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लॉकडाउन में फंसे दो परिवारों के लिए मसीहा साबित हुए उत्तराखंड सांस्कृतिक समिति के सदस्य

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ग्रेटर नोएडा : संकट की घड़ी में किसी जरूरतमंद की मदद करना मानवता का सबसे बड़ा धर्म होता है। कोरोना महामारी के चलते पैदा हुए हालात के बीच आज बहुत से लोग इस धर्म को निभा रहे हैं। उत्तराखंड सांस्कृतिक समिति ग्रेटर नोएडा के पदाधिकारियों ने भी लॉक डाउन में फंसे दो परिवारों की मदद कर उन्हें उनके मूल निवास उत्तराखंड भेजने का बड़ा काम किया है।

बता दें कि उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के किबर्स गाँव (अगरोड़ा) के मूल निवासी प्रदीप रावत पत्नी वा दो छोटे बच्चों के साथ ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 36 में किराये के मकान में रहते हैं। कोरोना महामारी के चलते लागू किए गए लॉक डाउन के दौरान प्रदीप रावत और उनकी पत्नी की मानसिक स्थिति खराब हो गयी। इसकी वजह भूत प्रेत का साया व देवी देवताओं का रूष्ट होना बताया गया। इस दौरान प्रदीप कभी भी घर से बाहर निकल कर बहकी बहकी बातें करते हुए जोर-जोर से रोने चिल्लाने लगते थे। प्रदीप रावत की मनोदशा के बारे में यहां रहने वाले उत्तराखंड सांस्कृतिक समिति के वरिष्ठ सदस्य त्रिलोक पंवार, पूरण सिंह पिल्ख्वाल सहित सेक्टर-36 के अन्य सदस्यों को मालूम हुई तो उन्होंने प्रदीप रावत की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। इसकी जानकारी समिति के अध्यक्ष जेपीएस रावत वा अन्य सदस्यों को दी गई। समिति के सदस्यों ने मानवता का धर्म निभाते हुए सबसे पहले डॉक्टर को दिखाया। उसके बाद इस परिवार को गाँव भेजने का फैसला किया परन्तु उनकी मनोदशा ठीक न होने तथा इस बीमारी से संबंधित कोई मेडिकल सर्टिफिकेट न होने के कारण इनका पास भी नहीं बन पा रहा था। दरअसल इन दिनों किसी भी हॉस्पिटल में इस तरह की बीमारी के लिए डॉक्टरों की सेवाएं नहीं मिल रही हैं। वहीं मेडिकल साइंस भूत प्रेत या ऊपरी हवा को नहीं मानता है। समिति के अध्यक्ष जेपीएस रावत की लगातार कोशिशों के बाद एक मनोचिकित्सक से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा उनके इलाज के लिए प्रयास किया गया तथा 5 दिनों के इलाज के बाद जब उनकी स्थिति में थोडा सुधार हुआ और उन्होंने खाना खाना शुरू कर दिया, तब उनका पास बनवाकर संस्था के खर्च पर गाड़ी की व्यवस्था कर 10 मई को प्रदीप रावत व उनके परिवार को गाँव पहुचाया गया। इसके लिए संस्था के कुछ जागरूक सदस्यों ने स्वेच्छा से धनराशि एकत्रित की थी।

इसके अलावा उत्तराखंड सांस्कृतिक समिति ने उत्तराखंड मूल के ही एक अन्य परिवार की भी इस लॉकडाउन के दौरान मदद की। समिति के अध्यक्ष को व्हाट्सएप के माध्यम से जानकारी मिली थी कि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग निवासी अरविंद आर्य का परिवार कासना में रह रहा है, उनके परिवार में पत्नी और तीन बेटियां हैं। उक्त व्यक्ति की पिछले कुछ समय से नौकरी छूट चुकी है। लॉकडाउन चलते वह अपने गाँव भी नहीं जा पा रहा है और अब उसके पास खाने के लिए राशन तक नहीं है। जेपीएस रावत ने इस मामले को समिति के पदाधिकारियों से चर्चा करने के बाद सबसे पहले अरविंद आर्य के अकाउंट में संस्था की ओर से 5 हजार रुपये पेटीएम से ट्रांसफर कराये। तथा साथ ही उनके घर पर करीब एक महीने का राशन भी भिजवाया। इसके बाद अब उनके लिए पास की व्यवस्था भी कर दी है। अरविंद आर्य का परिवार आगामी 15 मई को रुद्रप्रयाग स्थित अपने गाँव जायेगा।

