लोनी 12 जुलाई: उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली द्वारा डीपीएमआई के अध्यक्ष डॉ. विनोद बछेती के संरक्षण में संचालित उत्तराखण्ड लोक-भाषा ग्रीष्मकालीन शिक्षण कक्षाओं का साप्ताहिक शिक्षण सत्र रविवार को अलकनंदा कॉलोनी, इलायचीपुर, राम पार्क विस्तार, लोनी स्थित केंद्र पर उत्साहपूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा, संस्कृति और उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं से जोड़ना रहा।
शिक्षण सत्र में 42 बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए गढ़वाली, कुमाऊँनी एवं जौनसारी लोक-भाषाओं की मूलभूत जानकारी प्राप्त की। बच्चों को उत्तराखंड के सभी जनपदों, प्रमुख नदियों तथा प्रकृति और लोकजीवन से जुड़े हरेला पर्व के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय महत्व से भी अवगत कराया गया। पूरे सत्र के दौरान बच्चों ने जिज्ञासा और उत्साह के साथ सहभागिता की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरीश रावत ने कहा कि जिस समाज की नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा और संस्कृति से जुड़ी रहती है, वही समाज अपनी पहचान और परंपराओं को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकता है। उन्होंने इस पहल को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
इस अवसर पर चंदन पाण्डे, कुलदीप गोसाई और महेंद्र गुसाईं ने भी बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि मातृभाषा का संरक्षण सामाजिक और सांस्कृतिक उत्तरदायित्व है तथा ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में अपनी जड़ों के प्रति आत्मीयता विकसित करते हैं।
कार्यक्रम के सफल संचालन में केंद्र प्रमुख मंजू उनियाल एवं पुष्पा सती के साथ सह मीडिया प्रभारी संगीता भट्ट तथा जगदम्बा कंडासी, सरिता रावत, कश्मीरा रावत, आशा बड़माल, हीरा पटवाल और कविता तिवारी का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के समापन पर बच्चों एवं उपस्थितजनों के लिए जलपान की व्यवस्था भी की गई।
मीडिया प्रभारी जयेंद्र नेगी ने कहा कि यह अभियान केवल लोक-भाषा सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का जन-जागरण अभियान है। उन्होंने उत्तराखंड के प्रवासी परिवारों से अपने बच्चों को मातृभाषा से जोड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ी पीढ़ी ही अपने इतिहास और विरासत को सुरक्षित रख सकती है।



