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गढ़वाली-कुमाऊनी भाषा के संरक्षण की जरूरत, नई पीढ़ी में जागरूकता जरूरी: डॉ. विनोद बच्छेती

पौड़ी: दिल्ली भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. विनोद बच्छेती ने लोक भाषाओं के संरक्षण को आज के दौर की सबसे बड़ी जरूरत बताया है। उन्होंने चिंता जताई कि यदि नई पीढ़ी में गढ़वाली और कुमाऊनी भाषा के प्रति जागरूकता पैदा नहीं की गई, तो आने वाले एक-दो दशकों में हमारी लोक भाषाएं विलुप्त होने के कगार पर पहुंच सकती हैं।

दिल्ली में प्रदेश उपाध्यक्ष बनने के बाद पहली बार अपने पैतृक गांव पहुंचे विनोद बच्छेती ने पौड़ी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि तमाम व्यस्तताओं और अन्य कारणों के बावजूद हमें अपनी मातृभूमि के प्रति दायित्वों का निर्वहन करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने बताया कि राजनीतिक और अन्य व्यस्तताओं के बावजूद वह हर दो माह में अपने पैतृक गांव पहुंचकर स्थानीय लोगों से संवाद करते हैं।

डॉ. बच्छेती ने लोक भाषाओं के संरक्षण को लेकर किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में करीब 52 स्थानों पर नई पीढ़ी के बच्चों को लोक भाषा सिखाने के लिए कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। उनका उद्देश्य बच्चों को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ना है।

उन्होंने कहा कि अपनी लोक भाषा हमारी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए समाज के हर वर्ग को अपने स्तर पर प्रयास करने होंगे। यदि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा से जुड़ी रहेगी, तभी हमारी लोक संस्कृति और परंपराएं भी सुरक्षित रह सकेंगी।