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कोरोना (COVID-19) ड्यूटी में शिक्षकों के सम्मुख आ रही समस्याओं पर जू.हाई.शि.संघ ने जिला शिक्षाधिकारी प्राथमिक शिक्षा को दिया ज्ञापन

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पौड़ी गढ़वाल :  कोरोना वायरस संक्रमण के को फैलने से रोकने के लिए करीब दो महीने से पूरे देश में लॉकडाउन चल रहा है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए उत्तराखंड में भी स्कूल/ कॉलेजों से लेकर सभी शिक्षण संस्थान बीते 14 मार्च 2020 से बंद है। इसबीच प्रदेश सरकार द्वारा लॉकडाउन के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से उत्तराखंड में आने वाले प्रवासियों एंव एक जिले से दूसरे जिले में आवागमन करने वाले लोगों को क्वारंटाइन करने हेतु राज्य के विद्यालयों को क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है। तथा संबंधित विद्यालय के एक शिक्षक/शिक्षिका को ग्राम पंचायत सहायक नोडल अधिकारी बनाया गया है। जो दैनिक रूप से क्वारंटाइन सेंटर में रहने वाले लोगों पर नजर रखेंगे, साथ ही जनसामान्य में कोरोना (COVID-19) के प्रति जागरूकता फैलायेंगे। जिला प्रशासन द्वारा लॉकडाउन के दौरान जनपद के शिक्षकों को ड्यूटी ज्वाइन करने का आदेश जारी किया गया है। परन्तु इस कार्य में शिक्षक/शिक्षिकाओं के सम्मुख कई व्यावहारिक कठिनाईयां आ रही हैं। कोरोना (covid-19) ड्यूटी में शिक्षकों के सम्मुख आ रही समस्याओं को लेकर जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संगठन पौड़ी शाखा के पदाधिकारियों द्वारा जिला शिक्षाधिकारी प्राथमिक शिक्षा को ज्ञापन सौंपा गया।ज्ञापन में मुख्य शिक्षा अधिकारी जनपद पौड़ी गढ़वाल के पत्रांक संख्या 452-54 विविध/ 2020- 21 दिनांक 17 मई 2020 के अनुपालन में जनपद समस्त प्राथमिक विद्यालय एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों का कोरोना वारियर्स के रूप में क्वॉरनटाइन सेंट्रल में तैनाती की जा सकती है। इसलिए सभी अध्यापक अपने अपने कार्यस्थल में उपस्थित होना सुनिश्चित करें एवं अनुपस्थिति की स्थिति में स्वयं संस्था अध्यक्ष एवं अध्यापक उत्तरदायी होंगे का आदेश जारी किया गया है ।उक्त के संबंध में जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संगठन जनपद पौड़ी गढ़वाल आपसे निवेदन करता है कि वर्तमान समय में पूरा विश्व वैश्विक महामारी कोरोना से जूझ रहा है इस महामारी से निपटने के लिए सभी शिक्षक सरकार, शासन और विभाग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर  काम करने के लिए तैयार है लेकिन भारत सरकार के गाइडलाइन एवं उत्तराखंड सरकार के गाइडलाइन कोविड-19 के  अनुसार रेड जोन/ ऑरेंज जोन एवं अन्य राज्यों से ग्रीन जोन में जाने पर 14 दिन का होम क्वारनटाइन किया जाना आवश्यक होगा। जिलाधिकारी गढ़वाल के आदेश पत्रांक  85 वै०आधि०/ 2020 कोविड-19/ दिनांक 4 मई 2020 के आदेशानुसार विभिन्न राज्यों एव जनपदों से आने वाले व्यक्तियों को क्वॉरनटाइन में रहने का आदेश दिया गया है जिलाधिकारी गढ़वाल द्वारा यह भी आदेश दिया गया है कि यदि कोई शिक्षक जनपद से बाहर अपने जनपद में है तो उनके वापस आने की स्थिति में उन्हें भी नियमानुसार 14 दिन होम क्वॉरनटाइन में रहना होगा। उक्त के दृष्टिगत इन शिक्षकों के स्थान पर क्षेत्र एवं विकास खण्ड में वर्तमान में उपलब्ध शिक्षकों प्रांरभिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा से तैनाती करने हेतु खण्ड विकास अधिकारी /खण्ड शिक्षा अधिकारी/उप शिक्षा अधिकारी को अधिकृत किया जाता है के आदेश दिए गए थे। महोदय वर्तमान समय में भी बहुत सारे शिक्षक देहरादून, (आरेंज जोन) हरिद्वार (रेड जोन), उधम सिंह नगर (आरेंज जोन) व अन्य राज्यों में अपने घरों में है। शिक्षकों के नाम एवं कार्यस्थल के नाम से आदेश न होने के कारण उनके सम्मुख पास बनाने में भी समस्याएं उत्पन्न हो रही है। क्योंकि शिक्षकों के पास विभाग में कार्यरत का कोई आईडी नही होता है। जिसे वह पास बनाने में प्रयोग कर सके। और न ही उत्तराखंड के अन्दर कोई भी परिवहन की सुविधाएं वर्तमान समय में उपलब्ध है।

