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राज्य आंदोलनकारी समिति की ओर से कोरोना संक्रमण के कारण उत्पन्न परिस्थितियों में राज्य के किसान/बागवानों पर प्रभाव पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग परिचर्चा

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देहरादून: कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य आंदोलनकारी समिति की ओर से कोरोना वायरस (कोविड-19) संक्रमण के कारण उत्पन्न परिस्थितियों में राज्य के किसान/बागवानों पर प्रभाव जैसे प्रमुख सम-सामयिक बिंदुओं पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग परिचर्चा में प्रतिभाग किया। इसमें धीरेंद्र प्रताप, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी, राजेश्वर पैन्यूली एवं किशोर उपाध्याय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस एवं अन्य ने भी हिस्सा लिया।

इस अवसर पर सुबोध उनियाल ने भारत सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी देते हुए राज्य का पक्ष प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया। साथ ही कोरोना संक्रमण को रोकने हेतु लॉक डाउन अवधि में कृषि-औद्यानिकी से जुड़े काश्तकार-बागवानों के हित सरंक्षण के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयासों की जानकारी दी। किसानों को उनकी उपज का सही एवं लाभकारी मूल्य दिलाये जाने के लिए किए सतत् प्रयासों के बारे में अवगत कराया। कोविड-19 आपदा के समय आपणू बाजार, वेयर हाउस व कोल्ड स्टोर्स को उप मंडी केंद्र बनाया गया है। APMC  एक्ट में संशोधन करते हुए मंडी परिषद में रिवाल्विंग फंड का प्राविधान किया गया है। राज्य के अधिकाधिक किसानों को जैविक खेती की ओर आकर्षित किया जा रहा है। इस आपदा से प्रभावित/प्रवासियों के लिए राज्य सरकार के सकारात्मक प्रयासों की जानकारी देते हुए उन्हें जमीन से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान लगातार बारिश एवं ओलावृष्टि से किसानों को हो रहे नुकसान के बारे में उन्होंने बताया कि सरकार इसकी नियमित रूप से मानीटरिंग कर रही है एवं क्षति की नियमानुसार भरपाई की जाएगी।

कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा इस अवसर पर कोरोना वायरस को हराने के लिए जागरूकता की अपील की गई एवं लॉक डाउन व ‘‘दूरी बनाये रखने‘‘ के मानकों का अनुपालन बावत कहा गया, ताकि सामूहिक रूप से इस आपदा पर विजय मिल सके। इस अवसर पर उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अपने स्तर से हरसंभव प्रयास जनता के हित में कर रही है। जीविकोपार्जन के लिए दूर-दराज गए हुए राज्य के ऐसे सभी प्रवासियों को लाने की व्यवस्था की जा रही है जो गृह नगर आना चाहते हों एवं यहां पर उनको रोजगार के रूप पुनर्स्थापित करने की भी जानकारी दी। परिचर्चा में कृषि मंत्री द्वारा सभी जिम्मेदार आमजन से जिम्मेदार नागरिक की भूमिका की अपील दोहराई गई।

उत्तराखंड वापस लौट रहे प्रवासियों की होगी रैंडम सैंपलिंग, रिपोर्ट आने तक रहेंगे क्वारंटाइन

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देहरादून : कोरोना संकट के बीच बाहरी राज्यों से उत्तराखंड लौट रहे प्रवासियों में से कुछ एक के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद अब उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश वापस लौट रहे प्रवासियों की रैंडम सैंपलिंग कराने का फैसला लिया है। गुरुवार को सचिव स्वास्थ्य नितेश कुमार झा ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिख कर कहा है कि देहरादून में 12-13 मई को बाहर से आए 48 प्रवासियों के रैंडम सैंपल लिए गए, जिसमें से 4 रिपोर्ट कोरोना पॉजीटिव निकली, इसके बाद प्रवासियों की रैंडम सैंपलिंग का फैसला लिया गया है। उन प्रवासियों की सैपलिंग अनिवार्य होगी जिन लोगों की उम्र 65 साल से अधिक होगी। ऐसे लोगों की भी जांच होगी जो अन्य किसी राज्य के अस्पताल में अपना उपचार कराकर लौटे हों। खासकर देहरादून, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल, पौड़ी और हरिद्वार में तो बार्डर पर ही रैंडम सैंपलिग की जाएगी और रिपोर्ट आने तक क्वारंटाइन में रखा जाएगा।  अब तक 70 हज़ार लोग अन्य राज्यों से उत्तराखंड वापस आ चुके हैं जबकि अबतक कुल 2 लाख 10 हज़ार से अधिक लोगों ने वापस लौटने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है।