समिति के अध्यक्ष जेपीएस रावत ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें पता चला है। कुछ लोग जिनका प्रदीप रावत की मदद करने ने रत्तीभर भी योगदान नहीं है वे लोग इसका श्रेय लेने के  लिए सोशल मीडिया में अफवाह फैला रहे हैं कि उन लोगों ने उत्तराखंड के किसी बड़े मंत्री की सहायता से प्रदीप रावत को घर पहुँचाने में मदद की। जबकि वास्तविकता यह नहीं है। जिस समय प्रदीप रावत इस मनोदशा के गुजर रहे थे उस समय उत्तराखंड सांकृतिक समिति के सदस्यों खासकर सेक्टर-36 में रहने वाले सदस्यों ने ही उनकी मदद की और उन्हें उनके गाँव तक पहुंचा कर ही राहत की साँस ली।

“खै जाली माँजी डाल्युं कि बेरी, कन किस्मत रै होलि मेरी”: लॉकडाउन के दौरान उत्तराखंडी कलाकारों ने मदर्स डे पर जन्मभूमि को इस तरह किया याद   

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दिल्ली : कोरोना (कोविड-19) रूपी महामारी से इस समय पूरा देश संकट के दौर से गुजर रहा है। इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए अब तक दिख रहे एक मात्र उपाय (लॉकडाउन) के चलते लोग अपने अपने घरों में कैद (सुरक्षित) हैं। लॉकडाउन के दौरान लोग जन्मदिन, शादी की सालगिरह से लेकर बड़े तीज त्योहारों को अपने अपने घरों में बैठकर ही मना रहे हैं। दो दिन पहले 10 मई को दुनियाभर में मदर्स डे (मातृ दिवस) भी मनाया गया।

मदर्स डे (मातृ दिवस) पर पर्वतीय न्यूज़ के संपादक प्रदीप वेदवाल ने दिल्ली/एनसीआर में रह रहे अपने पहाड़ के लोककलाकारों से बातचीत कर जानने की कोशिश की, कि कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन में पहाड़ों से दूर परदेश में रह कर वे मदर्स डे पर किस तरह से जन्म देने वाली माँ के साथ अपनी मातृभूमि (जन्मभूमि) को याद कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने यहाँ रह रही बुजर्ग माताओं से बातचीत कर बताया कि किस तरह से वे लोग अपने पहाड़ को मिस कर रहे हैं। बतादें कि अक्सर इन दिनों प्रवासी उत्तराखंडी (खासकर बुजुर्ग) दिल्ली/एनसीआर की गर्मी से निजात पाने के लिए पहाड़ में अपने अपने गाँव चले जाते थे। परन्तु इस समय परिस्थितियां दूसरी हैं।

यहाँ नीचे दिए गए वीडियो में देखे उत्तराखंडी लोक कलाकारों के द्वारा मातृ दिवस पर मातृभूमि को समर्पित कुछ लोकगीत “खै जाली माँजी डाल्युं कि बेरी, कन किस्मत रै होलि मेरी” (मुधु बेरिया शाह), नि छै ब्वे अब तेरी याद आणी चा, जब छै तु तब तेरी कदर नि जाणी (कुंजबिहारी मुंडेपी),।

 

लॉकडाउन में गाँव पहुँच रहे प्रवासियों की व्यवस्था को लेकर प्रमोद रावत ने जिलाधिकारी को लिखा पत्र