उत्तराखंड सरकार के आदेशानुसार प्रवासी व्यक्तियो की सूचना हेतु सम्बन्धित ग्राम प्रधानों को नियुक्त किया गया है ग्राम प्रधानों के द्वारा ही गांव में पहुंचने वाले प्रवासियों की सूचना देने का आदेश किया गया है। शासनादेश के आदेशानुसार 10 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों के मां एवं 55 वर्ष से अधिक आयु वाले शिक्षकों की ड्यूटी न लगाई जाए। अपने कार्यस्थल से अधिक दूर तैनाती की गई है ऐसे शिक्षकों को अपने कार्यस्थल के समीप तैनाती प्रदान की जाय एवं शिक्षकों को आवागमन हेतु पास जारी किया जाय। शिक्षकों को भी कोरोना वारियर्स के समान जैसे मास्क सेनिटाइजर, दस्ताने, पीपीई किट एवं बीमा आदि सुविधाएं उपलब्ध कराये जायें। ज्ञापन में आगे कहा है कि अन्य जनपदों से आने वाले शिक्षक कोरोना वारियर्स न होकर कहीं कोरोना कैरियर न हो जाय उक्त समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाये।

कुंवर सिंह राणा जिला अध्यक्ष, मुकेश काला जिला मंत्री, ब्लाक अध्यक्ष खिर्सू चन्द्रमोहन बिष्ट जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संगठन जनपद पौड़ी गढ़वाल।

कोरोना संकटकाल में कोरोना योद्धा की भूमिका का निर्वाह करते समाजसेवी पी एन शर्मा

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कोरोना के विश्वव्यापी संकट के समय में दुनियाभर के सामने बस एक ही सवाल है, एक ही चुनौती है कि कोविड19 के इस जानलेवा कोरोना वायरस का खात्मा कैसे होगा, अंत कब होगा। हमारे देश में भी देशव्यापी लॉकडाउन का चौथा चरण शुरू हो गया। लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंद लोगों को जरूरत भर की चीजें उपलब्ध कराने में शासन-प्रशासन की टीमें बड़ी मुश्तैदी से काम कर रही हैं। बावजूद इसके सब तक सभी जरूरी सामान नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में समाजसेवी और सामाजिक संगठन संकट की इस घड़ी कोरोना योद्धाओं की भूमिका में नज़र आ रहे हैं। देवभूमि संवाद ने दिल्ली-एनसीआर सहित देशभर में अलग-अलग स्थानों में समर्पित भाव से काम कर रहे लोगों को अपने पाठकों से रूबरू कराने की पहल की है। हम अपनी इस श्रृंखला की शुरुआत कर रहे हैं कोरोना संकटकाल में वासुकी फाउंडेशन के सामाजिक सहयोग के कार्यों से। पेश है वासुकी फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं समाजसेवी पी एन शर्मा से पत्रकार और संस्कृतिकर्मी डॉक्टर कुसुम भट्ट शर्मा की बातचीत के संपादित अंश।

कुसुम: शर्मा जी आपको कोरोना संक्रमण का डर नहीं लग रहा है जो आप इस तरह से सुबह, शाम और दिन में लोगों को राहत सामग्री बांटने जा रहे हैं।