कल्जीखाल : कोरोना संकट में बाहर से आने वाले प्रवासियों को क्वारेंटाइन करने हेतु अहम बैठक

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कल्जीखाल : कोरोना महामारी के बीच लॉकडाउन के चलते काम धन्धे बंद हो जाने से परेशान प्रवासी उत्तराखंडी देश के अलग-अलग हिस्सों से अब अपने गाँव पहुँचने लगे हैं। जिसकी वजह से अब गांवों में भी कोरोना संक्रमण का खतरा पैदा होने लगा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक बीते 2 दिन में उत्तराखंड में जो 9 कोरोना संक्रमित मामले सामने आये हैं वे सभी लोग बाहरी राज्यों से उत्तराखंड में आये थे। इसी को देखते हुए आज कल्जीखाल ब्लाक के अंतर्गत ग्राम सभा थैर मे कोरोना (covid-19) के सम्बंध में बाहर से आने वाले लोगों के बारे में एक अहम मीटिंग की गई। जिसमे सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि गाँव मे जो भी व्यक्ति बाहर से आएगा, उन्हें उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोटागढ में होम क्वारेंटाइन किया जायेगा। वहां रहने, खाने तथा लाइट और पानी की व्यवस्था कर दी गई है. स्कूल गांव से 500 मीटर दूर में स्थित हैं।

बैठक में अनिल नेगी जेष्ट उप प्रमुख और प्रबंधक उ.मा. विद्यालय कोटागढ (थैर) के अलावा मणिकराम, शिवप्रशाद, मनोरथ प्रशाद,  इंद्रमणि, कुशाल सिंह, रेखा देवी, कमला देवी लीला देवी, गुड्डी देवी, रणवीर, ओमप्रकाश, डिगम्बर सहित गाँव के सभी छोटे बड़े लोगों के अलावा आशा कार्यकर्ती और आंगनबाड़ी कार्यकर्ती शामिल थी।

जगमोहन डांगी

डॉ. धन सिंह रावत की पहल और डीएम धीरज गब्र्याल की तत्परता ने बचाई पौड़ी के पत्रकार की जान

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पौड़ी गढ़वाल : पौड़ी मण्डल मुख्यालय में दैनिक जागरण समाचारपत्र के प्रभारी गुरूवेंद्र नेगी को 12 मई को अपने ही कार्यालय में अचानक सीने दर्द की शिकायत हुई थी। उन्हें तत्काल जिला अस्पताल पौड़ी में भर्ती करवाया गया। जहां उन्हें चिकित्सको ने आईसीयू में रखा, परन्तु उनका स्वास्थ्य अधिक खराब होने पर चिकित्सकों ने उन्हें हायर सेंटर के लिए रैफर किया। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने गुरूवेंद्र सिंह नेगी को हेलीकॉप्टर के माध्यम से तत्काल हायर सेंटर भेजने हेतु मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से वार्ता की। जिसके बाद जिला प्रशासन द्वारा पत्रकार गुरूवेंद्र नेगी को 13 मई को पौड़ी से एयरलिफ्ट कराकर जौलीग्रांट अस्पताल भर्ती करवाया। जहां उनके स्वास्थ्य में काफी सुधार हुआ है। आज 14 मई को ग्रामीण पत्रकार जगमोहन डांगी सहित कई मीडियाकर्मियों ने गुरूवेंद्र नेगी से फ़ोन पर बात कर उनका हाल जाना। सभी मीडिया कर्मियों ने उन्हें शीघ्र एयरलिफ्ट करवाने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत तथा पौड़ी डीएम धीरज सिंह गब्र्याल का आभार जताया। गुरविंदर नेगी एक दशक से पौडी में दैनिक जागरण के प्रभारी हैं। आज उनका स्वास्थ्य का हालचाल जानने के लिए द्वारीखाल के ब्लॉक प्रमुख महेन्द्र सिंह राणा ने जॉलीग्रांट अस्पताल जाकर उनका कुशल क्षेम जाना। पौडी के सभी मीडिया बन्दुओ एंव जनप्रतिनिधियों ने उनकी शीध्र स्वास्थ्य की कामना की। गुरूवेंद्र सिंह नेगी ने भी सभी मीडिया साथियों, जनप्रतिनिधियों एवं जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया।

