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उत्तराखंड : चलती कार के सामने अचानक आया गुलदार, अनियंत्रित होकर खाई में गिरी कार, चालक समेत तीन लोग घायल

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Guldar came in front of car

Uttarakhand News: उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में गुलदार अब शिकार के लिए जंगलों को छोड़कर सड़कों और रिहायशी इलाकों में घूमते नजर आते हैं। जिसके चलते आये दिन गुलदार के हमले कि घटनायें सुनाई देती हैं। ऐसे ही एक मामला बागेश्वर जनपद के कांडा थाना क्षेत्र का है, जहाँ  गुलदार के अचनाक सड़क पर आने से एक कार अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। जिसके कारण चालक समेत कार में सवार तीन लोग घायल हो गए। उन्हें 108 के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया गया है। जिसके बाद क्षेत्र के लोगों ने वन विभाग से गुलदार के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।

घटना कांडा थाना अंतर्गत कांडा-जेठाई मोटर मार्ग की है। कांडा से गुरना की तरफ जा रही कार संख्या यूके- 02 4871 के सामने अचनाक गुलदार धमक गया। जिसके कारण चालक कार से नियंत्रण खो बैठा और उसकी कर 20 मीटर नीचे खाई में गिर गई। घटना में कार चालक विजय कार्की के अलावा तीन लोग सवार थे। स्थानीय लोग बड़ी संख्या में वहां पहुंच गए। पुलिस को भी सूचना दी गई। जिसके बाद घायलों को खाई से बाहर निकाला गया। उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कांडा में भर्ती किया गया है। जहां उनका उपचार चल रहा है। थानाध्यक्ष खुशवंत सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में लम्बे समय से गुलदार का आतंक बना हुआ है।  इस बारे में कई बार वन विभाग को अवगत कराया गया है। लेकिन वन विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। अब तक कई बार गुलदार कई मवेशियों को शिकार बना चुका है। उन्होंने वन विभाग से गुलदार के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।

देश में फिर कोरोना देने लगा टेंशन, 24 घंटे में 1249 मामले आए सामने, एक्टिव केस भी बढ़े

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देश में एक बार फिर कोरोना की रफ्तार बढ़ने लगी है। पिछले 24 घंटे में देश भर में 1249 मामले सामने आए हैं। वहीं एक्टिव केसों की संख्या बढ़कर 7927 हो गई है। राजधानी दिल्ली में सबसे अधिक कोरोना के मरीज ज्यादा मिल रहे हैं। इसकी चपेट में आने से एक की मौत हो चुकी है।‌ पांच महीने बाद कोरोना के एक्टिव केसों में बड़ा उछाल देखा गया है।

कोरोना पाजिटिव रेट 5 प्रतिशत से पार चला गया है। ऐसे में डाक्टरों ने भी सतर्क रहने की सलाह दी है। इसी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 दिन पहले स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक भी की। वहीं दिल्ली नगर निगम ने इन्फ्लूएंजा और कोरोना के केसों में वृद्धि को देखते हुए अस्पतालों को बुखार के मरीजों की जांच सुनिश्चित करने और आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने की सलाह दी। एमसीडी की ओर से अस्पतालों को वेंटिलेटर और अन्य उपकरण ठीक से काम करें, यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है। भारत में एक्टिव केस 7,927 हो गए हैं। पिछले 24 घंटे में 1249 केस सामने आए हैं। जबकि 925 लोग ठीक हो चुके हैं।

डेली पॉजिटिविटी रेट 1.19% हो गया है। रिकवरी रेट 98.79% है। सबसे ज्यादा केस महाराष्ट्र में मिले हैं। यहां 198 केस मिले हैं। जबकि 229 लोग ठीक हुए हैं। हालांकि, कोरोना से किसी की जान नहीं गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, डेली पॉजिटिव रेट इस समय 1.09 फीसदी तो वीकली पॉजिटिव रेट 0.98 प्रतिशत है। कोरोना से ठीक होने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है।

देश में अब रिकवरी रेट बढ़कर 98.79 फीसदी पहुंच गया है। जबकि मृत्यु दर 1.19 फीसदी पर बरकरार है। वहीं सक्रिय मामलों में कुल संक्रमणों का 0.01 प्रतिशत शामिल है। मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक करीब कोविड-19 रोधी टीकों की 220.65 करोड़ खुराक दी जा चुकी है।

केन्द्र सरकार ने उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने की दी मंजूरी, जानें शिफ्टिंग की वजह

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Nainital-High-Court

High Court shift from Nainital to Haldwani : केन्द्र सरकार ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने पर सैद्धांतिक सहमति दी है। इस संबंध में केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरन रिजिजु ने पत्र लिखकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जानकारी दी है।