पी एन शर्मा: हां डर जरूर लग रहा है लेकिन इस बात का नहीं कि कहीं मैं कोरोना वायरस से संक्रमित ना हो जाऊं बल्कि डर इस बात का लग रहा है कि मेरे नजदीक या संपर्क के लोगों में कोई भूखा ना सो रहा हो। डर इस बात का सता रहा है कि कहीं कोई पैसों  के अभाव में  दवाओं लिए नहीं तरस यहा हो। डर इस बात का है कि इस भरी दुनिया में कहीं कोई अपने आपको बिल्कुल अकेला महसूस नहीं कर रहा हो। बाकी रही कोरोना संक्रमण का डर अगर डॉक्टर, नर्स, पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी भी डरने लग गए तो फिर हो गया कोरोना पीड़ितों का इलाज। इसलिए मैं बिल्कुल निडर और बेफिक्र होकर नर सेवा नारायण सेवा की भावना के तहत जनसेवा के काम को अंजाम देने की कोशिश भर कर रहा हूं। देखिए कितना कर पाता हूं ईश्वर ही जाने।

कुसुम: बात अपनी जगह आपकी बिल्कुल दुरस्त है लेकिन हाल ही मैं आप अस्पताल से अपना इलाज करके लौटे हैं फिर इतनी सक्रियता कहीं आपके मन की भावुकता तो नहीं  है?

पी एन शर्मा: अस्पताल से ठीक होकर घर आने के बाद भी अगर कोई आदमी जीवन की सच्चाई से वाकिफ नहीं हो सके तो मेरा मानना है कि वो इंसान इंसानियत को समझने में अभी तक नाकाम रहा है। जीवन में बहुत सारे काम हमें इंसान होने के नाते भावुकतावश ही करने पडते हैं मेरी नज़र में ये ही काम इंसानियत को जिंदा रखते हैं।

कुसुम: कोरोना संकटकाल में आपकी समाजसेवा का इलाका और दायरा क्या रहा है?

पी एन शर्मा: मैंने कहा ना कि मैं अपने सामर्थ्य और सद्भावना के बलबूते पर ही जो थोड़ा बहुत कर पा रहा हूं। सबसे पहले लाॅकडाउन होते ही मुझे अपनी कर्मभूमि दिल्ली के मयूर विहार फेस तीन की याद आई तो मैंने यहां पर भोजन के डिब्बे वितरण से लेकर राशन वितरण और गैस सिलेंडर तक भिजवाए। मयूर विहार फेस तीन में युवा समाजसेवी विजय नेगी ने जगह-जगह पर अपनी मौजूदगी से मेरा मनोबल बढ़ाया। लाॅकडाउन वन में हमने मयूर विहार फेस तीन, घडोली गांव में भोजन और राशन दिया। वहीं गाजीपुर इलाके में और पेपर मार्केट और गाजीपुर मंडी में भी हमने जरूरतमंद लोगों को राहत सामग्री और पहुचाई। गाजीपुर थाने के एसएचओ पी एस नेगी ने मित्र पुलिस के दायित्व का निर्वाह करते हुए लोगों में सोशल डिस्टेसिंग बनाने में भरपूर सहयोग  किया। बात चाहे कंस्ट्रक्शन कंपनियों में श्रमिकों को राशन वितरण की हो या फिर आनंद विहार बस अड्डे में रुके उत्तराखंड के युवाओं को फल वितरण की हर जगह सोशल डिस्टेसिंग का बखूबी पालन कराया गया है।

कुसुम: उत्तराखंड के गांवों में आप अब तक कहां-कहां मदद कर पा रहे हो?

पी एन शर्मा: मैंने अपने गृह विकासखंड नैनीडांडा के गिनती भर के गांवों में राशन और जरूरी सामान का वितरण करवाया है। नैनीडांडा इलाके में युवा समाजसेवी और वासुकी फाउंडेशन के नैनीडांडा प्रतिनिधि अनिल मडवाल के माध्यम से मैं राहत और राशन सामग्री भिजवा रहा हूं। हालात सामान्य होने के बाद जल्द ही दिल्ली से वासुकी फाउंडेशन की एक टीम नैनीडांडा जाएगी और कोरोना संकट से इलाके के हालातों का जायजा लेकर शासन-प्रशासन को इसकी एक रिपोर्ट सौंपेगी।

कुसुम: ये जो समाजसेवा के कार्य आप कर रहे हो इसके लिए धन की व्यवस्था कहां से होती है?

