पौड़ी: देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में विवाह के मात्र आठ माह बाद एक शिक्षिका की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। मृतका के मायके पक्ष ने पति, सास, ननद सहित ससुराल पक्ष के अन्य लोगों पर दहेज उत्पीड़न एवं मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले में पहले पुलिस जांच कर रही थी, लेकिन अब प्रदेश सरकार ने इसकी जांच सीबीसीआईडी को सौंपने के निर्देश दिए हैं।
देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से निष्पक्ष जांच के लिए सीबीसीआईडी जांच कराने का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री ने प्रकरण को गंभीर मानते हुए सीबीसीआईडी जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
इस मामले पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, नीलकंठ खण्ड के खण्ड कार्यवाह अलकेश कुकरेती ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आज के शिक्षित और आधुनिक समाज में भी यदि बेटियां दहेज और मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो रही हैं, तो यह पूरे समाज के लिए चिंता और आत्ममंथन का विषय है।
उन्होंने कहा, “दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के अनुसार कठोर से कठोर सजा मिलनी चाहिए। बेटियों के सम्मान और सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
अलकेश कुकरेती ने समाज की सभी बहनों और बेटियों से भावुक अपील करते हुए कहा कि यदि कोई दहेज लोभी, मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहा हो तो आत्महत्या जैसा कदम कभी न उठाएं। अपनी पीड़ा माता-पिता, भाई-बहन, रिश्तेदार, मित्र अथवा किसी भरोसेमंद व्यक्ति के साथ साझा करें और कानून की सहायता लें।
उन्होंने कहा, “ऐसे दरिंदों को छिपाने के बजाय समाज और कानून के सामने लाना चाहिए, ताकि उन्हें उनके अपराध की कठोर सजा मिल सके और भविष्य में किसी अन्य बेटी की जिंदगी इस तरह बर्बाद न हो। हर बेटी का जीवन अनमोल है और उसकी रक्षा करना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।”
सीबीसीआईडी जांच के आदेश के बाद अब पूरे प्रदेश की निगाहें जांच की निष्पक्षता और दोषियों के विरुद्ध होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।