अपने पत्र में केन्द्रीय मंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा हल्द्वानी में उच्च न्यायलय के लिए आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करा दिए जाने पर केन्द्र सरकार उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने की अधिसूचना की प्रक्रिया प्रारंभ कर देगी।

केंद्र से उच्च न्यायालय को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने के लिए सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद अब जल्द ही इसकी प्रकिया शुरू की जाएगी। बता दें नैनीताल की भौगौलिक परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट किया जा रहा है। नैनीताल में सालभर प्राकृतिक आपदा, लैंडस्लाइड की स्थिति बनी रहती है। शहर में पर्यटकों की भारी आवाजाही से फैली अव्यवस्थाओं की वजह से भी हाईकोर्ट शिफ्ट किया जा रहा है।

नैनीताल हाईकोर्ट में जजों की पीठ बढ़ने के कारण भी इसे शिफ्ट करने का फैसला लिया गया है। पहले नैनीताल हाईकोर्ट में 5 जजों की पीठ थी, जो अब बढकर 11 जजों की होने वाली है। उसके अनुसार भारी इंफ्रास्ट्रक्चर की नैनीताल में कमी है। जिसके कारण भी इसकी शिफ्टिंग की जा रही है। सर्दी और बरसात के समय में नैनीताल में आवाजाही की भारी दिक्कत होती है। पर्यटन नगरी की वजह से आए दिन कोर्ट रोड पर लंबा जाम लगता है। बर्फबारी के दिनों में भी यहां परेशानियां बढ़ जाती हैं। इन सब परेशानियों को ध्यान में रखते हुए नैनीताल हाईकोर्ट को शिफ्ट किया जा रहा है। इसके लिए हल्द्वानी के गौलापार का चुनाव किया गया है। अब केंद्र सरकार ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने के लिए सैद्धांतिक सहमति दे दी है।

देहरादून : मुख्यमंत्री आवास परिसर में 22 दिनों के अन्तराल में 40 किलो शहद का उत्पादन

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40 kg honey in CM housing complex

देहरादून : मुख्यमंत्री आवास परिसर में शुक्रवार को शहद प्रसंस्करण का कार्य किया गया। मुख्यमंत्री आवास परिसर में 22 दिनों के अन्तराल में लगभग 40 किग्रा शहद का उत्पादन हुआ। मुख्यमंत्री ने उद्यान विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि मौनपालन को आम जनमानस तक पहुँचाने के लिए विभाग द्वारा आवश्यक कदम उठाये जाएं। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में मौन पालन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयासों की जरूरत है।

राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड के सदस्य अजय सैनी ने मौन पालन के सम्बन्ध में जानकारी दी। उद्यान प्रभारी दीपक पुरोहित ने शहद प्रसंस्करण की जानकारी दी।

सीएम धामी ने प्रदेश के इन खिलाड़ियों को खेल रत्न और प्रशिक्षकों को द्रोणाचार्य अवार्ड से सहित राष्ट्रीय स्तर के 168 पदक विजेता खिलाड़ियों एवं 42 प्रशिक्षकों को किया सम्मानित

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Uttarakhand Khel Ratna Award :  उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को देहरादून स्थित नवीन बहुद्देशीय क्रीड़ा भवन, परेड ग्राउण्ड में खेल विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में वर्ष 2019-20 के लिए बैडमिन्टन खिलाड़ी लक्ष्य सेन, वर्ष 2020-21 के लिए एथलेटिक्स खिलाड़ी चन्दन सिंह को देवभूमि उत्तराखण्ड खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया।

इसके साथ ही देवभूमि उत्तराखण्ड द्रोणाचार्य पुरस्कार वर्ष 2019-20 के लिए बैडमिन्टन प्रशिक्षक धीरेन्द्र कुमार सेन, वर्ष 2020-21 के लिए ताईक्वांडो प्रशिक्षक कमलेश कुमार तिवारी, एवं वर्ष 2021- 22 के लिए तीरंदाजी प्रशिक्षक संदीप कुमार डुकलान को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

वहीँ खेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिए जाने पर लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार वर्ष 2021-22 से एथलेटिक्स खिलाड़ी सुरेश चन्द्र पाण्डे को सम्मानित किया।

इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा वर्ष 2021 एवं 2022 के राष्ट्रीय स्तर के 168 पदक विजेता खिलाड़ियों एवं 42 प्रशिक्षकों को नकद पुरस्कार से सम्मानित किया। खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को कुल 2.08 करोड़ रूपये की धनराशि वितरित की गई।

इन्हें मिलेगा पुरस्कार

देवभूमि उत्तराखण्ड खेल रत्न पुरस्कार

  • वर्ष 2019-20 के लिए बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन
  • वर्ष 2020-21 के लिए एथलेटिक्स चन्दन सिंह