पी एन शर्मा: मैंने अपने जीवन में जो कुछ भी हासिल किया है वो अपने पुरुषार्थ के बल पर कमाया है। मेरे लिए धन की व्यवस्था मेरा भगवान करता है। उसी ईश्वर की कृपा है कि मैं आज मैं आज समाज के शोषित और वंचितों के साथ साथ उन सभी जरूरतमंदों की सेवा कर पा रहा हूं जिनको वास्तव में मदद की दरकार है।

कुसुम: आप समाजसेवा के कार्यों में हमेशा बढ़ चढ़कर आगे रहते हैं लोगों की मदद करने की प्रेरणा आपको कहां से मिलती है।

पी एन शर्मा : समाजसेवा के कार्यों की प्रेरणा हमेशा ही समाज से मिला करती है। आप जरा आप इस बात को इस नजरिए से भी देखिए कि मैं जब गांव से दिल्ली आया था तो बिल्कुल रीता था, खाली हाथ था। अगर आज में समाज को कुछ दे पाने की स्थिति में हूं तो समाज में भी तो कभी मेरी मदद की होगी। रही बात मेरे समाजसेवा के कार्यों की तो मैं अकेला समाजसेवी नहीं हूं उत्तराखंड से। उत्तराखंड से माता मंगला और भोले जी महाराज द हंस फाउंडेशन के जरिए, संजय शर्मा दरमोड़ा नई पहल नई सोच, बृजमोहन उप्रेती, उत्तराखंड लोकमंच, संदीप शर्मा, दामोदर हरि फाउंडेशन, दीपक ध्यानी फाउंडेशन शुरुआत, कुसुम गोपाल असवाल, कात्यायनी फाउंडेशन, ज्योति डंगवाल, एचएमटी के जरिए कोरोना के इस संकटकाल में समाज के प्रति अपने दायित्व का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं।

मेरा ऐसा मानना है कि अगर जीवन में आप किसी की सेवा कर रहे हो तो आप उस पर अहसान नहीं कर रहे हो बल्कि ये ईश्वर की कृपा है कि उसने आपको किसी की सेवा करने का सामर्थ्य और शक्ति दी है।

ग्रेटर नोएडा : ओप्पो मोबाइल कंपनी में 6 कर्मचारी मिले कोरोना पॉजिटिव

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ग्रेटर नोएडा : लॉकडाउन में कंपनियों को चलाने की छूट मिलने के बाद अब कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने लगे हैं. सोमवार को ग्रेटर नोयेडा स्थित ओप्पो मोबाइल कंपनी की फैक्ट्री में 6 कर्मचारियों में कोरोना की पुष्टि हुई है। इसके बाद से अग्रिम आदेश तक फैक्ट्री को बंद कर दिया गया है। कोरोना संक्रमित पाए गए कर्मचारियों को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। इस फैक्ट्री में 8 मई से दोबारा काम शुरू हुआ था। ओप्पो इंडिया कंपनी ने खबर की पु्ष्टि करते हुए बताया कि मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में कामकाज पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। कंपनी के तीन हजार से ज्यादा कर्मचारियों का भी कोरोना टेस्ट कराया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने सेनेटाइजेशन का काम शुरू कर दिया है। इसके बाद केवल कोरोना टेस्ट में निगेटिव पाए गए लोगों और सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल्स के पालन के साथ ही फैक्ट्री का काम शुरू किया जाएगा।

CBSE ने 10वीं और 12वीं बोर्ड की बची हुई परीक्षा की डेटशीट की जारी

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cbse datesheet : केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सीबीएसई बोर्ड की बची हुई परीक्षाओं की डेटशीट की घोषणा कर दी है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है. CBSE ने कक्षा 10 वीं (केवल उत्तर-पूर्वी दिल्ली के लिए) की री-शेड्यूल होने वाली बोर्ड परीक्षाओं तथा कक्षा 12वीं बोर्ड की बची हुई परीक्षाएं के लिए CBSE ने डेट शीट जारी की है।

