Home उत्तराखण्ड श्रीनगर गढ़वाल निवासी वरिष्ठ समाजसेवी सत्यप्रकाश घिल्डियाल को राज्य स्तरीय सम्मान

श्रीनगर गढ़वाल निवासी वरिष्ठ समाजसेवी सत्यप्रकाश घिल्डियाल को राज्य स्तरीय सम्मान

Satyaprakash Ghildiyal honored at the state level

श्रीनगर गढ़वाल: समाज सेवा के क्षेत्र में लंबे समय से उल्लेखनीय योगदान देने वाले श्रीनगर गढ़वाल निवासी वरिष्ठ समाजसेवी सत्यप्रकाश घिल्डियाल को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर आज राज्य स्तरीय सम्मान से सम्मानित किया गया। 81 वर्षीय सत्यप्रकाश घिल्डियाल को यह सम्मान आज यानी एक अक्टूबर 2026 को हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला, देहरादून में अंतराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रदान किया गया। इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 23 वरिष्ठ नागरिकों, निबंध एवं पेंटिंग प्रतियोगिता में चयनित 05 छात्र/छात्राओं का पुरस्कार से सम्मानित किया। सत्यप्रकाश घिल्डियाल पौड़ी जनपद से चयनित एकमात्र वरिष्ठ नागरिक हैं।

डांग, श्रीनगर निवासी सत्यप्रकाश घिल्डियाल पिछले कई दशकों से सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अपना अधिकांश जीवन जरूरतमंद लोगों की सहायता, जनकल्याण और सामाजिक गतिविधियों के लिए समर्पित किया है। बढ़ती उम्र के बावजूद वे आज भी विभिन्न सामाजिक संगठनों के माध्यम से सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।

संघर्षों से भरा रहा शुरुआती जीवन

11 मई 1945 को पौड़ी गढ़वाल की पट्टी चलणस्यूं के कगड़ी गांव में जन्मे सत्यप्रकाश घिल्डियाल का बचपन आर्थिक और पारिवारिक चुनौतियों के बीच बीता। उनके पिता रैजानन्द घिल्डियाल वैद्य और पंडिताई का कार्य करते थे। मात्र दस वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियां उनके कंधों पर आ गईं। पढ़ाई के साथ खेती-किसानी का कार्य भी करना पड़ा।

इसी दौरान गांव में जहरीले जंगली मशरूम खाने से हुई दुखद घटना में उनके एक भाई सहित 13 ग्रामीणों की मृत्यु ने परिवार को गहरा आघात पहुंचाया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा जारी रखी। छात्रवृत्ति के माध्यम से श्रीनगर में अध्ययन किया तथा बाद में निजी विद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी की।

सेवा कार्यों को बनाया जीवन का उद्देश्य

सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने स्वयं को पूरी तरह समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। वे रोटरी क्लब श्रीनगर गढ़वाल, नारायण सेवा संस्थान उदयपुर, ऋषिकुल सेवा आश्रम बलोड़ी, देवकी देवी-रैजानन्द स्मृति संस्थान तथा अवकाश प्राप्त कर्मचारी संगठन सहित अनेक सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हैं। इसके साथ ही वे बदरीनाथ, केदारनाथ, पंचकेदार, अमरनाथ, मानसरोवर तथा भारत-नेपाल की यात्राएं भी कर चुके हैं।

माता की स्मृति में अस्पताल को दिया वार्ड

सत्यप्रकाश घिल्डियाल ने समाज सेवा को व्यवहारिक रूप देते हुए वर्ष 2003 में अपनी माता देवकी देवी के निधन के बाद राजकीय अस्पताल श्रीनगर में लगभग छह लाख रुपये की लागत से ‘देवकी घिल्डियाल वार्ड’ का निर्माण कराया। उन्होंने पारंपरिक कर्मकांडों के बजाय जनहित के कार्य को प्राथमिकता दी, जिसे क्षेत्र में सराहा गया।

मृत्यु के बाद भी सेवा का संकल्प

मानवता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का उदाहरण वर्ष 2007 में सामने आया, जब उन्होंने हिमालयन अस्पताल, जौलीग्रांट में मृत्यु के उपरांत देहदान का शपथ-पत्र भरकर समाज के सामने प्रेरणादायी मिसाल प्रस्तुत की।

राज्य स्तरीय सम्मान से सम्मानित होने पर सामाजिक संगठनों, रोटरी क्लब के सदस्यों, शुभचिंतकों और क्षेत्रवासियों ने उन्हें बधाई देते हुए इसे पूरे पौड़ी जनपद के लिए गौरव का विषय बताया।