देवभूमि उत्तराखण्ड द्रोणाचार्य पुरस्कार

  • वर्ष 2019-20 के लिए बैडमिंटन प्रशिक्षक धीरेन्द्र कुमार सेन
  • वर्ष 2020-21 के लिए ताईक्वांडो प्रशिक्षक कमलेश कुमार तिवारी
  • वर्ष 2021-22 के लिए तीरंदाजी प्रशिक्षक संदीप कुमार डुकलान

लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

वर्ष 2021-22 का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार सुरेश चन्द्र पांडे को एथलेटिक्स खेल में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाएगा।

इन खिलाड़ियों को किया पुरस्कृत

उत्तराखंड में खिलाड़ियों के सम्मान समारोह में एथलेटिक्स में 19 राष्ट्रीय खिलाड़ियों को नकद धनराशि से पुरस्कृत किया। पायल को आठ लाख और मानसी नेगी को नौ लाख का चेक दिया गया। अंकिता को साढ़े सात लाख व सूरज पंवार को छह लाख का चेक दिया गया।

अंकिता, मानसी नेगी, सूरज पंवार, अनु कुमार व रेशमा पटेल के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर बैंगलुरू में होने की वजह से इनका पुरस्कार एक्सीलेंस सेंटर देहरादून के छात्र-छात्राओं ने प्राप्त किया। समारोह में रेखा सिंह को चार लाख 50 हजार, रेशमा पटेल को चार लाख, विकास शर्मा को एक लाख का चेक दिया गया। इसके अलावा सोनिया, गौरी कोठियाल, सूरज पंवार, सचिन सिंह बोरा, रमनीत कौर, माया कुमारी, परमजीत बिष्ट, अनु कुमार, आदित्य नेगी, अंशुल ढोंडियाल, चंदन सिंह और प्रियांशु को सम्मानित किया गया।

बॉक्सिंग में इनका हुआ सम्मान

बॉक्सिंग में पवन गुरुंग, मोहिनी राणा, अमन, संजय कुमार, रचित सिंह रावत, दीपक धामी, निकिता चंद, कोमल मेहता, भूमिका महर, दिव्यांशु बिष्ट, शोभा कोहली, विश्वास मेहरा, योगेश पंवार, बृजेश टम्टा, आरती धारियाल, गायत्री कसन्याल, सोहिल राणा, माही बिष्ट, अनुज सिंह महर, सक्षम चंद, नेहा वल्दिया, कोमल नगरकोटी, अर्षित कुमार को पुरस्कृत किया गया।

इन खेलों के खिलाड़ी भी हुए पुरस्कृत

खिलाड़ियों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री और खेल मंत्री ने बैडमिंटन, कबड्डी, शूटिंग, कुश्ती, जूडो, रोइंंग, फेंसिंग, स्कीइंग, पैरा खेल, क्याकिंग एंड कैनाइंग, क्रिकेट, आर्चरी, स्केटिंग के खिलाड़ियों को भी पुरस्कृत किया।

राजेंद्र तिवारी को मिली बड़ी जिम्मेदारी, भाजपा किसान मोर्चा के कुमाऊं मंडल संयोजक एवं उधम सिंह नगर जिला प्रभारी बने

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Rajendra Tiwari Kumaon convenor in Kisan Morcha

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं कृषि व्यवसाय से जुड़े राजेंद्र तिवारी को भारतीय जनता पार्टी संगठन ने भाजपा किसान मोर्चा का कुमाऊं मंडल संयोजक एवं उधम सिंह नगर जिला प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी है। भारतीय जनता पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता के रूप में पहचाने जाने वाले राजेंद्र तिवारी बचपन से ही भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं। इसके साथ ही वह संघ के कार्यों में भी सहयोग प्रदान करते हैं। मूल रूप से गौलापार निवासी तिवारी कृषि कार्य करने के साथ ही मंडी व्यवसाई भी हैं और वह लंबे समय से किसानों की समस्याओं और अधिकारियों के लिए संघर्षरत रहे हैं। क्षेत्र की समस्याओं को वह समय-समय पर उठाते रहते हैं तथा उसके निदान के लिए हर संभव प्रयास करते हैं।

राजेंद्र तिवारी की राजनीतिक शुरुआत 1996 से शुरू हुई। शुरुआती दौर में वह आरएसएस से जुड़े और 1996 में उन्होंने प्राथमिक वर्ग तथा 1998 में प्रथम वर्ग शिविर पूर्ण करने के साथ ही न्याय पंचायत क्षेत्र से युवा मोर्चा की राजनीति शुरू की। युवा मोर्चा के विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्होंने जिला सह संयोजक युवा मोर्चा के पद पर कार्य करते हुए विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ भी जुड़कर कार्य किया। वह आलू, फल आढ़ती एसोसिएशन के सदस्य तथा व्यापार मंडल के भी पदाधिकारी रहे। इससे पूर्व भी वह किसान मोर्चा के पदाधिकारी दे चुके हैं।

