास लेने के कारण 10 साल तक के बच्चों की आंखों पर असर पड़ रहा है। कई अभिभावकों ने फोन पर जानकारी दी है कि ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों की आंखों से पानी आने और दर्द की शिकायत हो रही है। पढ़ाई के नये स्वरूप से बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। जिन अभिभावकों के पास कम्प्यूटर या लैपटॉप नहीं है, उनके बच्चों को मोबाइल लेकर बैठना पड़ रहा है। कई घंटे तक मोबाइल से पढ़ाई करने पर आंख के साथ सिर में भी दर्द की शिकायत हो रही है। नौनिहालों पर पड़ रहे असर को देखते हुए मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेश के सभी स्कूलों में 10 साल तक के बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई न कराए जाने का दिशा निर्देश दिया जाए। ऑनलाइन पढ़ाई का कोई विशेष फायदा नहीं हो रहा है। बच्चों के साथ- साथ अभिभावकों को भी दिक्कत हो रही है। बता दें कि लॉकडाउन के दौरान तीन माह की फीस माफ किए जाने की मांग को लेकर भी सोशल मीडिया पर मुहिम चल रही है।