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पौड़ी गढ़वाल : कोरोना (कोविड-19) रूपी महामारी देशभर में लगातार अपने पैर पसार रही है। अब तक देशभर में 67 हजार से ज्यादा लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। यही नहीं पिछले 24 घंटों में देश में कोरोना वायरस के रिकॉर्ड 4,213 मामले सामने आये हैं। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा देशभर में किये गए लॉकडाउन के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे प्रवासियों को अपने राज्यों में वापस लाने के लिए राज्य सरकारें लगातार प्रयासरत हैं। इसीक्रम में उत्तराखंड सरकार द्वारा भी अब तक करीब 45 हजार प्रवासियों को राज्य में वापस लाया जा चुका है। जबकि अभी लगभग 2 लाख प्रवासियों की राज्य में आने की उम्मीद है। उत्तराखंड सरकार लॉकडाउन के दौरान विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी उत्तराखंडियों को उनके मूल स्थान तक पहुचाने के लिए संकल्पबद्ध है।

शासन/प्रशासन द्वारा बाहरी राज्यों से आने वाले प्रवासियों को लॉकडाउन की गाइडलाइन्स के अनुसार स्वास्थ्य परीक्षण के उपरांत उनके निवास तक भेजने और उनको होम क्वारंटाइन करने के लिए संबंधित विभागों के नोडल अधिकारियों को आदेश दिया गया है। हालाँकि इसके कारण कई ग्राम सभाओं में आपसी मतभेद या आपसी टकराव की खबरे सामने आ रही है। कई गांवों में स्कूल की व्यवस्था नही है, कहीं है भी तो बहुत एकांत में है जहाँ जंगली जानवरों का भय बना रहता है। वैसे भी मानवता के आधार पर छोटे छोटे बच्चे लेकर बाहर से आये प्रवासियों को वहां रखने में सुरक्षा की कमी नजर आती है। कई ग्राम सभाओं में अपना पंचायत भवन भी ठीक नही है जहाँ पानी, सौचालय, बिजली, जैसी मूल भूत सुविधाओं की कमी है।

उक्त समस्याओं को लेकर ग्राम प्रधान बेडगाँव व प्रधान संगठन अध्यक्ष (कल्जीखाल) प्रमोद रावत, ने जिला आधिकारी पौड़ी गढवाल को पत्र लिखकर माँग की है कि गाँव में आने वाले प्रवासियों के लिये नजदीकी इण्टर कॉलेज को क्वारंटाइन सेन्टर बनाये जाये। जहाँ उनको सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई जायें। और उनकी क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद सभी आवश्यक मेडिकल जांच कराने के उपरांत ही उन्हें गाँव, ग्रामसभा में जाने की अनुमति प्रदान की जाये। जिससे कि सभी लोगों मे आपसी भाई चारा बना रहे, और इस वैश्विक महामारी से मिलकर लड़ा जा सके।

जगमोहन डांगी 

नोएडा में मिले 6 नए कोरोना पॉजिटिव, सेक्टर-12 के हैं 2 मामले, जिले में 224 पहुंचा मरीजों का आंकड़ा

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नोएडा :  गौतमबुद्ध नगर जिले के नोएडा शहर में कोरोना मरीजों आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को नोएडा में कोरोना के 6 नए मामले सामने आए। जिसके बाद जिले में संक्रमित मरीजों की संख्या 224 हो गई है।

जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. सुनील दोहरे ने बताया कि सोमवार को कुल 22 लोगों की कोरोना जांच रिपोर्ट आई। जिनमें से 6 लोगों में पुष्टि हुई है, जबकि 16 लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। सोमवार को कोरोना वायरस पॉजिटिव आये लोगों में एक महिला समेत तीन लोग सेक्टर-66 के रहने वाले हैं। जबकि एक 48 वर्षीय महिला व 53 वर्षीय व्यक्ति सेक्टर-12 के रहने वाले हैं। वहीँ एक 40 वर्षीय युवक सेक्टर-8 का रहने वाला है। जिले में अब तक कोरोना कोविड-19 से संक्रमित मरीजों की संख्या 224 हो गई। वहीं 135 मरीज विभिन्न अस्पतालों से उपचार के दौरान ठीक होकर घर जा चुके हैं। 87 मरीजों का उपचार चल रहा है।