संगठन द्वारा उन्हें दी गई इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से गौलापार सहित विधानसभा क्षेत्र में खुशी का माहौल है। तथा क्षेत्र के अनेक किसान नेताओं ने उन्हें उनके घर जाकर बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की। प्रदेश प्रवक्ता हेमंत द्विवेदी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष आनंद सिंह दर्मवाल, क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों त्रिलोक सिंह नौला, महिपाल सिंह सम्मल, किशोर चुफाल, चंदन राणा, बिशन सिंह रावत, अर्जुन रावत, तारा तिवारी,  अर्जुन सिंह बिष्ट, हरेंद्र सिंह बिष्ट सहित किसान सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह बिष्ट ने उन्हें हार्दिक बधाई दी।

राजेंद्र तिवारी ने कहा कि प्रदेश नेतृत्व एवं जिला संगठन ने मुझ पर जो विश्वास जताया है उसके लिए मैं हृदय से आभारी हूं। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय राज्यमंत्री अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, जिला अध्यक्ष प्रताप बिष्ट, जोगेंद्र पुंडीर प्रदेश अध्यक्ष किसान मोर्चा, विधायक बंशीधर भगत सहित सभी जेष्ठ श्रेष्ठ कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।

प्रदेश के प्रगतिशील जैविक किसान नरेंद्र सिंह मेहरा ने उनकी इस नियुक्ति को सही ठहराते हुए कहा कि राजेंद्र तिवारी के इस नियुक्ति से मंडल भर के किसानों को समस्याओं के समाधान लाभ मिलेगा।

पुरानी पेंशन बहाली सँयुक्त मोर्चा उत्तराखंड के पदाधिकारियों की ओपीएस को लेकर ऑनलाइन बैठक सम्पन्न

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Old Pension Restoration: राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली सँयुक्त मोर्चा उत्तराखंड के पदाधिकारियों ने ऑनलाइन बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में हाल में ही नागपुर महाराष्ट्र में कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली हेतु हड़ताल में सम्मिलित हुए मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीपी सिंह रावत ने कहा कि राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा की मुहिम पूरे देश में रंग ला रही है। मोर्चा के तत्वाधान में पूरे देश में पुरानी पेंशन बहाली की मांग जोर शोर से चल रही है। जिसका रंग आज देश की संसद में भी देखनो को मिला, उन्होंने कहा मोर्चे के दबाव से आज केंद्र सरकार भी पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे को तवज्जो दे रही है।

मोर्चे के प्रदेश प्रभारी विक्रम सिंह रावत ने कहा कि मोर्चा लगातार पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को नई पेंशन योजना में संसोधन नही चाहिए, उन्हें हूबहू पुरानी पेंशन चाहिए। मोर्चे के प्रांतीय महासचिव सीताराम पोखरियाल ने कहा कि हाल ही में गैरसैंण विधानसभा घेराव कर कर्मचारियों ने साबित किया है कि उत्तराखंड का कार्मिक हर हाल में पुरानी पेंशन बहाली चाहता है।

यह निराशाजनक है कि उत्तराखंड सरकार ने पुरानी पेंशन बहाली की ओर गंभीरता नही दिखाई। लेकिन मोर्चे का प्रयास निरन्तर जारी रहेगा। मोर्चे के प्रांतीय आई टी सेल प्रमुख अवधेश सेमवाल ने कहा कि मोर्चा लगतार पुरानी पेंशन बहाली के लिए प्रयासरत है। आने वाले माह अप्रैल में भी बड़े कार्यक्रमों के माध्यम से पुरानी पेंशन बहाली की आवाज बुलंद की जाएगी। मोर्चे के गढ़वाल मंडल अध्यक्ष पूरण फर्स्वाण ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली हेतु संगठन विस्तार भी किया जा रहा है। जिस निम्मित जसपाल गुसाईं को गढ़वाल मंडल समन्वयक, हिमांशु जगूड़ी को गढ़वाल मंडल उपाध्यक्ष एवं राजीव उनियाल को टिहरी जनपद के जिलाध्यक्ष हाल ही में नियुक्त किया गया है।