जगमोहन डांगी

उत्तराखंड के 16 हजार से अधिक विशिष्ट बीटीसी शिक्षकों के लिए खुशखबरी, वर्ष 2001 से 2018 की अवधि के विशिष्ट बीटीसी कोर्स को केंद्र ने दी मान्यता

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BTC teachers of Uttarakhand

देहरादून: उत्तराखंड के 16 हजार 608 विशिष्ट बीटीसी शिक्षकों के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के वर्ष 2001 से 2018 की अवधि के विशिष्ट बीटीसी कोर्स को मान्यता दे दी है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से इसकी अधिसूचना जारी की गई है।

बतादें कि उत्तराखंड शिक्षा विभाग ने वर्ष 2001 से 2016 के बीच राज्य के 16,608 शिक्षकों को डायट से विशिष्ट बीटीसी का 6 महीने का कोर्स कराया था। कोर्स पूरा करने के बाद इन शिक्षकों को डायट से विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र भी दिया गया था। परन्तु एससीईआरटी द्वारा विशिष्ट बीटीसी कोर्स के लिए एनसीटीई से मान्यता नहीं ली गई। और एनसीटीई के नए मानक के अनुसार 31 मार्च 2019 तक ऐसे सभी शिक्षक अप्रशिक्षित शिक्षक की श्रेणी में आ गए थे। नियमानुसार उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती थी। वहीं इनके प्रमोशन भी इससे प्रभावित हो रहे थे।

गत वर्ष जनवरी में राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी की पहल पर राज्यसभा में एनसीटीई एक्ट तो जरूर संशोधित हो गया था, लेकिन उसके बाद मान्यता की अधिसूचना फाइलों में अटकी थी। परन्तु आज केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से अधिसूचना जारी की गई। जिसके अनुसार ये शिक्षक अब जहां प्रशिक्षित कहलाएंगे। वहीं इनके प्रमोशन का रास्ता भी साफ हो गया है।

उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डेय ने ट्वीट कर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक का आभार प्रकट करते हुए कहा कि आज हम सभी के अथक प्रयासों के फल स्वरूप विशिष्ट बीटीसी से सम्बंधित प्रकरण का निस्तारण हो गया है। मेरे सभी शिक्षक भाई-बहनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। प्रदेश सरकार आप सभी के हितों की रक्षा हेतु कृत संकल्पित है। वहीँ केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट कर कहा कि HRDMinistry ने 23 केंद्र और राज्य सरकार के शिक्षक शिक्षण संस्थानों को पूर्व व्यापी मान्यता प्रदान करते हुए आज एक अधिसूचना जारी की है। इस संदर्भ में उत्तराखंड सरकार के लगभग 16000 से अधिक शिक्षक जिन्होंने “Special BTC Bridge Course” 2001-2018 के मध्य किया है, लाभान्वित होंगे।

गाँव में ही रोजगार करने की सोच रहे हैं उत्तराखंड लौटे प्रवासी युवा

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सतपुली : कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन के दौरान विकासखंड जयहरीखाल की ग्रामसभा बन्दूण में देश के विभिन्न राज्यों से लौटे 30 प्रवासियों को ग्राम प्रधान द्वारा क्वारेंटाइन किया गया है। इनमे से 21 लोगों को प्राथमिक विद्यालय बन्दूण, 7 लोगों को प्राथमिक विद्यालय अगरोड़ा व दो लोगों को गांव से दूर खाली पड़े एक घर में क्वारेंटाइन किया गया है। जहाँ उनके परिजनों द्वारा विस्तर व खाने पीने की व्यवस्था की गयी है।