पीएम मोदी के साथ मुख्यमंत्रियों की बैठक में सीएम त्रिवेंद्र ने कहा अब तक 45 हजार प्रवासियों को लाया जा चुका है वापस

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PM Modi said this in a meeting with the Chief Ministers regarding the lockdown

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित मुख्यमंत्रियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिग में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के समय पर लिए गए साहसिक निर्णय से देश आज खुद को सुरक्षित महसूस कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कोविड-19 के दृष्टिगत समय-समय पर प्रधानमंत्री के साथ ही अन्य केन्द्रीय मंत्रियों, केबिनेट सचिव एवं अन्य विभागीय सचिवों द्वारा दिये गये मार्ग दर्शन के लिये भी आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि लॉकडाऊन के दौरान राज्य का कोई भी गरीब व्यक्ति भूखा नहीं सोया है। राज्य सरकार के साथ ही सामाजिक स्तर पर इसकी व्यापक व्यवस्था की गई है। कोविड-19 की रोकथाम के लिये राज्य में लगभग 500 डॉक्टरों की तैनाती की गई तथा इतने ही पैरामेडिकल स्टॉफ की व्यवस्था गई। राज्य के 13 जिलों में से 11 जिलों में आई.सी.यू., वेंटिलेटर एवं बाईपैप की व्यवस्था तथा पैरामेडिकल स्टॉफ के प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी असामान्य परिस्थिति का सामना किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कोरोना के मामले 45 दिनों में डबल हो रहे हैं तथा रिकवरी रेट 67.6 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि राज्य में 68 पोजिटिव मामले हैं जिनमें से 46 व्यक्ति स्वस्थ होकर घर लौट गये हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक राज्य में 45 हजार प्रवासियों को वापस लाया गया है। जिसका व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया गया है। पुणे व सूरत से भी ट्रेन द्वारा लोगों को वापस लाया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा लगभग 2 लाख श्रमिकों के खाते में 2,000 रूपये की धनराशि जमा करायी गयी है। लगभग 3500 उद्योगों में 45 प्रतिशत क्षमता के साथ कार्य आरम्भ किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में श्रमिक कानूनों में सुधार किया गया है। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की दिशा में पहल की गई है। मुख्यमंत्री ने उद्योगों की भांति किसानों को सिंगल विंडो सिस्टम की तरह पोर्टल तैयार किये जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसान मजबूत होगा तो आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि खनन के चुगान में बड़ी संख्या में श्रमिकों की आवश्यकता रहती है। इसके लिये भी एन.जी.टी से अनुमति प्रदान करने में प्राथमिकता दिये जाने की अपेक्षा मुख्यमंत्री ने की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आवासीय विद्यालयों को खोलने की अनुमति प्रदान करने के साथ ही वित्तीय सीमितता एवं टैक्स कलेक्शन में हो रही कमी के कारण ऋण सीमा को 3 प्रतिशत से 4 प्रतिशत किया जाए। कंटेनमेंट जोन के बाहर आर्थिक गतिविधियों को अनुमति दी जाए। राज्य के अन्दर ग्रीन जोन के बीच में सीमित पर्यटन गतिविधियां अनुमन्य की जाए। राज्य के द्वारा मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना पीएमईजीपी के स्वरूप पर प्रारम्भ कर दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महामारी से होटल, रेस्टोरेंट तथा पर्यटन एवं परिवहन व्यवसाय सर्वाधिक प्रभावित हुआ है। राज्य में करीब ढ़ाई लाख एमएसएमई उद्योग है जिनसे कई लाखां लोगों को रोजगार मिलता है इन्हें राहत देने के लिए विचार किया जाना चाहिए।