मोर्चे के गढ़वाल मंडल महासचिव नरेश भट्ट ने कहा कि मोर्चे का एक मात्र उद्देश्य  पुरानी पेंशन बहाली है। जिस निम्मित 1 मई 2023 को संसद मार्च किया जाएगा। जिसमे उत्तराखंड के कार्मिक बड़ी संख्या में प्रतिभाग करेंगे। मोर्चे की गढ़वाल मंडल महिला उपाध्यक्ष रश्मि गौड़ में कहा कि मोर्चे के संघर्षों की बदौलत आज पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दा पूरे देश मे छाया हुआ है। मोर्चे के कुमाऊँ मण्डल प्रभारी अन्नू पुजारी ने कहा गढ़वाल मंडल के साथ कुमाऊँ मण्डल में भी पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा ज्वलन्त है , हम हर हाल में पुरानी पेंशन बहाली चाहते हैं। बैठक में रणबीर सिन्धवाल, जसपाल गुसाईं, राजीव उनियाल, सतीश कुमार, अंकित रौथाण, शंकर भट्ट, प्रवीण घिल्डियाल, राकेश रावत, अजीत नेगी, माखन लाल शाह, दीप जोशी, मुरली मनोहर भट्ट, ज्योति नौटियाल, शशि चौधरी, लक्ष्मी नेगी आदि मौजूद रहे।

उत्तराखंड में गर्भवती महिलाओं को शीघ्र ही मिलेगी बर्थ वेटिंग होम की सुविधा : डॉ. आर राजेश कुमार

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national health mission

देहरादून : प्रदेश को शीघ्र ही मिलेंगे गर्भवती महिलाओं को बर्थ वेंटिग होम की सुविधा यह बात डॉ. आर राजेश कुमार सचिव स्वास्थ्य व मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) उत्तराखंड की बैठक में निर्णय लिया गया।

डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को प्रसव की संभावित तिथि से पूर्व बर्थ वेंटिग होम में राज्य के समस्त 13 जनपदों में स्थापित वन स्टॉप सेंटर एवं वर्किंग वुमेन हॉस्टल में रखे जाने हेतु प्रस्ताव को भारत सरकार ने मंजूरी दे दी है। योजना के तहत दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को चिकित्सकीय देखभाल समय पर प्राप्त होगी व प्रसव से पूर्व गर्भवती महिलाओं को सहूलियत होगी। साथ ही होम डिलीवरी को संस्थागत प्रसव में प्रोत्साहित करने हेतु प्रदेश के पहाड़ी जनपदों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में बर्थ वेंटिंग होम में उपयोग किये जाने हेतु भारत सरकार ने मंजूरी दी है। यह कदम मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि बजट में जनपद देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, उधमसिंह नगर, नैनीताल को मोबाइल टीबी वैन एवं ट्रूनेट मशीन की सुविधा हेतु स्वीकृति प्रदान की गई है व जनपद अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी, उत्तरकाशी को मोबाइल एक्स-रे के साथ मोबाइल मेडिकल यूनिट में सहमति बनी है जिससे टी.बी के मरीजों की स्क्रीनिंग करने में आसानी होगी। टी.बी. से ग्रसित मरीज एवं उनके परिवार जन के एक्स-रे के लिए निःशुल्क आवागमन की सुविधा हेतु भारत सरकार द्वारा स्वीकृति भी दी गई है।

1 माह से 05 वर्ष तक की आयु के बच्चों में कुपोषण की समस्या को कम करने के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र (एन.आर.सी.) पिथौरागढ़ को स्वीकृति प्रदान की गई है जिसके अंतर्गत कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों को भर्ती कर मानदंडों के अनुसार चिकित्सा और पोषण चिकित्सीय देखभाल प्रदान की जाएगी।

सचिव द्वारा बताया गया कि प्रदेश को मोतियाबिंद बैकलॉग मुक्त बनाने के लिए मोतियाबिंद की स्क्रीनिंग हेतु टिहरी एवं पिथौरागढ़ जनपदों को मोबाइल वैन की सुविधा उपलब्ध कराये जाने की स्वीकृति मिली है। इसके साथ ही उप जिला चिकित्सालय मसूरी में नेत्र सर्जरी हेतु स्वीकृति प्रदान की गई है।

डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों के लिए टेलीमेडिसिन सेवा लोगों के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण है। इसके महत्त्व को देखते हुए भारत सरकार को प्रस्तवा भेजा गया था जिसको मंजूरी मिल चुकी है। इसमें अब चिकित्सक अपने ड्यूटी के बाद दोपहर 3 बजे से साय 6 बजे तक टेली कंसल्टेशन के माध्य्म से जनमानस को सुझाव परामर्श देगें जिस हेतु चिकित्सकों को प्रत्येक रोगी देखने पर 150 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

इसके अलावा ऐ.एन.एम. एवं कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स को बेसिक लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण दिए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। चमोली जनपद में पूर्व से ही मौजूदा बिल्डिंग में एन.एच.एम. ऑफिस एवं प्रशिक्षण हॉल की स्वीकृति दी गई है।

इसके अतिरिक्त सरकारी अस्पताल में लम्बी कतार के बेहतर प्रबंधन हेतु 14 अस्पतालों में टोकन की सुविधा की स्वीकृति भी दी गई है। राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, भूपतवाला में 100 प्रतिशत रिक्त पदों की भर्तियों की स्वीकृति भी पारित हुई है।

क्या राहुल गांधी नहीं लड़ पाएंगे 2024 और 2029 का लोकसभा चुनाव?, जिस अध्यादेश को 10 साल पहले फाड़ा था वही पड़ा उल्टा, कांग्रेस में मंथन शुरू

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Will Rahul Gandhi not be able to contest the 2024 and 2029 Lok Sabha elections?