हंस फाउंडेशन के ऑपरेशन नमस्ते के तहत जरूरतमंदों को किया राशन वितरण

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गाजियाबाद : मानव सेवा को समर्पित भोले जी महाराज एवं माता मंगला जी द्वारा संचालित हंस फाउंडेशन के ऑपरेशन नमस्ते के तहत समाजसेवी एवं वरिष्ठ भाजपा नेता सच्चिदानंद शर्मा के माध्यम से जागृति विहार, रईस पुर, गुलदर रोड, गाजियाबाद में पार्षद मोहन सिंह रावत, भाजपा मंडल अध्यक्ष विनीत शर्मा, नीरज त्यागी, समाजसेवी धीरेंद्र ध्यानी, ओम दत्त कौशिक, विनोद बिष्ट, सतपाल चौधरी, दीवान सिंह रावत के सहयोग से महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा की अनुशंसा पर जरूरतमंद लोगों में खाद्यान्न वितरित किया गया। खाद्यान्न वितरण में कोविड-19 के नियमों का विशेष ध्यान रखते हुए फिजिकल डिस्टेंसिंग मास्क और टेंपरेचर गन से लोगों का टेंपरेचर भी लिया गया।

हंस फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे अभियान नमस्ते के तहत पीएम केयर्स फंड में 4 करोड़ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री राहत कोष में डेढ़ करोड़ रुपए की धनराशि दिए जाने व देश के कई राज्यों में ऑपरेशन नमस्ते के तहत जरूरतमंदों को राशन वितरित किए जाने पर लोगों ने भोले जी महाराज एवं माता मंगला जी की भूरी भूरी प्रशंसा की। गाजियाबाद में हंस फाउंडेशन द्वारा जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए सच्चिदानंद शर्मा का भी आभार व्यक्त किया।

इस वर्ष नहीं होगा 6, 7 जून को होने वाला खैरालिंग कौथिग (मुंडनेश्वर महादेव) मेला

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सतपुली : कोरोना महामारी के चलते विकासखंड कल्जीखाल की पट्टी असवालस्यू के मुंडनेश्वर में प्रतिवर्ष 6 और 7 जून को लगने वाले पारंपरिक व पौराणिक खैरालिंग महादेव मेले का भव्य आयोजन इस वर्ष नही हो पायेगा।

खैरालिंग मेले में प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते थे। पहले दिन महादेव की ध्वजा के साथ श्रद्धालु पारंपरिक बाध्ययंत्रो दोल दमाऊ की थाप में नाचते हुए खैरालिंग महादेव को ध्वजा चढ़ाते है। और दूसरे दिन खैरालिंग महादेव व माँ काली की पूजा साथ बड़ी मात्रा में पशुबलि की जाती थी जो कि पिछले कुछ सालों से अब पूर्ण रूप से बंद है। लेकिन इस बार खैरालिंग महादेव का थाल खाली दिखेगा जहाँ प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में लोग होते थे।

मन्दिर समिति के अध्यक्ष बलवन्त सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी पर भारत सरकार की गाइडलाइन का पालन करते हुए इस वर्ष खैरालिंग महादेव में भव्य मेले का आयोजन नही किया जायेगा। इस बार पुजारी महाराज द्वारा खैरालिंग महादेव व माँ काली की पूजा अर्चना कर भगवान को भोग प्रसाद चढ़ाया जायेगा।जहाँ तक हमारी जानकारी में है कि पिछले 100 सालों में कभी ऐसा नहीं हुआ कि खैरालिंग का मेला न हुआ हो। पर कोरोना रूपी आपदा की वजह से इस साल खैरालिंग मेला भी स्थगित करना पड़ा।

मनीष खुगशाल स्वतंत्र

पौड़ी: कोरोना से नहीं जंगली जानवरों से डर लगता है साहब!, गाँव से दूर एकांत में बने स्कूलों में क्वारंटाइन किये लोग लगा रहे हैं होम क्वारंटाइन की गुहार

