सैन्य अधिकारियों एवं शहीद परिवारों का हुआ सम्मान
नोएडा, 26 जुलाई। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रविवार को सेक्टर-6 स्थित इंदिरा गांधी कला केंद्र, नोएडा प्राधिकरण में पर्वतीय सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में अमर वीर शहीदों की स्मृति में भव्य श्रद्धांजलि एवं देशभक्ति संध्या का आयोजन किया गया। सायं 4:30 बजे प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, कारगिल युद्ध के वीर योद्धाओं, शहीदों के परिजनों, पूर्व सैनिकों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लेकर कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इसके पश्चात “शुभम् करोति कल्याणम्” एवं “वंदे मातरम्” की प्रस्तुति के साथ पूरा सभागार राष्ट्रभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो गया।
संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र चौहान ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य विजय नहीं, बल्कि भारत के वीर सैनिकों के अदम्य साहस, शौर्य और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। कार्यक्रम का संचालन गढ़वाल हितैशणी सभा के पूर्व अध्यक्ष अजय बिष्ट ने किया।

इस अवसर पर मेजर जनरल डॉ. गोपाल कृष्ण थपलियाल, मेजर जनरल सुनील कुमार, कर्नल अशोक कुमार तारा (वीर चक्र), ब्रिगेडियर महेश्वर नाथ कौशिक, ऑनरेरी कैप्टन हरक सिंह, ऑनरेरी कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव, नायक राजन सिंह मेहरा तथा नायक दिनेश चंद्र डांडिया सहित कई सैन्य अधिकारियों एवं वीर सैनिकों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में श्रीमती उमा नौरियाल (शहीद मेजर अनुराग नौरियाल, कीर्ति चक्र की धर्मपत्नी) तथा कारगिल शहीद कैप्टन विजयंत थापर (वीर चक्र) के पिता कर्नल वी.एन. थापर का भी विशेष सम्मान किया गया।
अपने भावुक संबोधन में कर्नल वी.एन. थापर ने कारगिल युद्ध के दौरान शहादत से पूर्व अपने पुत्र कैप्टन विजयंत थापर द्वारा लिखे गए अंतिम पत्र का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पत्र की शुरुआत इन शब्दों से होती है—”My Dear Mama, Papa, Dada, Dadi, जब तक मेरी यह चिट्ठी आप लोगों को मिलेगी, तब मैं ऊपर से आप लोगों को देख रहा होऊंगा।” उन्होंने बताया कि आगे कैप्टन विजयंत ने लिखा था कि उन्हें अपने बलिदान का कोई दुख नहीं है। यदि अगले जन्म में फिर से मनुष्य के रूप में जन्म लेने का अवसर मिला, तो वे पुनः भारत में ही जन्म लेकर भारतीय सेना में भर्ती होंगे और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना जीवन फिर से न्यौछावर करेंगे। कर्नल थापर ने बताया कि पत्र में उनके पुत्र ने अपने घर के पड़ोस में रहने वाली एक गरीब बच्ची का भी जिक्र किया था और अपने माता-पिता से अनुरोध किया था कि उसकी पढ़ाई की जिम्मेदारी निभाते हुए उसकी स्कूल फीस नियमित रूप से भरते रहें। कर्नल थापर ने कहा कि यह पत्र केवल उनके परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदनाओं का अमर संदेश है। उनका संबोधन सुनकर सभागार में मौजूद अनेक लोगों की आंखें नम हो गईं।
कार्यक्रम के दौरान शहीद मेजर अनुराग नौरियाल की पत्नी श्रीमती उमा नौरियाल की गरिमामयी उपस्थिति ने भी सभी को भावुक कर दिया। उपस्थित लोगों ने शहीदों के अद्वितीय बलिदान को नमन करते हुए उनके परिवारों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