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी 4 साल पहले साल 2019 में जब कर्नाटक में मोदी सरनेम को लेकर जब बयान दे रहे थे, तब उन्होंने सोचा भी नहीं होगा यह उनकी सियासत में इस कदर भारी पड़ जाएगा कि कोर्ट 2 साल की सजा सुना देगी और लोकसभा की सदस्यता भी चली जाएगी। यह दोनों घटनाएं राहुल गांधी के साथ 24 घंटे के अंदर हुई। एक दिन पहले यानी गुरुवार को गुजरात की सूरत सेशन कोर्ट ने राहुल गांधी को मोदी सरनेम को लेकर की गई टिप्पणी के मामले में 2 साल की सजा सुनाई। कोर्ट के इस फैसले के बाद अभी कांग्रेस हाईकमान इस पर मंथन ही कर रहा था कि अचानक शुक्रवार को लोकसभा सचिवालय ने राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद कर दी है।

अब आखिरी विकल्प कानूनी रास्ता अपनाने का कोर्ट के आदेश के बाद इस बात को लेकर बहस छिड़ गई थी कि क्या कांग्रेस नेता की लोकसभा सदस्यता चली जाएगी। कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने कहा था है कि वायनाड के सांसद दोषी ठहराए जाने के साथ ही स्वत ही अयोग्य साबित हो गए हैं। कुछ विशेषज्ञों ने कहा था कि वह अपनी अयोग्यता को चुनौती दे सकते हैं। हालांकि, आज लोकसभा सचिवालय ने पुष्टि की कि राहुल गांधी को संसद से अयोग्य घोषित कर दिया गया है। अब राहुल के सामने आखिरी विकल्प कानूनी रास्ता अपनाने का ही रह गया है। इसकी तैयारी भी उनकी कानूनी टीम ने शुरू कर दी है। हालांकि इस मामले में राहुल सेशन कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं, पर वहां से राहत न मिलने पर राहुल अगले 8 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इनमें 2024 ओर 2029 के लोकसभा चुनाव शामिल हैं।

आज आए इस फैसले की वजह राहुल खुद ही हैं।‌ लोकसभा सचिवालय के अयोग्य ठहराया जाने के 3 घंटे के बाद राहुल ने ट्वीट कर लिखा, ‘मैं भारत की आवाज के लिए लड़ रहा हूं, मैं हर कीमत चुकाने को तैयार हूं। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा भाजपा ने राहुल को अयोग्य घोषित करने के लिए सभी तरीके आजमाए। जो सच बोल रहे हैं उन्हें वो पसंद नहीं करते, लेकिन हम सच बोलते रहेंगे। हम जेपीसी की मांग जारी रखेंगे, जरूरत पड़ी तो लोकतंत्र बचाने के लिए जेल भी जाएंगे।

प्रियंका गांधी ने कहा कि डरी हुई सत्ता की पूरी मशीनरी साम, दाम, दंड, भेद लगाकर राहुल गांधी की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। मेरे भाई न कभी डरे हैं, न कभी डरेंगे। सच बोलते हुए जिये हैं, सच बोलते रहेंगे। देश के लोगों की आवाज उठाते रहेंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा हम राजनीतिक और कानूनी तौर पर यह लड़ाई लड़ेंगे। हमें चुप नहीं कराया जा सकता है, दबाया नहीं जा सकता। पीएम से जुड़े अडाणी के महाघोटाले पर जेपीसी बनाने की बजाय राहुल गांधी की सदस्यता रद की जा रही है। भारतीय लोकतंत्र का ओम शांति हो गया है।

राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता खत्म करना तानाशाही का एक और उदाहरण है। सीएम गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी देश की आवाज हैं जो इस तानाशाही के खिलाफ अब और मजबूत होगी। सीएम गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता खत्म करना तानाशाही का एक और उदाहरण है। बीजेपी ये ना भूले कि यही तरीका उन्होंने इंदिरा गांधी के खिलाफ भी अपनाया था और मुंह की खानी पड़ी। राहुल गांधी देश की आवाज हैं जो इस तानाशाही के खिलाफ अब और मजबूत होगी। कांग्रेस पार्टी की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अभिषेक सिंघवी ने कहा, सरकारी संस्थाओं का दमन हो रहा है। राहुल को सच बोलने की सजा मिली है। लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है।