ग्राम सभा बन्दूण में आये सभी लोग गुड़गांव, दिल्ली,चंडीगढ़, गाजियाबाद व अन्य जगहों पर प्राइवेट नौकरी करते थे। कोरोना महामारी के चलते कम्पनी में काम न होने के कारण इन्हें अपने गाँव लौटना पड़ा। इनमें से कुछ युवाओ को अप्रैल माह से सैलरी भी नही मिली।

क्वारेंटाइन सेंटर प्राथमिक विद्यालय कई लोगों के घरों से एक किलोमीटर की दूरी पर है। जिस कारण लोग क्वारेंटाइन सेंटर पर ही अपना भोजन बना रहे है, साथ ही प्राथमिक विद्यालय की बदहाली बयां करती लाइट, टूटे दरवाजे, शौचालय को ग्राम प्रधान, उप राजस्व निरीक्षक अतुल बलोदी व क्वारेंटाइन में रह रहे लोगों द्वारा स्वयं के योगदान से दुरस्त कर रहने की व्यस्था बनायीं गयी। युवाओ का कहना है कि अगर सरकार हमारी मदद करे तो हम अपने गांव में ही रोजगार करने के लिए तैयार है।

चंडीगढ़ से लौटे सुरजीत सिंह का कहना है कि मैं बच्चे की पढ़ाई के लिए परिवार सहित चंडीगढ़ चला गया था लेकिन यही स्थिति रही तो गांव में ही अपना रोजगार तलाशना पड़ेगा। ग्राम प्रधान अंजली देवी का कहना है कि अभी तक ग्राम प्रधान को कोई वित्तीय सहायता नही दी गयी है। जिससे कि अन्य व्यवस्था की जा सके। क्योंकि लोग ग्राम प्रधान से ही सभी सुविधाओं की मांग कर रहे है।

मनीष खुगशाल स्वतन्त्र की रिपोर्ट

 

 

 

कोरोना संकट के बीच तहसील प्रशासन श्रीनगर गढ़वाल के कोरोना वारियार्स दे रहे हैं सेवायें

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श्रीनगर गढ़वाल : वैश्विक महामारी कोविड 19 में जहां विभिन्न सरकारी एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा अपनी जिम्मेदारी निभाई जा रही है, वही तहसील प्रशासन श्रीनगर गढ़वाल में उप जिलाधिकारी दीपेंद्र सिंह नेगी और तहसीलदार सुनील राज के साथ समस्त अधिकारी, कर्मचारी 23 मार्च के देशव्यापी लॉकडाउन के बाद बिना थके, बिना रूके अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वाहन कर रहे हैं। कोरोना लॉकडाउन के इस पूरे दौर में केन्द्रीय भूमिका में तहसील प्रशासन ही रहा है। इस टीम द्वारा रसद सामग्री के वितरण से लेकर मजदूरों की सूची बनाना, पास निर्गत करने सहित सभी विभागों के साथ सामंजस्य बिठाकर कोरोना संकट के दौरान कार्यों का सफल निश्पादन किया गया।

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बतादें कि श्रीनगर गढ़वाल, चमोली तथा रुद्रप्रयाग के केन्द्र में होने के कारण इस दौरान विभिन्न लोगों की जांच का मुख्य पडाव रहा। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आये प्रवासियों के भोजन ठहराव के साथ अगले दिन उन्हें गंतव्य स्थल पर भेजना किसी चुनौती से कम नहीं था। उस दिवस को याद करते हुए पेशकार तहसील श्रीनगर गढ़वाल श्रीकृष्ण उनियाल बताते हैं कि वो दिन हमारे लिए काफी चैलेंज का था, क्योंकि रात 8 बजे उन बसों का आना और उसमें किसी की भी विधिवत सूचना डाइवर्/क्लीनर पर न होना, साथ ही अधिकतर प्रवासियों का भूख प्यास से अस्त व्यस्त होना कुल मिलाकर उनकी टीम ने सुबह 4 बजे तक सबकी सूचना को विधिवत बनाकर (स्क्रीनिंग) उनके नियत गंतव्य की तैयारी, उनके रात्रि विश्राम और भोजन की व्यवस्था की। और फिर अगले दिन 8 बजे प्रातः अपने कार्यालय तहसील में उपस्थित होकर कोविड 19 के अन्तर्गत कार्यो का सम्पादन किया। इस टीम में पेशकार उप जिलाधिकारी श्रीकृष्ण उनियाल, रजिस्ट्रार कानूनगो एसपी नौटियाल, नायब तहसीलदार गोपाल कृष्ण कोटनाला,  कुलदीप नेगी, कुलदीप रावत, वाहन चालक उप जिलाधिकारी संजय बिष्ट, वाहन चालक तहसीलदार गोकुल गोस्वामी समस्त पटवारी काननूगो एवं संग्रह अमीन अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