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पौड़ी गढ़वाल : कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए किये गए लॉकडाउन के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से प्रवासी उत्तराखंडी अपने अपने गाँव लौट रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक राज्य में करीब 99 हजार प्रवासी लौट चुके हैं। शासन/ प्रशासन द्वारा गाँव लौट रहे प्रवासियों को क्वारंटाइन करने की अंतिम जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों को दी गई है। ग्राम प्रधान बाहर से आये प्रवासियों को 14 दिनों के लिए गाँव के विद्यालयों में या जिन गांवों में पंचायत घर बने हैं वहाँ क्वारंटाइन सेंटर बनाकर ठहरा रहे हैं। परन्तु जैसा कि सभी जानते हैं कि पहाड़ के गाँव में अधिकतर विद्यालय गाँव से दूर एकांत में (जंगल से नजदीक) हैं। जहाँ शाम होते ही जंगली जानवरों का खतरा मंडराने लगता है। जिसकी वजह से स्कूल में बने क्वारंटाइन सेंटर में अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ रह रहे लोगों में कोरोना से ज्यादा जंगली जानवरों का खौफ बैठा हुआ है, और वे हर वक्त डर के साए में जी रहे हैं। अभी कल की बात है पौड़ी जिले के कोट ब्लाक में घास लेने गई दो महिलाओं पर जंगली भालू ने अचानक हमला कर घायल कर था। इसके अलावा गुलदार के हमले की घटनायें भी गांवों में आये दिन सुनाई देती हैं। इसी को देखते हुए अब गाँव से दूर स्कूलों में क्वारंटाइन किये गए लोग अब ग्राम प्रधान से होम क्वारंटाइन में रहने की मांग कर रहे हैं।

ताजे घटनाक्रम में पौड़ी जिले के कल्जीखाल ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम थापला के प्रधान राकेश कुमार द्वारा गाँव से दूर प्राथमिक विद्यालय में बने क्वारंटाइन सेंटर में 16 मई को एक परिवार को क्वारेंटाइन किया गया था। कल देर श्याम 7 बजे जब उक्त परिवार अपनी छोटी बच्ची के साथ विद्यालय प्रांगण में बैठे थे तभी अचानक एक जंगली भालू विद्यालय प्रांगण में आ धमका। उन लोगों ने किसी तरह विद्यालय के अंदर भागकर अपनी जान बचाई। जिसके बाद दहशत में जी रहे परिवार को ग्राम प्रधान ने सुबह अपने ही खाली पड़े घर पर क्वारंटाइन करवाया। ग्राम प्रधान में गाँव से दूर एकांत में (विद्यालय) बने क्वारंटाइन सेंटर में जगली जानवरों के खतरे को ध्यान में रखते हुए पौड़ी जिलाधिकारी को पत्र लिखकर लॉकडाउन के दौरान गाँव आने वाले प्रवासी परिवारों को गाँव में ही होम क्वारंटाइन करने का आग्रह किया है।

जगमोहन डांगी, पौडी गढ़वाल

 

31 मई तक बढ़ाया गया लॉकडाउन 4.0 :  क्या खुलेगा, क्या रहेगा बंद देखें नए नियम

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coronavirus (Covid-19) : बीते कुछ दिनों में देशभर में कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते संक्रमण को देखते हुए केंद्र सरकार ने लॉकडाउन को 31 मई तक बढ़ा दिया है। केंद्र सरकार ने लॉकडाउन-4 के व्यापक दिशानिर्देश तो तय कर दिए हैं, लेकिन इसे किस तरह से, किस हद तक लागू किया जाना है, यह फैसला राज्यों की सरकरों पर छोड़ दिया है।  लॉकडाउन 4.0 में ज्यादातर अधिकार राज्यों को दिए गए हैं। अब राज्य सरकारों को तय करना है कि वे अपने अपने राज्यों की स्थिति को देखते हुए किन-किन नियमों में छूट दे सकते हैं।

लॉकडाउन के चौथे चरण में रेड, ग्रीन और ऑरेंज जोन के अलावा दो और नए जोन बफर और कंटेनमेंट जोन बनाने का फैसला किया गया है। अब तीन की जगह पांच जोन में कोरोना संक्रमित इलाकों को बांटा जाएगा। कंटेनमेंट जोन में सिर्फ आवश्यक सेवाओं की अनुमति होगी। जिन इलाकों में रूक-रूक कर कुछ समय बाद नए मरीज सामने आ जाते हैं उन्हें बफर जोन के रूप में चिह्नित किया जाएगा। लॉकडाउन का चौथा चरण 14 दिन का होगा। लॉकडाउन 4.0 के लिए जारी गाइडलाइंस में गृहमंत्रालय ने साफ कर दिया है कि विशेष रूप से प्रतिबंधित गतिविधियों को छोड़कर अन्य सारी गतिविधियों की पूरी तरह से छूट होगी। लेकिन कंटेनमेंट जोन में जरूरी सेवाओं को छोड़कर किसी भी गतिविधि की इजाजत नहीं होगी।