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने ट्वीट कर कहा, ए तलवार तुझे झुकना होगा गर्दन ने बगावत कर दी है। राहुल गांधी को डराना आपके बस की बात नहीं है पीएम मोदी, अडानी को बचाने की सारी कोशिशें नाकाम होंगी। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, जिस दिन राहुल गांधी ने अडानी, पीएम के खिलाफ सवाल उठाए, राहुल गांधी को चुप कराने के लिए इस प्रकार की साजिश शुरू की गई। यह भाजपा सरकार के लोकतंत्र विरोधी, तानाशाही रवैये का स्पष्ट मामला है।

फिलहाल राजधानी दिल्ली में सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समेत तमाम विपक्षी नेता मंथन करने में लगे हुए हैं। ‌वहीं दूसरी और केरल के वायनाड में भी लोकसभा के उपचुनाव कराने को लेकर चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। राहुल गांधी साल 2019 में वायनाड से ही कांग्रेस की टिकट पर जीत कर सांसद बने थे।

10 साल पहले राहुल गांधी ने ऑर्डिनेंस नहीं फाड़ा होता तो बच जाती सांसदी

लोकसभा सचिवालय की ओर से आज राहुल गांधी को अयोग्य ठहराए जाने के बाद मनमोहन की सरकार में 10 साल पहले की घटना भी खूब ट्रेंड हो रही है। आज मीडिया और सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के ऑर्डिनेंस फाड़ने की खबरें भी सुर्खियों में है।‌ बता दें कि 2019 मानहानि मामले में दोषी पाया जाना तो राहुल की सांसदी रद होने की वजह बनी ही, पर यह बच भी सकती थी अगर राहुल ने 10 साल पहले इस मामले से जुड़ा ऑर्डिनेंस फाड़ा नहीं होता। दरअसल 2013 में मनमोहन सिंह के देश के प्रधानमंत्री रहते यूपीए सरकार ने एक ऑर्डिनेंस पेश किया गया था। इस ऑर्डिनेंस के अनुसार दागी नेता यानी कि ऐसे नेता जिन्हें कोर्ट से दो साल या उससे ज्यादा की सजा मिली हो, उनकी विधायकी या सांसदी रद नहीं की जानी चाहिए। पर राहुल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस ऑर्डिनेंस को बकवास बताते हुए इसकी एक कॉपी को फाड़ दिया था। इतना ही नहीं, राहुल ने मनमोहन को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने तक की बात कर दी थी। मनमोहन उस समय अमरीका दौरे ओर थे। सितंबर, 2013 में राहुल ने इस ऑर्डिनेंस की कॉपी को फाड़ा था। इसके बाद अक्टूबर, 2013 में यूपीए सरकार ने इस ऑर्डिनेंस को वापस ले लिया था। ऐसे में आज राहुल की सांसदी रद होने पर करीब 10 साल पहले उनका इस विषय में फाड़े गए ऑर्डिनेंस मामला फिर से ताज़ा हो गया। क्योंकि अगर राहुल ने 10 साल पहले यूपीए सरकार के ऑर्डिनेंस को नहीं फाड़ा होता, तो आज उनकी लोकसभा सांसद के तौर पर सदस्यता बरकरार रहती।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, राहुल गांधी को आपराधिक मानहानि के मामले में गुजरात की एक अदालत ने दो साल के कारावास की सजा सुनाई है, जिसके बाद से उनकी लोकसभा सदस्यता पर खतरा मंडराने लगा था। वैसे तो अदालत ने सजा सुनाने के बाद ही उनकी सजा निलंबित कर दी थी और उन्हें जमानत देते हुए अपील के लिए 30 दिन का समय भी दिया है, लेकिन इससे उन्हें बहुत राहत मिलती नहीं दिख रही है। राहुल को अब अपनी संसद सदस्यता बचाने के लिए अपनी अपील में पूरे केस को गलत साबित कर स्वयं को निर्दोष साबित करना होगा या फिर शिकायतकर्ता से समझौता करना होगा।

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

राहुल गांधी ने 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान 13 अप्रैल को कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी रैली को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने कहा था, ”नीरव मोदी, ललित मोदी और नरेन्द्र मोदी का सरनेम कॉमन क्यों है? सभी चोरों का सरनेम मोदी ही क्यों होता है? राहुल के खिलाफ भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने धारा 499 और 500 के तहत मानहानि का केस दर्ज कराया था।

अब क्या विकल्प हैं राहुल गांधी के पास?