80 वर्षीय ब्रिगेडियर महेश्वर नाथ कौशिक ने भी अपने प्रेरणादायी संबोधन में भारतीय सेना में बिताए गए लंबे सेवा काल के दौरान विभिन्न युद्धों और सैन्य अभियानों के अनुभव उपस्थित जनसमूह के साथ साझा किए। उन्होंने सीमा पर विषम परिस्थितियों में सैनिकों के अदम्य साहस, अनुशासन, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण की अनेक प्रेरक घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा केवल सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी कर्तव्य है कि वह राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे। उनके अनुभवों और संस्मरणों को श्रोताओं ने पूरे ध्यान से सुना तथा बार-बार तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत रेखा चौहान समूह द्वारा उत्तराखंड देव स्तुति गीत की प्रस्तुति से की गई। देशभक्ति संध्या में रोहित चौहान एवं कल्पना चौहान ने एक से बढ़कर एक देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को राष्ट्रभक्ति से सराबोर कर दिया। वहीं भगवत मनराल टीम ने “चल कदम कदम”, “दूर बड़ी दूर बर्फीले (उत्तराखंडी)” तथा “देश रंगीला-रंगीला” जैसी मनमोहक प्रस्तुतियां देकर खूब तालियां बटोरीं। सीमा पवार एवं रजनी जोशी (वसुंधरा, गाजियाबाद) ने “मिट्टी के बेटे” की भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जबकि अंजलि भट्ट, ग्रेटर नोएडा वेस्ट की टीम ने “संदेशे आते हैं” एवं “कंधों से कंधे मिलते हैं” जैसे गीतों पर प्रस्तुति देकर दर्शकों को भावुक कर दिया। टीम रेखा चौहान द्वारा प्रस्तुत उत्तराखंड का पारंपरिक लोकनृत्य ‘तुलका छिप्पी’ भी आकर्षण का केंद्र रहा।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन के पश्चात सभी उपस्थित लोगों ने राष्ट्रगान के साथ अमर वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। पूरे आयोजन के दौरान भारत माता की जय, वंदे मातरम् तथा भारतीय सेना अमर रहे के जयघोष से पूरा सभागार गूंज उठा।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि कारगिल विजय दिवस हमें उन वीर सपूतों के अदम्य साहस, बलिदान और राष्ट्र के प्रति समर्पण की याद दिलाता है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की सीमाओं की रक्षा की। ऐसे आयोजन युवा पीढ़ी में देशभक्ति, राष्ट्रसेवा और सैनिकों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
इस अवसर पर नोएडा सांसद डॉ महेश शर्मा, दिल्ली भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ विनोद बछेती, नोएडा लोकमंच के अध्यक्ष महेश सक्सेना, गढ़वाल हितेशणी सभा के पूर्व अध्यक्ष अजय बिष्ट, उत्तराखंड संस्कृत समिति के अध्यक्ष जीपीएस रावत, सुनील दत्त सिलवाल, वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप वेदवाल, आईपी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डी.के.संडूली, अनिल पन्त, सुभाष गुसाई, यशोदा घिल्डियाल, दिगमोहन नेगी, राकेश गौड़, आजाद नेगी, दिनेश ध्यानी, जय लाल नवानी, पवन गुस्साईं, बिशन सिंह राणा, दर्शन सिंह रावत, महावीर पंवार, उमेश बंदुनी, ब्रिज मोहन सेमवाल, ब्रिज मोहन शर्मा, सुभाष नौटियाल, खेम राज कोठारी, नरेश कोटियाल, राकेश ग़ुस्साईं आदि मौजूद रहे।
इसके अलावा पर्वतीय सांस्कृतिक संस्था के मुख्य संयोजक राजेन्द्र चौहान, लोक गायिका कल्पना चौहान, महाकौथिग टीम के चेयरमैन आदित्य घड़ियाल, अध्यक्ष हरीश असवाल, इंदिरा चौधरी, सुबोध थपलियाल, जगत रावत, विनोद कबटियाल, लक्ष्मण रावत, उदय राठी, दिगपाल कैंतुरा, बच्ची राम रतूड़ी, कृष्ण कुमार पन्त, प्रभाकर शाही, विक्रम शाही, नीरज रावत, हेमंत जोशी, नवीन कोठियाल, शीला पन्त, पुष्पा रावत, रजनी ढौंडियाल जोशी, मंजू जोशी, मंजू रावत, निर्मल नेगी, अनीता भट्ट, सुनीता रावत, सुनीता ध्यानी, लता रावत समेत महाकौथिग की पूरी टीम मौजूद रही.