9 दिन में कितने करोड़ की शराब पी गए दिल्ली वाले, यहाँ देखें

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नई दिल्ली : कोरोना महामारी को रोकने के लिए बीते 22 मार्च से देशभर में किये गए लॉकडाउन के चलते राजधानी दिल्ली सहित पूरे देश में शराब की दुकानों को भी पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। लॉकडाउन में करीब 40 दिनों तक शराब की बिक्री पर प्रतिबन्ध का असर शराब के शौकीनों के साथ-साथ ज्यादातर राज्यों के बजट पर भी पड़ने लगा। इसबीच विभिन्न राज्य सरकारों की मांग पर केंद्र ने लॉकडाउन 3.0 में 04 मई से कई गैर जरुरी वस्तुओं के साथ ही शराब की दुकानों को भी शर्तों के साथ खोलने की भी अनुमति दे दी थी। शराब के ठेके खुलने का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे शराब के शौकिनो ने इस खबर के आते ही लॉकडाउन के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए शराब के ठेकों के बाहर जमावड़ा लगा दिया। इसको देखते हुए कई जगह पुलिस को बल का प्रयोग करना पड़ा तो कहीं ठेके ही बंद करवाने पड़े। ठेकों पर भीड़ को देखते हुए दिल्ली सरकार ने शराब की कीमतों में 70% तक बढ़ोतरी कर दी।

टाइम्स ऑफ इंडिया के ट्विटर हैंडल से प्राप्त जानकारी के मुताबिक राजधानी दिल्ली में 04 मई से 12 मई तक कुल 9 दिनों में ही दिल्लीवासियों ने 84 करोड़ रुपये की शराब पी डाली। हैरानी की यह है कि दिल्ली सरकार द्वारा शराब की कीमतों में 70% तक बढ़ोतरी के बाद भी शराब पीने वालों पर इसका ज्यादा असर देखने को नहीं मिला। राज्य के आबकारी विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली में 4 मई से 12 मई के बीच लगभग 84 करोड़ रुपये की शराब की बिक्री दर्ज की गई। शराब की बिक्री में भी लगभग 55 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ, जिसे “विशेष कोरोना शुल्क” के रूप में लगाया गया था।

दिल्ली में शराब की सबसे ज्यादा बिक्री 09 मई को हुई। उस दिन 18 करोड़ की सेल हुई। वहीं पहले दिन 04 मई को 5.2 करोड़ रुपये की सेल हुई थी। शराब पीने के शौक़ीन दिल्ली वाले ही नहीं बल्कि पूरे देश में हैं. कर्नाटक राज्य में ठेके खुलने के दिन (4 मई को) एक दिन में रिकॉर्ड 45 करोड़ रुपए की शराब की बिक्री हुई। कर्नाटक के अदुगोड़ी में एक व्यक्ति ने अकेले 52,841 रुपए की शराब खरीदी और उसका बिल सोशल मीडिया में शेयर कर दिया था। लॉकडाउन के बीच यह मामला सोशल मीडिया में खूब वायरल हुआ था।

उत्तराखंड: आज फिर मिले बाहरी राज्यों से आये 3 कोरोना पॉजिटिव, 75 पहुंची राज्य में कोरोना मरीजों की संख्या