राहुल गांधी की संसद सदस्यता बचाने के सभी रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं। उनके पास हाईकोर्ट में जाने का विकल्प है। अगर हाईकोर्ट सूरत सेशन कोर्ट के फैसले पर स्टे लगा देता है तो उनकी सदस्यता बच सकती है। वहीं, अगर हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलती है तो राहुल सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। शीर्ष अदालत अगर फैसले पर स्टे लगा देता है तो उनकी सदस्यता बच जाएगी। अगर उन्हें राहत नहीं मिलती है तो वे आठ साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

क्या था सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्क्रिय करने वाला अध्यादेश?

सितंबर 2013 में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने अध्यादेश पारित कर सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को निष्क्रिय किया था, जिसमें कहा गया था कि सांसदों और विधायकों के दोषी पाए जाने पर उनकी सदस्यता रद्द कर दी जाएगी। फैसले के खिलाफ अध्यादेश पारित भी हो गया था और उस वक्त भाजपा, वामदल समेत कई विपक्षी पार्टियों ने इसका विरोध भी किया था। विपक्षी पार्टियों के हंगामे के बाद कांग्रेस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अध्यादेश की अच्छाइयों को जनता के सामने रखने की कोशिश की थी, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच में राहुल गांधी पहुंचे और खुद की ही सरकार पर सवाल खड़े करने लगे। इस दौरान उन्होंने अध्यादेश को बकवास बताया था और अध्यादेश की कॉपी को फाड़ दिया था। और इस तरह राहुल गांधी के दखल के बाद यूपीए सरकार ने इस अध्यादेश को वापस ले लिया गया था. अगर उस समय इस अध्यादेश को वापस नहीं लिया जाता, तो शायद आज राहुल गाँधी के साथ ये स्थिति नहीं होती।

उस वक्त राहुल गांधी ने कहा था कि राजनीतिक दलों की वजह से हमें इसे लाने की आवश्यकता है। हर कोई यही करता है, लेकिन यह सब बंद होना चाहिए। अगर हम देश में भ्रष्टाचार से लड़ना चाहते हैं, तो ऐसे सभी छोटे समझौते बंद करने पड़ेंगे। साथ ही उन्होंने सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश को गलत बताया था।

शंभू नाथ गौतम

देवप्रयाग महाविद्यालय में गंगा स्वच्छता पखवाड़ा कार्यक्रम के तहत विभिन्न प्रतियोगितायें आयोजित

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DevPrayag: ओंकारानंद राजकीय महाविद्यालय देवप्रयाग टिहरी गढ़वाल में नमामि गंगे तथा आई.कयू .ए.सी.के तत्वावधान में गंगा स्वच्छता पखवाड़ा कार्यक्रम के तहत प्राचार्य प्रोफेसर प्रीति कुमारी की अध्यक्षता में निबन्ध लेखन प्रतियोगिता, सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता, स्लोगन लेखन प्रतियोगिता तथा रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की गई। इन प्रतियोगिताओं में निबन्ध लेखन में प्रथम स्थान -ऋषभ,  द्वितीय स्थान -अनामिका, तृतीय स्थान -अजय चौहान ने प्राप्त किया।

सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में संदीप खवास प्रथम, ऋषभ द्वितीय, अनूप भट्ट तृतीय स्थान पर रहे। स्लोगन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान -शिवानी सजवाण, द्वितीय स्थान -अरविंद तथा लक्ष्मी तृतीय स्थान पर रही। रंगोली प्रतियोगिता में समूह बी (शिवानी सजवाण, दिव्या, प्रियांशु प्रभात) प्रथम स्थान, समूह सी (अलीशा, रक्षा, नेहा) द्वितीय स्थान तथा समूह ए (साक्षी, शिवानी, ज्योति) तृतीय स्थान पर रहे।

निर्णायक मंडल की निबंध प्रतियोगिता में मुख्य भूमिका डा. एम.एन. नौडियाल, डा.रंजू उनियाल, डा.सृजना राणा की रही। सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में शीतल वालिया एवं डा. दिनेश नेगी की मुख्य भूमिका रही। रंगोली प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डा. अर्चना धपवाल, डा. लीना पुंडीर, प्रियंका की प्रमुख भूमिका रही। स्लोगन प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डा.सृजना राणा, डा. प्रतीक गोयल, डा. यतिन काला रहे।

प्रतियोगिता के सफल संचालन में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों, कर्मचारियों का महत्व पूर्ण योगदान रहा। प्रतियोगिता के समापन के अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य ने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताओं से छात्र छात्राओं में रचनात्मक क्षमता का विकास होता है तथा ऐसी प्रतियोगिताएं छात्र छात्राओं के व्यक्तित्व विकास में सहायक होती हैं।