मनरेगा के अंतर्गत मानक गतिविधियों में होमस्टे एवं अन्य गतिविधियां भी अनुमन्य की जाए। मनरेगा के अंतर्गत अल्पावधि कृषि गतिविधियों को भी अनुमन्य किया जाना चाहिए। व्यक्तिगत लाभ की श्रेणी में पुरुष जॉब कार्ड धारक को फार्म उत्पादन प्रसंस्करण यूनिट का निर्माण अनुमन्य किया जाए (वर्तमान में यह एनआरएलएम स्वयं सहायता समूह की महिलाओं हेतु ही अनुमन्य है।) मनरेगा के पैटर्न पर शहरी क्षेत्रों में मजदूरों हेतु एक नई योजना लाई जानी चाहिए।

राज्य में काफी संख्या में प्रवासी आ रहे हैं जिनके पास कोई राशन कार्ड नहीं है। भारत सरकार द्वारा 01 अप्रैल के उपरांत राशन कार्ड बनाने पर मनाही की गई है। यह लोग अत्यंत गरीब है एवं राज्य में इनकी संख्या करीब 03 लाख के आसपास है। इनके जीवनयापन का भी कोई तत्काल साधन नही है। अतः इनके राशन कार्ड बनाने अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एसडीआरएफ की धनराशि से कोविड-19 के प्रबन्धन तथा अवस्थापना सृजन से सम्बन्धित समस्त खर्चे को अनुमन्य किया जाना चाहिए।

श्रीनगर गढ़वाल: स्वेच्छिक शिक्षक मंच एवं अजीम प्रेमजी फाउडेशन कोरोना संकट में मिलकर निभा रहे हैं सामाजिक जिम्मेदारी  

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Voluntary teachers forum and Azim Premji Foundation

श्रीनगर गढ़वाल : कोरोना (COVID 19) संकट के दौर में स्वेच्छिक शिक्षक मंच श्रीनगर गढ़वाल एवं अजीम प्रेमजी फाउडेशन जिला प्रशासन के साथ मिलकर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वाहन कर रहा है। स्वेच्छिक शिक्षक मंच श्रीनगर के शिक्षक सदस्यों ने श्रीनगर नगरपालिका क्षेत्र के अन्तर्गत तहसील राजस्व उप निरीक्षकों के साथ मिलकर अप्रवासी श्रमिकों का सर्वक्षण और वांछित सूचनाओं का संकलन कर निर्धारित प्रपत्रों में यथा समय सूचनाएं उपलब्ध करवा रहे हैं। इसीक्रम में सर्वेक्षण के दूसरे चरण में शिक्षकों ने वांछित सूचनाएं बैंक विवरण, आधार डीटेल आदि उपलब्ध कराये। साथ ही इस कार्य के दौरान शिक्षक साथियों द्वारा बेहद जरूरतमंदों का चिन्हाकन कर अजीम प्रेमजी फाउडेशन के आर्थिक सहयोग से उनके स्वाभिमान को बनाए रखते हुए रसद सामग्री उपलब्ध करायी गयी।

उल्लेखनीय है कि रसद साम्रगी वितरण के दौरान चिन्हित परिवार की गरिमा और आत्म सम्मान को बनाए रखा गया। इसी कार्य के दौरान अजीम प्रेमजी फाउडेशन द्वारा वेबिनार द्वारा डॉ.  कुलदीप (MBBS, MD) कम्यूनिटी मेडिसिन द्वारा कोविड 19 के विषय में आवश्यक जानकारियां प्रदान कर बचाव के तरीकों से अवगत कराया. साथ ही अध्यापको की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए उन्हे हैड सेनिटाइजर, फेस मास्क, और ग्लबस उपलब्ध कराये। इसके साथ ही पढने पढाने की कोशिश में लगातार शिक्षकों के साथ टेली कान्फ्रेंसिंग और विभिन्न एप के साथ कार्य किया।