लॉकडाउन 4.0 में ये हैं नए नियम

1. राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को अपने-अपने यहां कोरोना वायरस संक्रमण के हालात को देखते हुए रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन बनाने का अधिकार दे दिया गया है।
2. लॉकडाउन 4.0 में सभी सिनेमा हॉल, शॉपिंग मॉल, व्यायामशाला, स्विमिंग पूल, मनोरंजन पार्क, थिएटर, बार और ऑडिटोरियम, असेंबली हॉल और इसी तरह के स्थान 31 मई तक पूरे देश में बंद रहेंगे।
3. लॉकडाउन 4.0 के दौरान देश भर में घरेलू चिकित्सा सेवाओं, घरेलू एयर एम्बुलेंस और सुरक्षा उद्देश्यों या गृह मंत्रालय द्वारा अनुमति दी गए कार्यों के लिए उड़ान को छोड़कर सभी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय हवाई यात्रा निषिद्ध रहेंगी।
4. सरकार द्वारा जारी लॉकडाउन के विस्तार के चलते 31 मई तक यात्रियों के लिए मेट्रो सेवाएं बंद रहेंगी। हमारी हेल्पलाइन सेवा ‘155370’ भी उपलब्ध नहीं होगी: दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC)।
5. लॉकडाउन 4.0 में भी मेट्रो और रेल सेवा बंद रहेगी। सामान्य हवाई सेवा भी नहीं संचालित होगी। स्कूल, कॉलेज और कोचिंग भी बंद रहेंगी।
6. 65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति, किसी बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं और 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चे 31 मई तक घर पर रहेंगे, केवल आवश्यक और स्वास्थ्य कारणों के लिए ही बाहर निकलें
7. 31 मई तक विस्तारित लॉकडाउन के दौरान सभी गैर-जरूरी गतिविधियों के लिए शाम 7 से सुबह 7 बजे के बीच कर्फ्य जारी रहेगा।
8. लॉकडाउन 4.0 के दौरान राज्यों की परस्पर सहमति से अंतरराज्यीय यात्री वाहनों, बस सेवाओं की आवाजाही को अनुमति दी जा सकती है।
9. खेल परिसरों और स्टेडियमों को खोलने की अनुमति दी जाएगी; हालांकि, दर्शकों को अनुमति नहीं दी होगी।
10. लॉकडाउन 4.0 के दौरान होटल और रेस्तरां द्वारा होम डिलिवरी की सुविधा दी जा सकती है।
11. कार्यालयों और कार्यस्थलों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियोक्ताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आरोग्य सेतु ऐप सभी कर्मचारियों के मोबाइल फोन पर उपलब्ध हो।

12. रेड जोन में नाई की दुकानें, स्‍पा और सैलून सोमवार से खुल सकते हैं। रेड जोन में ई-कॉमर्स कंपनियों जरूरी और गैर-जरूरी सामान की आपूर्ति कर सकते हैं।

परी चौक पर जाम की समस्या से मिलेगी निजात, हिण्डन नदी पर पुल का निर्माण कार्य शुरू