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देहरादून : लॉकडाउन के दौरान बाहरी राज्यों से उत्तराखंड पहुँच रहे प्रवासियों में से कुछ कोरोना संक्रमित मरीज भी उत्तराखंड पहुँच रहे हैं। ऐसे में शासन/ प्रशासन के साथ-साथ राज्य के आम नागरिकों को भी अत्यधिक सतर्कता बरतने के जरुररत है। गुरुवार को उत्तराखंड में कोरोना के तीन नए मरीज सामने आये हैं। जिसके बाद अब राज्य में कोरोना के मरीजों की संख्या 75 पहुंच गई है। जानकारी के मुताबिक आज कोरोना पॉजिटिव मिले तीनों मरीज देहरादून जिले के मसूरी, रायपुर और डालनवाला क्षेत्र के रहने वाले हैं। ये सभी प्रवासी हैं और हाल ही में बाहरी राज्यों से यहाँ लौटे थे।

इससे पहले कल बुधवार को भी प्रदेश में तीन लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई थी। और ये तीनों मरीज भी देश के अलग-अलग हिस्सों से उत्तराखंड पहुंचे थे। इस तरह पिछले 24 घंटों में 6 प्रवासियों में कोरोना की पुष्टि हो चुकी है। जो कि उत्तराखंड में कोरोना को लेकर खतरे की घण्टी है।

देखे प्रदेश के किस जिले में कितने कोरोना मरीज

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ऊधमसिंह नगर-13
नैनीताल-12
हरिद्वार-7
अल्मोड़ा-02
पौड़ी-01
उत्तरकाशी-01

केन्द्र सरकार के पैकेज से उत्तराखण्ड के एमएसएमई सेक्टर को भी होगा बड़ा फायदा : सीएम त्रिवेन्द्र

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मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने एमएसएमई सेक्टर के लिए केन्द्र सरकार द्वारा किए गए प्रावधानों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने 20 लाख करोङ रूपए का पैकेज घोषित किया था। इसी के अंतर्गत केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा विभिन्न क्षेत्रों विशेषतौर पर कुटीर, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए की गई व्यवस्थाओं से निश्चित रूप से हमारी घरेलू अर्थव्यवस्था में नई जान आएगी। छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलने से आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार के पैकेज से उत्तराखण्ड के एमएसएमई सेक्टर को भी बड़ा फायदा होगा। हमने जो उद्योगों का संचालन फिर से शुरू किया है, उसमें और गति आएगी। इससे उत्पादन और रोजगार में सुधार होगा। केन्द्र की अनेक परियोजनाएं उत्तराखण्ड में निर्माणाधीन हैं, कांट्रैक्ट विस्तारित करने के निर्णय से इन परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सकेगा। हमारी कोशिश रहेगी कि केन्द्र सरकार के पैकेज का लाभ राज्य के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को मिल सके। इसके लिए राज्य सरकार के स्तर पर जो भी किया जाना है, किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा एमएसएमई के लिए 3 लाख करोङ रूपए के ऋण की व्यवस्था की गई है। ऋण के लिए किसी गारंटी की जरूरत नहीं है। इससे सूक्ष्म, लघु, कुटीर व मध्यम उद्यमों को बङी राहत मिलेगी।  स्ट्रेस्ड एमएसएमई के उद्योगों के लिए 20 हजार करोड़ रूपए के ऋण की व्यवस्था से 2 लाख उद्योग लाभान्वित होंगे। एमएसएमई में निवेश और टर्न ओवर की सीमा को बढ़ाने से ये उद्योग अपना विस्तार कर सकें। सरकार के 200 करोड़ रूपए तक के टेंडर में ग्लोबल टेंडर को खत्म करने से देश के उद्योगों को लाभ मिलेगा।

सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों को ई-मार्केट लिंकेज उपलब्ध कराने और सरकारी क्षेत्र में इनके बकाया का भुगतान 45 दिनों में किया जाएगा।  एमएसएमई में फंड ऑफ फंड्स के माध्यम से 50 हजार करोङ रूपए की इक्विटी इन्फ्यूजन से बाजार एक बार फिर से तेजी पकङेगा। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज में ईपीएफ में नियोक्ता और कार्मिक के 12-12 प्रतिशत अंशदान सरकार द्वारा जून, जुलाई व अगस्त तीन महीनों के लिए और करने से व्यवसायो और वर्कर्स को कुल 2500 करोङ का ईपीएफ सपोर्ट मिलेगा।