इस टेली कान्फ्रेंसिंग में बाल साहित्यकार डॉ. गुरू वचन सिंह, ह्दय कांत दीवान, सौपान जोशी, मुख्य शिक्षा अधिकारी टिहरी शिव प्रसाद सेमवाल, तथा शिक्षकों से जुड़े, इस कार्य में तहसीलदार श्रीनगर सुनील राज का भी अहम योगदान रहा। इस पूरे मिशन में शामिल जगमोहन कठैत गढ़वाल प्रभारी, प्रदीप अंथवाल अजीम प्रेमजी फाउडेशन श्रीनगर, महेश गिरि स्वेच्छिक शिक्षक मंच श्रीनगर, हेम चन्द्र मंमगाई, ब्रजमोहन मेवाड़,  मनोजकांत उनियाल, विपिन गौतम, प्रकाश रावत, कैलाश पुण्डीर, श्रीमती आरती पुण्डीर, रा0 जू0 हाई0 शिक्षक संघ पौड़ी के जिला मंत्री मुकेश काला, मुकेश गौतम एवं कमलेश जोशी रहे।

लॉकडाउन के बीच रेलवे का बड़ा फैसला: 12 मई से चलेगी पैसेंजर ट्रेन, जानें कब और कहाँ से बुक कर सकते हैं टिकट

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Passenger trains will run from May 12

नई दिल्ली : देशभर में चल रहे लॉकडाउन 3.0 के बीच भारतीय रेल ने 12 मई (मंगलवार) से देश के 15 महत्वपूर्ण शहरों के लिए ट्रेनों के संचालन का फैसला किया है। शुरुआत में नई दिल्ली से देश के 15 महत्वपूर्ण शहरों के लिए 15 जोड़ी ट्रेन चलाई जाएंगी। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने आज ट्वीट कर यह जानकारी दी है। रेल मंत्री के मुताबिक रेलवे ने 12 मई से ट्रेन परिचालन को प्रारंभि‍क तौर पर शुरू करने की योजना तैयार कर ली है। शुरुआत में नई दिल्ली  से देश के बड़े शहरों के लिए 15 जोड़ी ट्रेनें चलाई जायेंगी। इन ट्रेनों में यात्रा करने के लिए सोमवार 11 मई शाम चार बजे से टिकटों की बुकिंग की जा सकेगी। टिकट केवल IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट https://www.irctc.co.in से ही ऑनलाइन बुक किये जा सकेंगे। केवल कंफर्म टिकट वाले यात्रियों को ही स्टेशन में प्रवेश करने की अनुमति होगी। इसके साथ ही यात्रियों को चेहरा ढंकना अनिवार्य होगा यानी कि आपके चेहरे पर मास्क या फिर किसी भी चीज से मुंह ढका होना चाहिए। रेल मंत्रालय ने कहा है कि सफर के दौरान यात्रियों के स्वास्थ्य और कोरोना संक्रमण की जांच भी की जाएगी।

12 मई से डिब्रूगढ़, अगरतला, हावड़ा, पटना, बिलासपुर, रांची, भुवनेश्वर, सिकंदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, तिरुवनंतपुरम, मडगांव, मुंबई सेंट्रल, अहमदाबाद और जम्मू तवी सहित कुल 15 शहरों के लिए नई दिल्ली से विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी।

कुमाऊं मंडल के 1200 लोगों को लेकर कल सुबह सूरत से काठगोदाम के लिए चलेगी स्पेशल ट्रेन

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देहरादून : लॉकडाउन के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे प्रवासियों को अपने राज्य में वापस लाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने वीडियो जारी कर बताया कि गुजरात के सूरत शहर में फंसे कुमाऊं मंडल के विभिन्न स्थानों (अल्मोड़ा-119, बागेश्वर-291, चम्पावत-06, हल्द्वानी-462, नैनीताल-48, पिथौरागढ़-254, रानीखेत-04, ऊधमसिंहनगर-16) के लगभग 1200 प्रवासियों को वापस लाने के लिए सोमवार 11 मई को प्रात: 4 बजे सूरत से काठगोदाम के लिए पहली स्पेशल ट्रेन चलेगी। इसी प्रकार गढ़वाल मंडल के यात्रियों के लिए 12 मई को सूरत से स्पेशल ट्रेन चलेगी हरिद्वार के लिए चलेगी. हरिद्वार के लिए चलने वाली ट्रेन का समय शीघ्र बताया जाएगा।