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ग्रेटर नोएडा : शहर के प्रमुख इंट्री प्वाइंट परी चौक पर आए दिन लगने वाले जाम की समस्या से जल्द ही निजात मिल जाएगी। ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने हिण्डन नदी पर पुल का निर्माण कार्य आरंभ कर दिया है। निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम को सौंपी गयी है। बता दें कि लॉकडाउन में छूट मिलने पर प्राधिकरण ने सोशल डिस्टेंसिंग के निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित कराते हुए सुस्त पड़ी विकास की गति को रफ्तार देने की कवायद शुरू कर दी है। एसीईओ कृष्ण कुमार गुप्ता ने बताया कि लॉकडाउन-3.0 के लिए प्रदेश सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी के अंतर्गत प्राधिकरण के परियोजना विभाग द्वारा महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर निर्माण एवं विकास कार्य आरंभ कर दिए गए हैं। परियोजना विभाग द्वारा हिण्डन नदी पर सेक्टर-146 एवं 147 से नॉलेज पार्क-3 ग्रेटर नोएडा तक बनने वाले पुल पर निर्माण कार्य आरंभ कर दिया गया है। निर्माण कार्य में सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन्स के दिशा निर्देशों का पालन किया जा रहा है। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। परियोजना का निर्माण उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड के माध्यम से कराया जा रहा है। इसके निर्माण पर लगभग 65 करोड़ रूपये का खर्च होना संभावित है। निर्माण कार्य 18 माह में पूर्ण किया जाना प्रस्तावित है। ग्रेटर नोएडा में दिन प्रतिदिन बढ़ रहे यातायात के कारण परी चौक पर आए दिन जाम की स्थिति उत्पन्न होती रहती है। नोएडा सेक्टर-146 एवं 147 से ग्रेटर नोएडा पहुंचने के लिए ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे का प्रयोग किया जा रहा है। इन सभी समस्याओं के निजात हेतु प्राधिकरण द्वारा नोएडा से ग्रेटर नोएडा पहुंचने के लिए एक अन्य वैकल्पिक मार्ग की परियोजना शुरू की गयी है। उक्त परियोजना के पूर्ण होने के पश्चात ग्रेटर नोएडा के लोग नोएडा जाने के लिए एलजी गोल चक्कर से केपी-3 और सेक्टर-146 एवं 147 नोएडा पहुंचने के लिए इस मार्ग का प्रयोग कर सकेंगे,तथा उन्हें परी चौक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इस नये मार्ग से सुगम एवं सरलीता से अपने गंतव्य पर पहुंच सकेंगे।

स्कूल फीस माफ करने की मुहिम को मिला फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए का साथ

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ग्रेटर नोएडा : कोरोना महामारी के चलते किये गए लॉकडाउन के दौरान स्कूलों की फीस माफ करने की मांग को लेकर शुरू की गई मुहिम में अभिभावकों के साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी भी जुड़ रहे हैं।

फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए, ग्रेटर नोएडा ने भी स्कूल फीस माफ करने की मांग का समर्थन किया है। फेडरेशन ने इससे संबंधित पत्र गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को ईमेल और ट्विटर के माध्यम से भेजा है। लॉकडाउन के दौरान फीस माफ करने के साथ ही स्कूलों में चल रही किताब, कापी व ड्रेस की दुकानों का भी जिक्र किया गया है। ज्ञात हो कि लॉकडाउन के दौरान स्कूलों की फीस माफ करने की मांग तेज हो गयी है। अभिभावक सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए के उपाध्यक्ष आलोक नागर का कहना है कि 10 साल पुराने और नो पराफिट नो लॉस पर काम करने वाले सभी स्कूलों को तीन माह की फीस माफ करनी चाहिए,क्योंकि प्राधिकरण की ओर से बहुत कम दरों में स्कूलों को जमीन दी गई है। स्कूलों को जमीन देते समय प्राधिकरण ने नो पराफिट नो लॉस पर काम करने के लिए गया था। इसलिए कोरोना जैसी महामारी में सभी स्कूलों को तीन महीने की फीस माफ करनी चाहिए। फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए ने जिलाधिकारी व मुख्यमंत्री से यह भी मांग की है कि स्कूलों में चल रही किताब, कॉपी व ड्रेस की दुकानें बंद होनी चाहिए। अभिभावकों को कहीं से ही किताब, कॉपी व ड्रेस खरीदने की छूट होनी चाहिए। फंड न होने का रोना रो रहे स्कूलों के बैंक अकाउंट की जांच की जाए। करोड़ों का फंड होने के बाद भी कुछ स्कूल फीस मांग रहे हैं। फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों का कहना है कि जिन स्कूलों के पास वास्तव में फंड नहीं है, उनके लिए जो अभिभावक फीस जमा करने में सक्षम हैं, वे स्वयं अपनी सामर्थ अनुसार फीस का भुगतान अवश्य करें। सीएल  मौर्य