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चकबंदी जागर यात्रा में गूंजी पहाड़ बचाने की आवाज, चौबट्टाखाल से मुख्यमंत्री को भेजा 8 सूत्रीय मांगपत्र

पौड़ी गढ़वाल: “गाँव खुशहाल तो राज्य खुशहाल” के मूल मंत्र के साथ गरीब क्रांति अभियान, उत्तराखंड एवं भलु लगद (फील गुड संस्था) के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को चौबट्टाखाल में “चकबंदी जागर यात्रा” का आयोजन किया गया। यात्रा में 100 से अधिक काश्तकारों, जनप्रतिनिधियों एवं चकबंदी कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर पहाड़ों में चकबंदी लागू करने और खेती-किसानी को बचाने की जोरदार मांग उठाई।

यात्रा चौबट्टाखाल मुख्य बाजार से जुलूस के रूप में प्रारंभ होकर तहसील मुख्यालय परिसर तक पहुंची। इस दौरान स्थानीय काश्तकारों, जनप्रतिनिधियों और व्यापारियों के साथ जनसंवाद भी आयोजित किया गया। बाद में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) चौबट्टाखाल के माध्यम से मुख्यमंत्री, उत्तराखंड सरकार को आठ सूत्रीय मांगपत्र सौंपा गया।

गरीब क्रांति अभियान के समन्वयक बलबंत गुसाईं ने कहा कि सरकार एक ओर चकबंदी को पर्वतीय खेती और बागवानी के लिए संजीवनी बता रही है, जबकि दूसरी ओर इसे धरातल पर लागू करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण काश्तकार अपने अधिकारों के लिए व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

फील गुड संस्था के संस्थापक सुधीर सुन्द्रियाल ने कहा कि वन्यजीवों के बढ़ते आतंक से ग्रामीणों की खेती लगातार प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि गांवों के अस्तित्व और कृषि को बचाने के लिए चकबंदी जैसी योजनाओं को शीघ्र लागू किया जाना आवश्यक है।

समाजसेवी सुरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सरकार कभी “आंशिक” तो कभी “स्वैच्छिक” चकबंदी की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है। उन्होंने पहले से अधिसूचित गांवों में तत्काल चकबंदी लागू कर सफल मॉडल विकसित करने की मांग की।

आठ सूत्रीय मांगपत्र की प्रमुख मांगें

मांगपत्र में ग्राम सभा स्तर पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने, पर्वतीय क्षेत्रों के लिए पृथक हिल कैडर का गठन, पूर्व में अधिसूचित सात गांवों—तंगोली, पंचूर, खैरासैंण, लखोली, ढांगल, औणी और ग्वीन मल्ला—में तत्काल चकबंदी प्रक्रिया शुरू करने, अनिवार्य चकबंदी लागू करने, कृषि भूमि पर उगे वृक्षों पर काश्तकारों का पूर्ण अधिकार सुनिश्चित करने, वास्तविक काश्तकारों को फसल क्षति का मुआवजा देने, प्रत्येक विकासखंड में कृषि विपणन केंद्र स्थापित करने तथा जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में तारबाड़ हेतु विशेष बजट का प्रावधान करने की मांग की गई है।

कार्यक्रम के अंत में आंदोलनकारियों ने कहा कि यदि सरकार शीघ्र ही इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो प्रदेशभर में जनजागरण अभियान को और व्यापक रूप दिया जाएगा।