अभी तक करीब 26 हजार  से ज्यादा प्रवासी सकुशल उत्तराखंड लाये गए हैं। मुख्यमंत्री ने सभी प्रवासियों से अपील की है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, आप सभी को सकुशल उत्तराखंड लाया जाएगा। ट्रेन से वापस लाये जा रहे प्रवासियों के टिकट का पूरा खर्चा, खाने की व्यवस्था भी सरकार कर रही है। पंजीकरण करने वाले हर प्रवासी को व्हाट्सएप औऱ दूसरे माध्यम से ट्रेन का टिकट पहुंचाया जा रहा है।

नोएडा आज में फिर मिले 2 कोरोना पॉजिटिव, 218 पहुंचा जिले के संक्रमितों का आंकड़ा

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नोएडा : गौतमबुद्ध नगर जिले में कोरोना संक्रमण के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। आज (रविवार) को जिले के नोएडा क्षेत्र में 2 मरीजों में कोरोना की पुष्टि हुई है। जिसके बाद अब जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 218 हो गई है।

गौतमबुद्ध नगर के जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. सुनील दोहरे द्वारा जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार रविवार को 33 संदिग्ध मरीजों की कोरोना टेस्ट रिपोर्ट प्राप्त हुई। जिनमें से 2 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जबकि 31 लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आई हैं। इसके साथ ही जिले में अब तक कुल 218 लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। जिनमें से 135 लोग इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। जबकि 81 मरीजों का इलाज जारी है। वहीँ 2 मरीजों की कोरोना से मृत्यु हो चुकी है।

रविवार को नोएडा सेक्टर-22 निवासी एक 40 वर्षीय शख्स तथा एक 80 वर्षीय महिला की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। अच्छी खबर यह है कि रविवार को 14 मरीजों को स्वस्थ होने के बाद उनके घर भेज दिया गया है।

माँ धारी देवी के तीन रूप, तीन नामों की विशेषता

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Three forms of Goddess Dhari Devi, featuring three names

आदि शक्ति जगत् जननी माता जगदंबा का विराट स्वरूप श्रीनगर से मात्र 13 किलोमीटर दूर  अलकनंदा नदी के तट पर माँ धारी देवी का मंदिर है। जिसे शास्त्रों में ‘माँ श्मशान काली’ ‘महाकाली’, ‘दक्षिण काली’ आदि अनेक नामों से जाना जाता है। बद्रीनाथ, ‘केदार नाथ’ धाम की यात्रा’ करने से पहले यात्री मां धारी देवी का आशीर्वाद लेकर यात्रा की शुरुआत करते हैं। यहां  भक्तों की जिज्ञासा व जानकारी के लिए मां धारी देवी के तीनों नामों के अर्थ को स्पष्ट कर रहा हूँ।

श्मशान काली– ‘मां धारी देवी को श्मशान काली कहा जाता है। विद्वानों का मत है कि माँ श्मशान में निवास करती है। ‘श’ शब्द से शव और शान शब्द से शयन कहा जाता है। इस प्रकार जहां शव शयन करें ‘उस स्थान को मुनि जन और विद्वान श्मशान कहते हैं। जहां पृथ्वी जल तेज वायु और आकाश का लय होता है और शव मुर्दा रूप हो जाय वह श्मशान होता है। भक्त अपने हृदय में माँ भगवती के निवास की इच्छा करता है तो उसे अपने हृदय को राग द्वेष आदि सम्पूर्ण विकारों से रहित बना देना चाहिए। मां भगवती की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए अपने अन्दर की सम्पूर्ण बुराइयों को श्मशान बनाना पडता है। अर्थात समाप्त करना पडता है। तब जाकर मां भगवती अपनी कृपा बरसाती है।

दक्षिण काली– जिस प्रकार कर्म की समाप्ति पर दक्षिण फल की सिद्धि देने वाली होती है ‘उसी प्रकार मां भगवती भी सभी फलों को सिद्धि देती है। मां काली का सामान्य उच्चारण करने मात्र से मुंह मांगा वर देती है। इसलिए मां भगवती को दक्षिण काली कहा जाता है। दक्षिण मूर्ति भैरव  ने सर्वप्रथम मां काली की पूजा की थी। इसी कारण मां भगवती का नाम दक्षिण काली भी है।

महाकाली एक मात्र मां काली ही इस तरह की शक्ति स्वरूपा है जिसने महाकाल पर भी विजय प्राप्त की है। मां काली की भक्ति करने से मृत्यु पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है। इस मंदिर के सन्दर्भ में इस तरह की मान्यता है कि माँ प्रातः, दोपहर, सांय तीनों पहर में भक्तों को अपना अलग-अलग रूप दिखाती है। प्रातः काल के समय बाल्य सौम्य रूप, दोपहर में उग्र प्रचण्ड रूप और  सांय के समय वृद्धा के रूप मे अवतरित होती है। मा धारी देवी के चौखठ पर जो भी सच्ची श्रद्धा से जाता है, मां उसके सम्पूर्ण मनोरथ पूर्ण करती है। सच्चे भक्ति भाव से मां की प्रतिमा के आगे ध्यान लगाने से शक्ति की किरणों का प्रकटीकरण होना शुरू हो जाता है। भक्त अपने आप में खो जाता है। शरीर में रोमांच उत्पन्न होने लगता है। इस तरह का बोध होता है कि जैसे हमारे आसपास अलौकिक किरणों का संचार हो रहा है। यह अनुभूति शब्दों के माध्यम से व्यक्त नहीं की जा सकती है। माँ के मंदिर की एक अनूठी विशेषता यह है कि माँ के ऊपर छत्त नहीं रहती है। माँ खुले आसमान के नीचे रहती है। आज भी कोई भक्त मां धारी देवी की प्रतिमा को अपने घर में रखना चाहता है तो रख नहीं पाता है। उच्चाटन की स्थिति आ जाती है। मान्यता है कि जब भी इस क्षेत्र पर किसी तरह की संकट की स्थिति आती है तो मां आवाज लगाकर सचेत करती है। मंदिर के पास ही शिव का मंदिर भी है। जहां शिव शक्ति के रूप में पूजा की जाती है। माँ धारी देवी सदियों से उत्तराखंड की रक्षा करती है। इसका इतिहास बहुत पुराना है, 1807 से मां धारी देवी के स्थित होने के साक्ष्य मौजूद हैं। यहां के पुजारियों का मानना है कि मां धारी देवी का इतिहास इससे भी पुराना है। 1807 के साक्ष्य बाढ़ आने के कारण समाप्त हो गये थे। 1803-1814 तक गोरखा सेनापतियो के द्वारा मंदिर को दिया गया दान अभी भी प्रमाणिकता को स्वीकारते हैं। पुजारियों का मानना है कि द्वापर युग से ही मां काली की प्रतिमा यहाँ मौजूद थी। यहां मां काली के धड ‘धारी’ की पूजा होती है। शरीर की पूजा  कालीमठ में होती है। मां धारी देवी जाग्रत और साक्षात रूप में अपने भक्तों पर कृपा बनाये रखती है। इस प्रकार साधक विशुद्ध भाव से मां धारी देवी की भक्ति करता है तो उसके सम्पूर्ण मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं। मां धारी देवी के नाम का स्मरण करने मात्र से सभी प्रकार की बिघ्न बाधा दूर हो जाती है। जीवन पूर्ण रूप से उत्साहित बन जाता है।

ज्योतिषाचार्य अखिलेश चन्द्र चमोला, श्रीनगर गढ़वाल